लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो
महंत बाल गोविंद दास के स्मरण में अमरौर ठाकुरबाड़ी में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेकर दिवंगत महंत को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
महंत बाल गोविंद दास को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि
सदर प्रखण्ड के बेगूसराय अमरौर पंचायत पंचायत के अमरौर ठाकुरबाड़ी के सेवादार रहे 86 वर्षीय महंत बालगोविंद दास जी का निधन पिछले 2 सितंबर को हो गया था
स्थानीय सौरभ कुमार सिप्पी ने बताया की महंत जी के द्वादश कार्यक्रम में 13 सितंबर को एक श्रद्धांजलि सभा का कार्यक्रम समस्त ग्रामवासीयों की तरफ से रखा गया है जिसमें जिले के कई लोग उपस्थित रहे बताते चले की
महंत जी लगभग अमरौर कीरतपुर ठाकुरबाड़ी में पिछले 50 वर्षों से अधिक समय से ठाकुरबारी के सेवादार रहे थे। उनको पेड़ पौधों से अधिक लगाव था जिसके कारण ठाकुरवाड़ी परिसर विभिन्न प्रकार के फल फूलों से भरा है
महंत सभी को अपने ठाकुर बारी का आम, केला, जामुन,बेल, कटहल,व नींबु भी बच्चों को खिलाते थे और उनसे प्यार करते रहते थे। इसलिए माहरा जी कहकर पुकारते थे।
महंत जी के द्वादश कर्म के श्रद्धांजलि सभा में अंतिम दर्शन करने के लिए ठाकुरबाड़ी परिसर में अमरौर पंचायत समेत आसपास गांव के सैकड़ो लोगों की भीड़ रही
जिसमे ग्रामीण उमाकांत सिंह,बिपिन कुमार सिंह,विजय कुमार झा, पूर्व जिला परिषद सदस्य ऋषि भारती,पूर्व मुखिया प्रवीण सिंह, दीपक सिंह, भूषण सिंह,राम जी,देवेंद्र सिंह,रविंद्र सिंह,अनिल शर्मा अर्जुन महतो, ब्रजेश सिंह ,सौरभ कुमार सिप्पी, हिमांशु कुमार ,नवीन सिंह,राजन सिंह, रविंद्र सिंह ,अभय कुमार सिंह समेत सैकड़ो ग्रामीण उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों ने महंत जी के जीवन और उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को याद किया। महंत जी की पर्यावरण के प्रति प्रेम और ठाकुरबाड़ी परिसर को हरा-भरा बनाने की उनकी पहल आज भी प्रेरणादायक है। बेगूसराय जिले के इस प्रसिद्ध ठाकुरबाड़ी में उनकी स्मृति में लगाए गए पेड़-पौधे उनकी विरासत के जीवंत प्रमाण हैं।
श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित पूर्व जिला परिषद सदस्य ऋषि भारती ने कहा कि महंत जी का जीवन सरलता और सेवा का उदाहरण था। उन्होंने हमेशा ग्रामीणों के सुख-दुख में भाग लिया और ठाकुरबाड़ी को एक सामाजिक समरसता का केंद्र बनाया।
महंत बाल गोविंद दास ने अपने 50 वर्षों के सेवाकाल में ठाकुरबाड़ी को न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बनाया। उनके द्वारा लगाए गए फलदार वृक्ष आज भी ग्रामीणों को फल प्रदान करते हैं और उनकी याद दिलाते हैं।
ग्रामीणों ने महंत जी की स्मृति में ठाकुरबाड़ी परिसर में एक स्मृति स्तंभ बनाने का निर्णय लिया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके योगदान को जान सकें।

