गढ़वा में वन पट्टा विवाद ने लिया हिंसक रूप, दो पक्षों में खूनी संघर्ष; लाठी-डंडे व पत्थरबाजी में कई घायल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
गढ़वा, 27 जुलाई।
झारखंड के गढ़वा जिले के मेराल थाना क्षेत्र स्थित कुसमही गांव में वन अधिकार पट्टा की जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच रविवार को हिंसक झड़प हो गई। विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच जमकर लाठी-डंडे और पत्थर चले, जिससे पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मारपीट की इस घटना में दोनों पक्षों के कई लोग घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, विवाद वन अधिकार पट्टा प्राप्त आदिम जनजाति कोरवा एवं परहिया समुदाय और वन विभाग के बीच वन भूमि पर पौधारोपण को लेकर शुरू हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि सामुदायिक पट्टे की जमीन पर उनके द्वारा लगाए गए फलदार पौधों को उखाड़कर वहां बांस लगाया जा रहा था तथा व्यक्तिगत पट्टे की भूमि पर भी गड्ढे खोदे जा रहे थे। इसी बात को लेकर तनाव बढ़ा और देखते ही देखते मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया।
घटना की सूचना मिलते ही मेराल थाना प्रभारी विष्णुकांत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और लहूलुहान हालत में पड़े घायलों को अपने वाहन से गढ़वा सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है।
बताया जाता है कि कुसमही गांव के आदिम जनजाति परिवारों को वर्ष 2011 में व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा तथा वर्ष 2025 में सामुदायिक वन अधिकार पट्टा प्रदान किया गया था। नियमों के अनुसार व्यक्तिगत पट्टे की भूमि पर खेती की जाती है, जबकि सामुदायिक पट्टे की भूमि पर वन संरक्षण एवं पौधारोपण का कार्य किया जाता है। इसके लिए ग्रामीणों ने ग्राम सभा का गठन भी किया है।
घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है और मामले की जांच कर आगे की कार्रवाई में जुटी है।

