हाईवा से सड़क पर गिर रहा यूरेनियम अयस्क, धूल में सांस ले रहे राहगीर
*तुरामडीह-जादूगोड़ा मार्ग पर 25 किमी तक बिखरे अयस्क के ढेर, बिना तिरपाल ढुलाई का आरोप; 48 घंटे का अल्टीमेटम*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, जादूगोड़ा
तुरामडीह से जादूगोड़ा प्लांट तक यूरेनियम अयस्क की ढुलाई करने वाले हाईवा इन दिनों जादूगोड़ा-मुसाबनी मुख्य सड़क पर ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई हाईवा बिना तिरपाल ढके चल रहे हैं और रास्ते में अयस्क गिरने से सड़क किनारे काली-कत्थई धूल जमा हो रही है। करीब 25 किलोमीटर के मार्ग पर जगह-जगह अयस्क के छोटे-छोटे ढेर दिखाई देने की बात ग्रामीणों ने कही है।
तेज रफ्तार हाईवा के पीछे चलने वाले बाइक सवार, साइकिल चालक और पैदल राहगीर धूल की चपेट में आ रहे हैं। ग्रामीणों ने आंखों में जलन, किरकिरी और धुंधलेपन जैसी परेशानी की शिकायत की है। सवाल यह है कि यूरेनियम अयस्क की धूल सामान्य सड़क धूल से कितनी अलग और स्वास्थ्य के लिए कितनी जोखिमपूर्ण है, इसकी वैज्ञानिक जांच कब होगी?
स्थानीय लोगों के अनुसार उन्होंने कई बार यूसीआईएल प्रबंधन से शिकायत की। उनका दावा है कि प्रबंधन ने ठेकेदार को हाईवा को पूरी तरह तिरपाल से ढककर अयस्क ले जाने का लिखित निर्देश भी दिया, बावजूद इसके स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। सड़क पर नियमित पानी का छिड़काव नहीं होने की शिकायत भी है।
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि सड़क किनारे खेतों और जलस्रोतों में अयस्क की धूल पहुंच रही है तथा बारिश में इसके बहाव से पर्यावरणीय असर पड़ सकता है। इन आशंकाओं की पुष्टि के लिए मिट्टी, पानी और सड़क की धूल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच की मांग उठ रही है।
आदिवासी नेता सुदाम सोरेन ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि हाईवा ढककर चलाने, पानी का छिड़काव और सड़क पर गिरे अयस्क की सफाई नहीं हुई तो सड़क जाम कर आंदोलन किया जाएगा। ग्रामीणों ने जिम्मेदार ठेकेदार पर कार्रवाई और नियमित निगरानी की मांग की है।

