गिरे पेड़ों को दो माह बाद भी नहीं हटाया, हादसे का इंतजार कर रहा वन विभाग
बाड़ा में दुकान की छत पर गिरा पाकड़, तेतराही पथ पर बीच सड़क में पड़ा सिम्मड़ का पेड़; राहगीरों को हो रही परेशानी
राजेश कुमार,खोदावंदपुर/बेगूसराय। आंधी-बारिश में करीब दो माह पूर्व गिरे पेड़ों को हटाने में वन विभाग की कथित लापरवाही अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गयी है. बाड़ा दुर्गा मंदिर के समीप दुकान पर गिरा पाकड़ का पेड़ और पेठिया से तेतराही जाने वाली सड़क पर गिरा सिम्मड़ का पेड़ आज भी जस का तस पड़ा हुआ है. सड़क पर गिरे पेड़ के कारण राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. वहीं दुकान की छत पर पेड़ गिरने से दुकानदारों और ग्राहकों की परेशानी बढ़ गयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पेड़ गिरने की सूचना वन विभाग को दिए जाने के बावजूद अब तक उसे हटाने की कार्रवाई नहीं की गयी. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि किसी संभावित हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी? पंचायत स्तर पर निर्मित दुकान की छत पर पेड़ गिरने से संपत्ति को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ आसपास के लोगों की सुरक्षा पर भी खतरा बना हुआ है.
बस हादसे के बाद भी नहीं चेता विभाग:-
वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा पहले भी लोगों को भुगतना पड़ा है. बेगूसराय-रोसड़ा मुख्य पथ एस एच- 55 तारा चौक से फफौत जाने वाली सड़क पर झुके शीशम के पेड़ से पटना से हसनपुर-बिथान जानेवाली बस टकराने की घटना में तारा गांव के चंद्रभूषण कुमार, बरदाहा के मनीष कुमार सहित 13 यात्री गंभीर रूप से जख्मी हो गये थे. स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे खतरनाक स्थिति में झुके पेड़ को समय रहते नहीं हटाया गया, जिसके कारण हादसे की स्थिति बनी.
सीएचसी और थाना परिसर में भी खतरा:-
खोदावंदपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में एक पेड़ भवन की ओर झुका हुआ है, जिससे कभी भी भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका बनी हुई है. इसी तरह थाना परिसर में भी पुराना सिरीठ का पेड़ जर्जर अवस्था में बताया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते ऐसे खतरनाक पेड़ों को हटाया नहीं गया तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता.
सड़क किनारे सूखे पेड़ भी बने खतरा:-
क्षेत्र में कई स्थानों पर सड़क किनारे सूखे पेड़ खड़े हैं तो कहीं आंधी-बारिश में गिरे पेड़ पड़े हुए हैं. इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है. ग्रामीणों का कहना है कि कई जगह गिरे पेड़ों को स्थानीय लोग जलावन के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा न तो इनकी नियमित निगरानी की जा रही है और न ही खतरा बने पेड़ों को समय पर हटाया जा रहा है. सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने वन विभाग से मांग की है कि सरकारी जमीन, सड़क या खेत में सरकारी पौधे गिरने की सूचना मिलते ही तत्काल कार्रवाई की जाए. आंधी-बारिश के बाद गिरे अथवा खतरनाक स्थिति में झुके पेड़ों का अविलंब निरीक्षण कर उन्हें हटाया जाए, ताकि राहगीरों, वाहन चालकों और आसपास के लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके. स्थानीय लोगों ने कहा कि पौधों की देखभाल और सुरक्षा के नाम पर यदि केवल खानापूर्ति होती रही और विभाग ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?


