Author: Devanand Singh

लेखक: ललित गर्गवेनेजुएला में हाल में आए भीषण भूकम्प ने केवल एक देश को नहीं, बल्कि पूरी मानवता को झकझोर दिया है। मृतकों और लापता लोगों की संख्या समय के साथ बदलती रही हो, लेकिन त्रासदी की भयावहता निर्विवाद है। हजारों परिवार अपने प्रियजनों को खोने की असहनीय पीड़ा से गुजर रहे हैं। ऐसे प्रत्येक अवसर पर पूरी दुनिया संवेदना व्यक्त करती है, राहत सामग्री भेजती है, सहायता अभियान चलाती है, लेकिन एक प्रश्न बार-बार हमारे सामने खड़ा हो जाता है-क्या हम हर बड़ी आपदा से कोई स्थायी सबक सीखते हैं या फिर कुछ दिनों की चर्चा और शोक के…

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लेखक: इंद्र यादवमहाराष्ट्र के ठाणे जिले में एक बार फिर पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। यह घटना चितलसर पुलिस स्टेशन से जुड़ी है, जहां एक सहायक पुलिस उपनिरीक्षक (ASI) पर मदद मांगने आई 25 वर्षीय युवती से छेड़छाड़ करने का आरोप लगा है। यह खबर सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है और पुलिस की छवि पर एक बार फिर दाग लगा है। यह गंभीर मामला, जिसमें एक ASI पर छेड़छाड़ का आरोप है, न सिर्फ न्यायिक बल्कि सामाजिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि यह सीधे तौर…

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लेखक: देवानंद सिंहपाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से इन दिनों जिस प्रकार विरोध प्रदर्शनों, जनाक्रोश और प्रशासनिक दमन की खबरें सामने आ रही हैं, वे केवल स्थानीय असंतोष की कहानी नहीं हैं। यदि राशन, पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को नियंत्रित कर जनता पर दबाव बनाने के आरोप सही हैं, तो यह एक गंभीर मानवीय और राजनीतिक प्रश्न है। ऐसी स्थिति अनायास ही 1947 की उन घटनाओं की याद दिलाती है, जब तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत पर दबाव बनाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी का सहारा लिया गया था। यह घटनाक्रम कहीं न कहीं PoK में 1947 की रणनीति की…

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लेखक: देवानंद सिंहपाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से इन दिनों जिस प्रकार विरोध प्रदर्शनों, जनाक्रोश और प्रशासनिक दमन की खबरें सामने आ रही हैं, वे केवल स्थानीय असंतोष की कहानी नहीं हैं। यदि राशन, पेट्रोल-डीजल और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को नियंत्रित कर जनता पर दबाव बनाने के आरोप सही हैं, तो यह एक गंभीर मानवीय और राजनीतिक प्रश्न है। ऐसी स्थिति अनायास ही 1947 की उन घटनाओं की याद दिलाती है, जब तत्कालीन जम्मू-कश्मीर रियासत पर दबाव बनाने के लिए आर्थिक नाकेबंदी का सहारा लिया गया था। यह दर्शाता है कि PoK में 1947 की रणनीति की पुनरावृत्ति…

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लेखक: प्रो. आरके जैन “अरिजीत”जब कोई राष्ट्र नई तकनीक नहीं, बल्कि नई दिशा गढ़ता है, तभी इतिहास करवट लेता है। 26 जून 2026 को कल्पक्कम ने भारत को ऐसा ही गौरवशाली क्षण दिया। परमाणु ऊर्जा विभाग ने इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आईजीसीएआर) में विश्व के पहले तांबा-क्लोरीन थर्मोकेमिकल चक्र आधारित ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र का शुभारंभ कर ऊर्जा विज्ञान की स्थापित धारणाओं को नई चुनौती दी। फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (एफबीटीआर) की न्यूक्लियर प्रोसेस हीट से संचालित यह संयंत्र पारंपरिक इलेक्ट्रोलिसिस आधारित प्रणालियों से पूरी तरह भिन्न है। इसकी नींव भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (बीएआरसी) की स्वदेशी तकनीक और…

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जमशेदपुर DD बार हत्याकांड: कार्रवाई से आगे बढ़कर जवाबदेही की मांग देवानंद सिंह जमशेदपुर शहर में हाल ही में घटी एक वीभत्स घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। बिष्टुपुर के प्रसिद्ध डबल डाउन (डीडी) बार के बाहर हिमांशु सिंह की निर्मम हत्या ने न केवल एक परिवार से उनके बेटे को छीन लिया, बल्कि शहर की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह DD बार हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक वारदात बनकर नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक चूक और पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठते सवालों का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है।…

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लेखक: इंद्र यादवएक देश का मतलब सिर्फ ज़मीन का टुकड़ा, नदियाँ या पहाड़ नहीं होते। एक देश का असली मतलब होता है—वहाँ रहने वाले लोगों का एक-दूसरे पर और अपनी व्यवस्था पर भरोसा।जब यह भरोसा टूटता है, तो देश अंदर से खोखला होने लगता है और तबाही का रास्ता साफ हो जाता है।आज हम बात करेंगे उस नींव की, जिस पर हमारा समाज टिका है: न्यायपालिका और सुरक्षा एजेंसियां।न्यायपालिका और व्यवस्था पर भरोसा: न्याय की उम्मीद का आखिरी केंद्रअदालतें वह जगह हैं जहाँ एक गरीब आदमी भी उम्मीद लेकर जाता है कि उसे इंसाफ मिलेगा। जिस दिन आम जनता को…

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लेखक: इंद्र यादवमुंबई/पुणे। पुणे के नसरापुर क्षेत्र में घटित एक अत्यंत वीभत्स घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। एक नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और उसकी नृशंस हत्या के मामले में पुणे की एक अदालत ने दोषी भीमराव कांबले को फांसी की सजा सुनाई है। इस फैसले ने न्याय के प्रति समाज की उम्मीदों को एक नई दिशा दी है। अदालत ने इस मामले को ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) श्रेणी का मानते हुए यह ऐतिहासिक फैसला दिया है, जो ऐसे जघन्य अपराधों के प्रति न्यायपालिका के सख्त रुख को दर्शाता है। नसरापुर दुष्कर्म-हत्याकांड एक ऐसा…

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लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददातादरभंगा: राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के स्नातकोत्तर गणित विभाग ने ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का महत्व’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया। यह आयोजन देश के महान सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती को चिह्नित करता है, जिनके योगदान ने भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान किया। इस दिन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण में सांख्यिकी के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है।भारत सरकार ने 2007 से प्रतिवर्ष 29 जून को प्रो. पी. सी. महालनोबिस के जन्मदिन को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप…

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सवाल पूछना अपराध नहीं, लोकतंत्र की आत्मा है – बिहार में पत्रकार पर छापेमारी से गरमाई बहस सवाल पूछना अपराध नहीं, लोकतंत्र की आत्मा है— यह बात बिहार के हालिया घटनाक्रम के बाद एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। पत्रकारिता का मूल धर्म ही है कि वह सत्ता, प्रशासन और व्यवस्था से जनता की ओर से जवाब मांगे। जब सवाल पूछना एक लोकतांत्रिक समाज की नींव को मजबूत करता है, तब यदि सवाल पूछने वालों पर ही कार्रवाई होने लगे, तो लोकतंत्र की बुनियाद कमजोर पड़ने लगती है। वरिष्ठ पत्रकार देवानंद सिंह ने भी अपने विचारों में…

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