लेखक: Press Trust of India
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित करते हुए ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया, जिसमें सात प्रमुख क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है। यह दृष्टिकोण भारत को वैश्विक महाशक्ति बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अधिक जानकारी के लिए PIB की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
शक्ति की सप्तधारा: सात स्तंभ
नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को ‘शक्ति की सप्तधारा’ का आह्वान किया और कहा कि ये सात शक्तियां भारत को नई गति तथा नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगी।
मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा कि अगले पांच-सात वर्षों में उन कार्यों को पूरा करने की शक्ति हासिल करनी होगी जो पांच-सात दशकों से अधूरे पड़े हैं।
पहली शक्ति: विनिर्माण शक्ति
मोदी ने ‘शक्ति की सप्तधारा’ के तहत पहली शक्ति को ‘विनिर्माण शक्ति’ बताते हुए कहा कि भारत को ‘कंपोनेंट’ एवं ‘डिजाइन’ से लेकर तैयार उत्पादों तक पूरी मूल्य श्रृंखला विकसित करनी होगी तथा भरोसेमंद वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला केंद्र के रूप में उभरना होगा।
दूसरी शक्ति: कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण
उन्होंने कहा कि दूसरी शक्ति कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण है।
किसानों के लिए दुनिया के बाजार खुलने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) से भारत को बड़ा बाजार मिल रहा है और अब खेत से निर्यात बाजार तक पहुंचने पर जोर देना होगा।
मोदी ने कहा कि भारत के पारंपरिक खानपान, मोटे अनाज (मिलेट्स), मसाले और फल-फूल वैश्विक ब्रांड बनने चाहिए।
तीसरी शक्ति: प्रौद्योगिकी और नवाचार
उन्होंने प्रौद्योगिकी और नवाचार को तीसरी शक्ति बताया और कहा कि आज का दौर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्वांटम प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स और डेटा सेंटर का है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को नवाचार का वैश्विक केंद्र बनना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने यूपीआई और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है और अब डिजिटल सार्वजनिक प्रौद्योगिकियों को दुनिया के हर कोने तक पहुंचाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत को अगली पीढ़ी की संचार प्रौद्योगिकी में नेतृत्व करना चाहिए और ‘मेड इन इंडिया 6जी’ को हर कोने तक पहुंचाना लक्ष्य होना चाहिए।
चौथी शक्ति: गतिशक्ति
सप्तधारा की चौथी शक्ति ‘गतिशक्ति’ को बताते हुए मोदी ने निर्बाध और तेज गति वाले संपर्क पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि शहरों को हाई-स्पीड रेल के जरिए जोड़ा जाना चाहिए और बंदरगाह आधारित विकास पर भी ध्यान देना होगा।
पांचवीं शक्ति: रक्षा शक्ति
उन्होंने रक्षा शक्ति को सप्तधारा की पांचवीं शक्ति बताया और कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना अब भारत और दुनिया दोनों की जरूरत बन गया है।
मोदी का कहना था कि जब दुनिया अपने-अपने हितों पर ध्यान दे रही है, तब भारत केवल दुनिया के लिए बाजार बनकर नहीं रह सकता।
मोदी ने कहा कि भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना होगा और अगली पीढ़ी की रक्षा प्रौद्योगिकी विकसित करके वैश्विक आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।
छठी शक्ति: हरित और नीली अर्थव्यवस्था
उन्होंने ‘हरित और नीली अर्थव्यवस्था’ छठी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत को हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व हासिल करना चाहिए तथा दुनिया की चुनौतियों के समाधान उपलब्ध कराने जारी रखने चाहिए।
प्रधानमंत्री के अनुसार, नीली अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और समुद्री प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं हैं, जो भारत के विकास के लिए नए रास्ते खोल सकती हैं।
सातवीं शक्ति: सॉफ्ट पावर
भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ को सप्तधारा की सातवीं शक्ति बताते हुए मोदी ने कहा कि योग ने पूरी दुनिया को भारत से जोड़कर रखा है।
उन्होंने कहा कि योग दुनिया के लिए ऊर्जा बनता जा रहा है और भारत के लिए विश्वास का बड़ा आधार बन रहा है।
विश्लेषण: शक्ति की सप्तधारा का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तुत ‘शक्ति की सप्तधारा’ भारत के आर्थिक, सामरिक और सांस्कृतिक उत्थान का एक समग्र खाका है। विनिर्माण शक्ति जहां मेक इन इंडिया को नई धार देगी, वहीं कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण किसानों की आय दोगुनी करने का मार्ग प्रशस्त करेगी। प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में AI, क्वांटम, 6G जैसी प्रौद्योगिकियों में नेतृत्व भारत को ज्ञान अर्थव्यवस्था का अग्रणी बनाएगा। गतिशक्ति बुनियादी ढांचे की बाधाओं को दूर करेगी, जबकि रक्षा शक्ति सामरिक स्वायत्तता सुनिश्चित करेगी। हरित और नीली अर्थव्यवस्था जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को अवसर में बदलेगी, और सॉफ्ट पावर के रूप में योग विश्व में भारत की सांस्कृतिक छवि को मजबूत करेगा।
इस प्रकार, ‘शक्ति की सप्तधारा’ के माध्यम से प्रधानमंत्री ने भारत के सर्वांगीण विकास का खाका प्रस्तुत किया है। विनिर्माण, कृषि, प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, रक्षा, हरित अर्थव्यवस्था और सॉफ्ट पावर ये सातों स्तंभ नए भारत की नींव रखेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह रणनीति भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में सहायक होगी।

