Author: Devanand Singh

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Er is een bepaald ritme aan spelen bij Stake Casino dat nergens anders bestaat. Je opent de browser op je telefoon, kijkt naar het saldo, en je bent al binnen. Geen downloads, geen wachten op een client die opstart. Gewoon een tik, een spin, en het resultaat is er voordat je zelfs maar in je stoel zit. Voor veel spelers is dit de hele aantrekkingskracht van het platform—de mogelijkheid om vanaf overal, op elk moment, direct die actie te krijgen via https://be.stakebelgie.com. De mobiele browserervaring vormt de kern van hoe de meeste mensen met dit casino omgaan. Het gaat niet…

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एक दशक से बिरसानगर थाना पर निलंबन की तलवार क्यों? बार-बार कार्रवाई के बावजूद व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं, पुलिस प्रशासन करे आत्ममंथन देवानंद सिंह जमशेदपुर के बिरसानगर थाना में पदस्थापित थाना प्रभारियों पर बार-बार निलंबन की कार्रवाई होना महज संयोग है या व्यवस्था की कोई गहरी खामी? यह सवाल अब गंभीर समीक्षा की मांग करता है। एक अक्टूबर 2026 को थाना प्रभारी संतोष कुमार पांडेय के निलंबन के बाद एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली चर्चा के केंद्र में है। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार द्वारा उठाए गए सवाल इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं। सबसे बड़ा…

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ओल्ड बाराद्वारी में युवक पर फायरिंग, दो गोलियां लगने से घायल विवाद के बाद घर के बाहर मोबाइल पर बात कर रहा था राजा, स्कूटी सवार दो युवकों ने चलाई चार राउंड गोली राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर। सीतारामडेरा थाना क्षेत्र के ओल्ड बाराद्वारी में देर रात गोलीबारी की घटना से अफरा-तफरी मच गई। मोहम्मद राजा नामक युवक को निशाना बनाकर चार राउंड फायरिंग की गई। इस दौरान दो गोलियां राजा को लगीं, जिससे वह घायल हो गया। परिजनों ने उसे तत्काल एमजीएम अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। घटना की सूचना मिलते ही सीतारामडेरा थाना पुलिस मौके…

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₹2700 की दवा पर ₹27 हजार की कीमत क्यों? कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज में दवा की कीमत और अस्पतालों की पारदर्शिता पर उठते सवाल -डॉ. प्रियंका सौरभ कैंसर का नाम सुनते ही किसी परिवार के सामने केवल बीमारी की चिंता नहीं आती, बल्कि इलाज के खर्च का भय भी खड़ा हो जाता है। जांच, ऑपरेशन, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और जीवनरक्षक दवाओं का खर्च पहले ही सामान्य परिवार की आर्थिक क्षमता को चुनौती देता है। ऐसे में यदि किसी आवश्यक दवा की कीमत उसके खुदरा विक्रेता तक पहुंचने वाली कीमत से कई गुना अधिक हो, तो सवाल केवल बाजार का…

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गांधी जयंती – 2 अक्टूबर, 2026 पर विशेष गांधी का पुनर्जन्म ही नहीं, गांधी-दृष्टि का पुनर्जागरण हो -ललित गर्ग- महात्मा गांधी को याद करना केवल अतीत के एक महान व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देना नहीं है, बल्कि अपने वर्तमान की दिशा और भविष्य की दशा पर विचार करना भी है। गांधी किसी एक कालखंड, राजनीतिक दल या विचारधारा की संपत्ति नहीं हैं। वे एक ऐसे जीवन-दर्शन का नाम हैं, जिसकी धुरी सत्य, अहिंसा, आत्मानुशासन, स्वावलंबन, सेवा, स्वदेशी, ग्रामोदय, सामाजिक समरसता और मानव-मर्यादा है। इसलिए आज आवश्यकता गांधी के पुनर्जन्म की ही नहीं, गांधी-दृष्टि के पुनर्जागरण की है। गांधी को जितना इतिहास…

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*हंगरी तक गूंजी गम्हरिया के अमित मोदक की धमक* *अंतरराष्ट्रीय एक्शन फिल्म में बनेंगे नायक, यूरोपीय मैगजीन में छाया संघर्ष का सफर; बेटियों को देंगे निशुल्क आत्मरक्षा प्रशिक्षण* मृत्युंजय बर्मन राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला स्थानीय मार्शल आर्टिस्ट और अभिनेता अमित मोदक की प्रतिभा अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान बना रही है। हंगरी की डिजिटल मैगजीन कसाक पॉजिटिवन ने ग्रैंड मास्टर तिबोर बागोली के साक्षात्कार के आधार पर अमित के संघर्ष और उपलब्धियों को प्रमुखता से प्रकाशित किया है। मार्शल आर्ट से सिनेमा तक का उनका सफर अब यूरोप तक पहुंच गया है। अमित के जीवन और संघर्ष पर आधारित बायोपिक…

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मनीषा कदम का खेल खत्म! ठाणे के ‘ओरियो स्पा’ पर दोबारा रेड, 5000 का गंदा धंधा और मालकिन फिर फरार! राष्ट्र संवाद संवाददाता इंद्र यादव/मुंबई/ठाणे वेस्ट के स्टेशन रोड पर जो कांड मचा है, उसकी गूंज दूर-दूर तक सुनाई दे रही है! भाई, वही अपना ‘ओरियो स्पा’ —जिस पर पहले भी पुलिस का हंटर चल चुका है—वह फिर से थानेदार की रडार पर आ गया है और इस बार मामला एकदम फुल-टू गर्दा उड़ने वाला है! पहले भी इसी लफड़े में सोशल एक्टिविस्ट डॉ. बीनू वर्गीज ने तत्कालीन DCP बालासाहेब पाटिल (जोन-1) को टिप दी थी, जिसके बाद स्पा की…

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बाढ़ की त्रासदी से कब मुक्त होगा बिहार? घोषणाओं से नहीं, ठोस जल प्रबंधन, जवाबदेही और समयबद्ध कार्ययोजना से बदलेगी बिहार की तस्वीर देवानंद सिंह बिहार में बाढ़ हर साल तबाही मचाती है। खेत डूबते हैं, फसलें बर्बाद होती हैं, सड़कें टूटती हैं, घर उजड़ते हैं और हजारों परिवारों की जिंदगी पटरी से उतर जाती है। विडंबना यह है कि जिस पानी को नियंत्रित कर राज्य की समृद्धि का आधार बनाया जा सकता है, वही पानी हर साल बिहार के लिए अभिशाप बन जाता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक बिहार बाढ़ की मार झेलता रहेगा? कब तक…

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