अखिलेश की समाजवादी रथ यात्रा पर सियासी घमासान, मौलाना की तीखी प्रतिक्रिया तो इमरान मसूद ने बताया सकारात्मक संकेत
राष्ट्र संवाद संवाददाता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज होने लगी हैं। गुरुवार को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने राजधानी लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट से समाजवादी रथ यात्रा का शुभारंभ किया। रथ रायबरेली के लिए रवाना हुआ। रथ पर सपा संस्थापक एवं पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव की तस्वीरें लगी थीं।
रथ यात्रा शुरू होते ही इसे लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगीं। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने यात्रा को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव कांग्रेस को कमजोर करने के उद्देश्य से अमेठी और रायबरेली से यात्रा शुरू कर रहे हैं। उनका कहना था कि यदि यात्रा सैफई या मैनपुरी से शुरू की जाती तो इसका राजनीतिक संदेश अलग होता, लेकिन अमेठी और रायबरेली से यात्रा शुरू करने का फैसला उनकी समझ से परे है।
मौलाना ने यह भी कहा कि उन्हें आशंका है कि सपा नेतृत्व दोस्ती की आड़ में कांग्रेस को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने मुसलमानों से सपा के पीडीए कार्यक्रमों और रथ यात्रा से दूरी बनाए रखने की अपील की। उनका दावा है कि पीडीए की राजनीतिक गतिविधियों में मुसलमानों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है।
मौलाना ने रथ के भगवा रंग को लेकर भी टिप्पणी की और इसे धार्मिक यात्रा बताया। उन्होंने मुसलमानों से इसमें शामिल नहीं होने की अपील की।
वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने इस पर अलग राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव की यात्रा रायबरेली और अमेठी से निकल रही है तो इसे राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच राजनीतिक समन्वय के संकेत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी का हाथ अखिलेश यादव के हाथ में और अखिलेश यादव का हाथ राहुल गांधी के हाथ में होना सकारात्मक संकेत है।

