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    आरोप, आवेदन और सन्नाटा: भूमि माफिया के आगे सिस्टम और ब्रह्मर्षि विकास मंच क्यों मौन है?

    News DeskBy News DeskJanuary 3, 2026No Comments3 Mins Read
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    आरोप, आवेदन और सन्नाटा: भूमि माफिया के आगे सिस्टम और ब्रह्मर्षि विकास मंच क्यों मौन है?

    देवानंद सिंह
    ब्रह्मर्षि विकास मंच की एक बैठक में राष्ट्र संवाद पर “टारगेट करने” का जो आरोप लगाया गया था, वह उस समय भले ही एक भावनात्मक प्रतिक्रिया रहा हो, लेकिन आज वही मुद्दा एक बड़े और गंभीर सवाल में तब्दील हो चुका है। सवाल सिर्फ किसी अखबार पर आरोप का नहीं है, सवाल है भूमि माफिया, जांच की मांग और सत्ता–प्रशासन की चुप्पी का।
    30 दिसंबर को विधिवत आवेदन दिया गया। 31 दिसंबर को रिमाइंडर भी चला गया। आवेदन में भूमि से जुड़े संदिग्ध लेन-देन, फर्जीवाड़े और रसूखदार लोगों की संलिप्तता का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद न कोई जवाब, न कोई जांच, न कोई बयान।

     

    *क्या यही प्रशासनिक संवेदनशीलता है?*

    जब किसी गरीब की जमीन जाती है, तब फाइल दौड़ती है।
    लेकिन जब “भूमि माफिया” शब्द सामने आता है, तब वही फाइलें जैसे गूंगी हो जाती हैं।
    यही चुप्पी सबसे बड़ा शक पैदा करती है।
    राष्ट्र संवाद पर लगाए गए आरोपों की भी सच्चाई सामने आनी चाहिए। आखिर किस आधार पर यह कहा गया कि अखबार किसी को “टारगेट” कर रहा है?

    *क्या सच लिखना टारगेटिंग है?*

    *क्या दस्तावेजों के आधार पर सवाल उठाना अपराध हो गया है?*
    यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि जब मीडिया जमीन घोटालों, फर्जी रजिस्ट्री और माफिया गठजोड़ की बात करता है, तब कुछ लोगों को यह “हमला” लगने लगता है।
    लेकिन लोकतंत्र में मीडिया का काम ही सवाल पूछना है, न कि चुप रहना।

    *ब्रह्मर्षि विकास मंच की सामाजिक छवि पर भी यह समय आत्ममंथन का है।* मंच का इतिहास गलत के खिलाफ खड़े होने का रहा है। संभव है कि कुछ लोगों ने मंच की आड़ लेकर अपने निजी स्वार्थ साधने की कोशिश की हो। अगर ऐसा है, तो मंच को खुद आगे आकर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
    सबसे बड़ा सवाल यही है—
    अगर आरोप गलत हैं तो जांच से डर क्यों?
    और अगर आरोप सही हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
    सीबीआई जांच की मांग कोई हल्की बात नहीं होती। यह तब उठती है, जब स्थानीय सिस्टम पर भरोसा टूटता है। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी न सिर्फ संदेह को जन्म देती है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि रसूखदारों के आगे कानून कमजोर है।
    *राष्ट्र संवाद यह सवाल पूछता रहेगा*
    क्योंकि चुप्पी माफिया को मजबूत करती है,
    और सवाल ही लोकतंत्र की असली ताकत हैं।
    अब गेंद प्रशासन के पाले में है।
    या तो वह जांच का रास्ता चुने,
    या फिर इतिहास में उस चुप्पी का हिस्सा बने
    जो हर जमीन घोटाले के बाद रह जाती है।

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