Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » अब कोवैक्सिन से साइड इफेक्ट्स का दावा, स्टडी में ब्लड क्लॉटिंग, सांस में इंफेक्शन के मामले सामने आए
    Breaking News Headlines राष्ट्रीय

    अब कोवैक्सिन से साइड इफेक्ट्स का दावा, स्टडी में ब्लड क्लॉटिंग, सांस में इंफेक्शन के मामले सामने आए

    Devanand SinghBy Devanand SinghMay 16, 2024No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

     

     

    अब कोवैक्सिन से साइड इफेक्ट्स का दावा, स्टडी में ब्लड क्लॉटिंग, सांस में इंफेक्शन के मामले सामने आए
    नई दिल्ली. भारत बायोटेक की कोरोना वैक्सीन कोवैक्सिन के भी साइड इफेक्ट्स हैं. यह बात इकोनॉमिक टाइम्स ने साइंस जर्नल स्प्रिंगरलिंक में प्रकाशित हुई एक रिसर्च के हवाले से लिखी है. रिसर्च के मुताबिक बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) में हुई स्टडी में हिस्सा लेने वाले लगभग एक तिहाई लोगों में कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं.

     

     

    इन लोगों में सांस संबंधी इन्फेक्शन, ब्लड क्लॉटिंग व स्किन से जुड़ी बीमारियां देखी गईं. शोधकर्ताओं ने पाया कि टीनएजर्स खास तौर पर किशोरियों व किसी भी एलर्जी का सामना कर रहे लोगों को कोवैक्सिन से खतरा है. कुछ दिन पहले कोवैक्सिन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कहा था कि उनकी बनाई हुई वैक्सीन सुरक्षित है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कोवैक्सिन के दो डोज लगवाए थे.

     

     

    स्टडी करने वाले छात्र ने कहा कि हमने उन लोगों का डेटा कलेक्ट किया जिन्हें वैक्सीन लगे एक साल हो गया था. 1024 लोगों पर स्टडी हुई. इनमें से 635 किशोर और 291 वयस्क शामिल थे. स्टडी के अनुसार 304 (47.9) किशोरों व 124 (42.6) प्रतिशत वयस्कों में सांस संबंधी इन्फेक्शन (अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन) देखे गए. इससे लोगों में सर्दीए खांसी जैसी समस्याएं देखी गईं. स्टडी में पाया गया कि स्टडी में हिस्सा लेने वाले टीनएजर्स में स्किन से जुड़ी बीमारियां (10.5 प्रतिशत) नर्वस सिस्टम से जुड़े डिसऑर्डर (4.7 प्रतिशत) और जनरल डिसऑर्डर (10.2 प्रतिशत) देखे गए. वहीं वयस्कों में जनरल डिसऑर्डर (8.9 प्रतिशत) मांसपेशियों व हड्डियों से जुड़े डिसऑर्डर (5.8 प्रतिशत) व नर्वस सिस्टम से जुड़े डिसऑर्डर (5.5 प्रतिशत) देखे गए. कोवैक्सिन के साइड इफेक्ट्स पर हुई स्टडी में(4.6 प्रतिशत) किशोरियों में मासिक धर्म संबंधी असामान्यताएं देखी गईं. प्रतिभागियों में आंखों से जुड़ी असामान्यताएं (2.7 प्रतिशत) व हाइपोथायरायडिज्म (0.6 प्रतिशत) भी देखा गया. वहीं (0.3 प्रतिशत) प्रतिभागियों में स्ट्रोक और (0.1 प्रतिशत) प्रतिभागियों में गुलियन बेरी सिंड्रोम की पहचान भी हुई.

     

     

     

    गुलियरन बेरी सिंड्रोम शरीर के बड़े हिस्से को धीरे-धीरे निशक्त कर देती है-

    गुलियन बेरी सिंड्रोम एक ऐसी बीमारी है जो लकवे की ही तरह शरीर के बड़े हिस्से को धीरे-धीरे निशक्त कर देती है. अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर एंड स्ट्रोक के अनुसार गुलियन बेरी सिंड्रोम एक रेयर न्यूरोलॉजिकल बीमारी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्टडी में हिस्सा लेने वाले जिन टीनएजर्स और महिला वयस्कों को पहले से कोई एलर्जी थी और जिन्हें वैक्सीनेशन के बाद टाइफाइड हुआ उन्हें खतरा ज्यादा था.

     

     

    भारत बायोटेक ने कहा था कोवैक्सिन सेकिसी बीमारी का केस सामने नहीं आया

    2 मई को कंपनी ने कहा था कि कोवैक्सिन की सुरक्षा का मूल्यांकन देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने किया था. कोवैक्सिन बनाने से लगाने तक लगातार इसकी सेफ्टी मॉनिटरिंग की गई थी. कोवैक्सिन के ट्रायल से जुड़ी सभी स्टडीज व सेफ्टी फॉलोअप एक्टिविटीज से कोवैक्सिन का बेहतरीन सेफ्टी रिकॉर्ड सामने आया है. अब तक कोवैक्सिन को लेकर ब्लड क्लॉटिंग, थ्रॉम्बोसाइटोपीनिया, पेरिकार्डिटिस, मायोकार्डिटिस जैसी किसी भी बीमारी का कोई केस सामने नहीं आया है. कंपनी ने कहा था कि अनुभवी इनोवेटर्स और प्रोडक्ट डेवलपर्स के तौर पर भारत बायोटेक की टीम यह जानती थी कि कोरोना वैक्सीन का प्रभाव कुछ समय के लिए हो सकता हैए पर मरीज की सुरक्षा पर इसका असर जीवनभर रह सकता है. यही वजह है कि हमारी सभी वैक्सीन में सेफ्टी पर हमारा सबसे पहले फोकस रहता है.

     

     

    कोवीशील्ड को लेकर विवाद-

    कोवीशील्ड को लेकर विवाद चल रहा है कि इसे लगाने से कुछ केस में लोगों को थ्रॉम्बोसिस थ्रॉम्बोसाइटोपेनिया सिंड्रोम हो सकता है. इस बीमारी से शरीर में खून के थक्के जम जाते हैं और प्लेटलेट्स की संख्या गिर जाती है. स्ट्रोक व हार्ट बीट थमने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं. दरअसलए भारत में सबसे पहली कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड है. इसे पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ने बनाया है. कोवीशील्ड फॉर्मूला ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका से लिया गया है. एस्ट्रेजेनेका ने अब ब्रिटिश अदालत में माना कि उनकी वैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट्स हैं.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleजिला निर्वाचन पदाधिकारी ने होम वोटिंग का लिया जायजा, बुजुर्ग मतदाताओं का बढ़ाया उत्साह, बोले- लोकतंत्र की मजबूती में एक-एक मत महत्वपूर्ण
    Next Article गठबंधन प्रत्याशी समीर महंती का शहरी क्षत्रों में तूफानी जनसंपर्क अभियान तेज

    Related Posts

    पूर्वी सिंहभूम महिला आयाम के द्वारा महिलाओं के बीच एमआरपी नीति को लेकर जागरूकता अभियान

    June 6, 2026

    ब्रह्मर्षि विकास मंच की गोविंदपुर इकाई का गठन, विरेन्द्र मौआर बने अध्यक्ष

    June 6, 2026

    पार्वती घाट में नई सुविधाओं का शुभारंभ, पर्यावरण अनुकूल फरनेस और ‘देव आत्मा उद्यान’ शुरू

    June 6, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    बीएलओ की लापरवाही पर प्रशासन सख्त, रेणुका महतो और रीता देवी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा

    चक्रधरपुर रेल मंडल आरपीएफ थाना प्रभारी कमलेश समादार रिश्वतखोरी मामले में गिरफ्तार, सीबीआई की बड़ी कार्रवाई से आरपीएफ में मचा हड़कंप

    डोमजूरी पंचायत की मुखिया ने नरवा के पर्सनल मैनेजर को सौंपा ज्ञापन, नरवा पुलिया के दोनों साइड जाली लगाने की मांग

    बोलानी थाना क्षेत्र मे अज्ञात वाहन के धक्के से मोटसाइकिल सवार युवक की मौत

    रुंगटा स्टील हादसे में झुलसे मजदूर ने तोड़ा दम, 15 लाख मुआवजे पर बनी सहमति, परिजनों ने लिया शव

    पूर्वी सिंहभूम महिला आयाम के द्वारा महिलाओं के बीच एमआरपी नीति को लेकर जागरूकता अभियान

    ब्रह्मर्षि विकास मंच की गोविंदपुर इकाई का गठन, विरेन्द्र मौआर बने अध्यक्ष

    पार्वती घाट में नई सुविधाओं का शुभारंभ, पर्यावरण अनुकूल फरनेस और ‘देव आत्मा उद्यान’ शुरू

    पार्वती घाट में नई सुविधाओं का शुभारंभ, पर्यावरण अनुकूल फरनेस और ‘देव आत्मा उद्यान’ शुरू राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर: पार्वती घाट समिति ने 6 जून से नागरिकों के लिए कई नई सुविधाओं की शुरुआत की है। पर्यावरण संरक्षण और अंतिम संस्कार व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से घाट परिसर में आधुनिक लकड़ी आधारित फरनेस, ‘देव आत्मा उद्यान’ तथा ‘पवित्र निकेतन’ के नवीनीकरण कार्य का शुभारंभ किया गया। समिति द्वारा स्थापित नया फरनेस कम लकड़ी की खपत के साथ कम समय में अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करता है तथा चिमनी व्यवस्था के कारण प्रदूषण भी कम करता है। इसके लिए श्री कृष्ण मुरारी गुप्ता ने 11 लाख रुपये का योगदान दिया है। नवजात और पांच वर्ष तक के बच्चों के अंतिम संस्कार हेतु विकसित ‘देव आत्मा उद्यान’ में छह सीमांकित क्षेत्र बनाए गए हैं। इस परियोजना में कई समाजसेवियों और दानदाताओं ने पांच-पांच लाख रुपये का सहयोग दिया है। इसके अलावा, शौचालय एवं स्नान क्षेत्र ‘पवित्र निकेतन’ के नवीनीकरण के लिए श्री निर्मल भाई पांड्या ने पांच लाख रुपये का योगदान दिया है। समिति ने कहा कि समाज के सहयोग से पार्वती घाट में अंतिम संस्कार संबंधी सुविधाओं को अधिक स्वच्छ, व्यवस्थित और मानवीय बनाया जा रहा है तथा सभी दानदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।

    करंट ने छीन ली कलम की आवाज: दैनिक भास्कर के पत्रकार मृत्युंजय सिंह का निधन, पत्रकार जगत में शोक

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.