प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। उनका यह भाषण स्वतंत्रता दिवस पर 75 मिनट का संबोधन रहा, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा संबोधन साबित हुआ। इस अवसर पर उन्होंने देश के विकास, सुधारों और भविष्य की योजनाओं पर प्रकाश डाला।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री का संबोधन देश की दिशा और प्राथमिकताओं को दर्शाता है। इस वर्ष का 75 मिनट का भाषण न केवल समय की दृष्टि से बल्कि सामग्री की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा।
स्वतंत्रता दिवस पर 75 मिनट का संबोधन: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य
नयी दिल्ली, 15 अगस्त (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस पर 75 मिनट का संबोधन दिया, जो पिछले चार वर्षों में उनका सबसे छोटा और अब तक का चौथा सबसे छोटा स्वतंत्रता दिवस भाषण रहा।
पिछले वर्ष 79वें स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी ने 103 मिनट का भाषण दिया था, जो उनका अब तक का सबसे लंबा संबोधन था। इससे पहले उन्होंने 78वें स्वतंत्रता दिवस (2024) पर 98 मिनट का भाषण देकर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा था।
साल 2024 से पहले प्रधानमंत्री मोदी का सबसे लंबा स्वतंत्रता दिवस भाषण 2016 में 96 मिनट का था, जबकि उनका सबसे छोटा भाषण 2017 में 56 मिनट का रहा था।
शनिवार को मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वां स्वतंत्रता दिवस संबोधन दिया। पिछले वर्ष उन्होंने लगातार 12 बार लाल किले से संबोधन देकर इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ा था और इस मामले में वह केवल जवाहरलाल नेहरू से पीछे हैं, जिन्होंने लगातार 17 बार लाल किले की प्राचीन से देश को संबोधित किया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में अपना पहला स्वतंत्रता दिवस भाषण दिया था, जो 65 मिनट का था।
उनका 2015 का भाषण 88 मिनट, 2018 का 83 मिनट, 2019 का लगभग 92 मिनट, और 2020 का भाषण 90 मिनट का था।
इसके बाद 2021 में उनका संबोधन 88 मिनट, 2022 में 74 मिनट, और 2023 में 90 मिनट का रहा।
मोदी से पहले जवाहरलाल नेहरू ने 1947 और आई. के. गुजराल ने 1997 ने क्रमशः 72 मिनट और 71 मिनट के सबसे लंबे स्वतंत्रता दिवस भाषण दिए थे।
वहीं, जवाहरलाल नेहरू ने 1954 और इंदिरा गांधी ने 1966 में स्वतंत्रता दिवस पर सबसे छोटे भाषण दिए थे, जिनकी अवधि केवल 14 मिनट थी।
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अटल बिहारी वाजपेयी के कुछ स्वतंत्रता दिवस भाषण भी सबसे छोटे भाषणों में शामिल हैं।
मनमोहन सिंह के 2012 और 2013 के भाषण क्रमशः 32 मिनट और 35 मिनट के थे, जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के 2002 और 2003 के भाषण क्रमशः 25 मिनट और 30 मिनट के रहे थे।
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषणों की अवधि: एक नज़र
- 2014: 65 मिनट
- 2015: 88 मिनट
- 2016: 96 मिनट
- 2017: 56 मिनट
- 2018: 83 मिनट
- 2019: 92 मिनट
- 2020: 90 मिनट
- 2021: 88 मिनट
- 2022: 74 मिनट
- 2023: 90 मिनट
- 2024: 98 मिनट
- 2025: 75 मिनट
विशेषज्ञों के अनुसार, भाषण की अवधि में कमी सरकार के आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टिकोण को इंगित करती है। पिछले वर्षों में लंबे भाषणों के माध्यम से विस्तृत योजनाएं प्रस्तुत की जाती थीं, जबकि इस वर्ष का संक्षिप्त संबोधन प्रमुख उपलब्धियों और भविष्य के लक्ष्यों पर केंद्रित रहा।
इसके अलावा, लाल किले से लगातार 13वीं बार संबोधन देकर प्रधानमंत्री मोदी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केवल जवाहरलाल नेहरू ही उनसे आगे हैं, जिन्होंने 17 बार लगातार संबोधन दिया था। यह निरंतरता लोकतांत्रिक परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधानमंत्री के भाषणों की अवधि और सामग्री कैसे विकसित होती है। स्वतंत्रता दिवस का संबोधन हमेशा राष्ट्र के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर होता है, जहां नेतृत्व अपनी दृष्टि साझा करता है। इस वर्ष का संक्षिप्त परंतु प्रभावी भाषण देशवासियों के लिए एक स्पष्ट संदेश लेकर आया है। अधिक जानकारी के लिए आप प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जा सकते हैं।

