ब्राह्मी लिपि पर त्रिदिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ, भारतीय ज्ञान-परंपरा से जुड़े प्रतिभागी
राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली: भारतीय विरासत संस्थान (आईआईएच), नोएडा एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के संयुक्त तत्वावधान में 2 से 4 जून तक “ब्राह्मी लिपि” विषय पर त्रिदिवसीय कार्यशाला का शुभारम्भ हुआ। उद्घाटन अवसर पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव एवं आईआईएच के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी, प्रो. सुधीर कुमार लाल और प्रो. (डॉ.) अनुपा पाण्डे उपस्थित रहे।
डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि ऐसी कार्यशालाएं युवाओं में भारतीय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान-परंपरा के प्रति संवेदनशीलता विकसित करती हैं। प्रो. अनुपा पाण्डे ने ब्राह्मी लिपि के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि प्रो. सुधीर कुमार लाल ने इसे भारत की अनेक लिपियों का मूल स्रोत बताया।
कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 50 प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिनमें छात्र, शिक्षक, शोधार्थी और विषय विशेषज्ञ शामिल हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य ब्राह्मी लिपि, प्राचीन शिलालेखों और भारतीय अभिलेखीय परंपरा के अध्ययन की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराना है।
ब्राह्मी लिपि भारतीय इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर की महत्वपूर्ण कड़ी रही है। सम्राट अशोक के अभिलेखों से लेकर अनेक प्राचीन ग्रंथों तक इसकी विशेष भूमिका रही है। कार्यशाला के माध्यम से नई पीढ़ी को भारत की प्राचीन ज्ञान-परंपरा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

