लखनऊ में मोहन भागवत का सामाजिक सद्भाव संदेश, तीन बच्चों की वकालत; NSUI का विरोध, सीएम योगी से मुलाकात के निकले मायने
राष्ट्र संवाद संवाददाता
लखनऊ:राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मंगलवार को निराला नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित किया। उन्होंने हिंदू समाज को संगठित और सशक्त होने की आवश्यकता पर बल देते हुए घटती जनसंख्या पर चिंता जताई और परिवारों से कम से कम तीन बच्चे होने की बात कही।
भागवत ने कहा कि “हमें किसी से खतरा नहीं है, लेकिन सजग रहना जरूरी है।” उन्होंने लालच और जबरदस्ती के मतांतरण पर रोक लगाने तथा ‘घर वापसी’ अभियान को तेज करने की आवश्यकता बताई। घुसपैठ के मुद्दे पर उन्होंने “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” की बात कही और ऐसे लोगों को रोजगार न देने पर जोर दिया।
सद्भाव पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि भेदभाव समाज को कमजोर करता है और समन्वय से ही समाज आगे बढ़ता है। उन्होंने महिलाओं को परिवार का आधार बताते हुए आत्मरक्षा प्रशिक्षण की वकालत की तथा कहा कि कानून सभी को मानना चाहिए, और यदि कानून में त्रुटि हो तो उसे संवैधानिक तरीके से बदला जा सकता है।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान एनएसयूआई से जुड़े कुछ छात्रों ने “भागवत गो बैक” के नारे लगाकर विरोध भी दर्ज कराया। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
इस बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मोहन भागवत की मुलाकात भी चर्चा में रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सामाजिक समरसता, जनसंख्या विमर्श और संगठनात्मक मुद्दों पर समन्वय का संकेत देती है, जिसके आगामी राजनीतिक परिदृश्य में व्यापक मायने निकाले जा रहे हैं।

