Author: Devanand Singh

प्रतिभा का सम्मान या संबंधों का विस्तार? (सम्मान की आड़ में बढ़ता दिखावा, और संघर्षरत प्रतिभाओं की अनदेखी—क्या ये समारोह प्रेरणा हैं या केवल प्रभाव दिखाने का मंच?) — डॉ. सत्यवान सौरभ देशभर में IAS और IPS जैसी प्रतिष्ठित सेवाओं में चयनित अभ्यर्थियों के सम्मान समारोहों की परंपरा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। छोटे कस्बों से लेकर महानगरों तक, सामाजिक संस्थाएँ, शैक्षणिक संगठन, राजनीतिक समूह और विभिन्न मंच इन सफल युवाओं को सम्मानित करने के लिए कार्यक्रम आयोजित करते हैं। भव्य पंडाल, मंच पर सजी कुर्सियाँ, मालाओं और शॉल से सुसज्जित अतिथि, और हर क्षण को कैद…

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स्वार्थ, वर्चस्व और शांति का मार्ग देवानंद सिंह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत का यह कथन कि “दुनिया में संघर्षों की जड़ स्वार्थ और वर्चस्व की चाह है” केवल एक विचार नहीं, बल्कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का सटीक विश्लेषण भी है। आज जब विश्व के विभिन्न हिस्सों में युद्ध, धार्मिक तनाव, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक प्रभुत्व की होड़ जारी है, तब यह प्रश्न और भी प्रासंगिक हो जाता है कि आखिर मानव सभ्यता इतने विकास के बावजूद शांति का स्थायी मार्ग क्यों नहीं खोज पाई। इतिहास पर नजर डालें तो यह स्पष्ट होता है कि अधिकांश संघर्षों के…

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सीबीआई ने आरकॉम ऋण ‘धोखाधड़ी’ मामले में अनिल अंबानी से सात घंटे पूछताछ की नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) सीबीआई ने भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) और अनिल अंबानी के खिलाफ दर्ज 2,929 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी मामले के संबंध में शुक्रवार को उद्योगपति से सात घंटे से अधिक समय तक पूछताछ की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगातार दूसरे दिन, अनिल अंबानी सुबह करीब 10 बजे एजेंसी के मुख्यालय पहुंचे और शाम करीब 5.15 बजे कार्यालय से रवाना हुए। अधिकारियों ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने बैंक द्वारा कंपनी…

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अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस- 20 मार्च, 2026 प्रसन्नता का वैश्विक संकल्प और भारतीय संदर्भ -ललित गर्ग- मानव जीवन का अंतिम लक्ष्य क्या है-धन, वैभव, पद या प्रतिष्ठा। इन सबके पार जाकर यदि कोई तत्व जीवन को वास्तविक अर्थ देता है तो वह है खुशी। यही कारण है कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2012 में 20 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय खुशी दिवस के रूप में घोषित किया और 2013 से यह दिवस पूरी दुनिया में मनाया जाने लगा। यह केवल एक औपचारिक दिवस नहीं है, बल्कि एक वैश्विक चेतना का विस्तार है, जो इस विश्वास पर आधारित है कि खुशी प्रत्येक मनुष्य का…

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केरला समाजम मॉडल स्कूल के चेयरमैन केपीजी नायर का आकस्मिक निधन, शोक की लहर राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर। शहर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान केरला समाजम मॉडल स्कूल के चेयरमैन श्री केपीजी नायर के आकस्मिक निधन से पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन की खबर मिलते ही शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों में गहरा दुःख व्याप्त है। श्री नायर एक कर्मठ, सज्जन एवं संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया और संस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में स्कूल ने…

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अंडरवर्ल्ड पर ठाणे पुलिस का बड़ा प्रहार: कुख्यात गैंगस्टर रवि पुजारी गिरफ्तार, 27 मार्च तक पुलिस रिमांड पर! मुंबई (इंद्र यादव) ठाणे पुलिस आयुक्तालय की अपराध शाखा (खिंडणी विरोधी पथक) ने अंडरवर्ल्ड के खिलाफ एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। कई सालों से कानून की नजरों से बचकर विदेश में छिपे कुख्यात गैंगस्टर रवि प्रकाश सुल्या पुजारी उर्फ रवि पुजारी को आखिरकार ठाणे पुलिस ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है। इस गिरफ्तारी के साथ ही शहर में चल रहे जबरन वसूली के कई बड़े मामलों के पर्दाफाश होने की उम्मीद जग गई है। क्या है पूरा मामला यह कार्रवाई…

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सुलगता समाज, बंटता देश: कब टूटेगी जाति की जंजीर ! राष्ट्र संवाद मुंबई (इंद्र यादव) यह एक कड़वा सच है कि जिसे हम ‘परंपरा’ मानकर ढो रहे हैं, वह असल में समाज की नसों में फैला हुआ ‘जातिगत जहर’ है। यह जहर धीरे-धीरे हमारे भाईचारे और तरक्की को खत्म कर रहा है। जातिवाद: एक सामाजिक जहर जो हमें अंदर से खोखला कर रहा है पहचान का भ्रम और ‘ऊंच-नीच’ की दीवार इंसान की पहचान उसके काम, व्यवहार और योग्यता से होनी चाहिए। लेकिन जातिवाद ने हमें जन्म के आधार पर खानों में बांट दिया है। यह जहर हमें सिखाता है…

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मध्य-पूर्व संकट में ऊर्जा कूटनीति की परीक्षा देवानंद सिंह मध्य-पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को संकट में डाल दिया है। इस अस्थिरता के बीच सऊदी अरब द्वारा भारत को वैकल्पिक मार्ग से कच्चे तेल की आपूर्ति शुरू करना न केवल व्यावसायिक निर्णय है, बल्कि एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत भी है। भारत जैसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले देश के लिए ऊर्जा आपूर्ति का निर्बाध बने रहना अत्यंत आवश्यक है। अब तक भारत की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता रहा है, जो वर्तमान संकट…

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मुंबई पर यह ग्राउंड रिपोर्ट।और ठाणे में गैस किल्लत ने मजदूर और गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है। पढ़ें कालाबाजारी, महंगाई और प्रशासन की नाकामी  राष्ट्र संवाद मुंबई (इंद्र यादव) मुंबई की चकाचौंध और ठाणे की चिमनियों से निकलते धुएं के बीच एक खौफनाक सन्नाटा पसरा है। यह सन्नाटा उन घरों का है जहाँ आज शाम की चाय नहीं बनी और रात की रोटी के लाले पड़ गए हैं। गैस की किल्लत ने केवल होटलों की भट्ठियां ही नहीं बुझाईं, बल्कि उन लाखों किरायेदार परिवारों की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है, जो हर महीने अपनी गाढ़ी कमाई का…

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राज्यों (असम, बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी) के आगामी विधानसभा चुनाव और लोकतांत्रिक मूल्यों की कसौटी पर ललित गर्ग का विचारोत्तेजक संपादकीय पढ़ें। -ः ललित गर्ग:- भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया नहीं होते, बल्कि वे लोकतंत्र की परिपक्वता, जनविश्वास और राजनीतिक संस्कृति की परीक्षा भी होते हैं। जब किसी राज्य या क्षेत्र में चुनाव की घोषणा होती है तो स्वाभाविक रूप से राजनीतिक गतिविधियां तेज हो जाती हैं, आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता है और दल अपने-अपने एजेंडे को लेकर जनता के बीच पहुंचते हैं। किंतु इस पूरी प्रक्रिया के केंद्र में एक संस्था की…

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