Author: Devanand Singh

अनाज के ढेर पर बैठी भूखी दुनिया: विकास मॉडल की सबसे भयावह सच्चाई सभ्यता की चकाचौंध के बीच दुनिया एक खामोश त्रासदी जी रही है। खेतों में रिकॉर्ड अनाज उग रहा है, खाद्य कंपनियां लगातार विस्तार कर रही हैं और बाजार रंग-बिरंगे पैकेटों से भरे पड़े हैं, फिर भी करोड़ों लोग भूख की यातना सहने को मजबूर हैं। यह केवल आर्थिक विषमता नहीं, बल्कि विकास के खोखले मॉडल की सबसे बड़ी हार है। अधिक उत्पादन की लालसा ने जंगल उजाड़े, जलस्रोत खत्म किए और मिट्टी की जीवनशक्ति घटा दी। अब प्रकृति भी उसी विनाश का जवाब दे रही है। कहीं…

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वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी की समयोचित अपील देवानंद सिंह पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उससे उत्पन्न वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह अपील कि पेट्रोल, डीजल, गैस और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग संयमित ढंग से किया जाए, केवल एक प्रशासनिक सलाह नहीं बल्कि राष्ट्रीय जिम्मेदारी का संदेश है। हैदराबाद में लगभग 9,400 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं के शिलान्यास और उद्घाटन के अवसर पर प्रधानमंत्री ने जिस स्पष्टता से ऊर्जा संरक्षण, विदेशी मुद्रा बचत और आत्मनिर्भरता के बीच संबंध को रेखांकित किया, वह वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अत्यंत प्रासंगिक है। भारत अपनी…

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पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित तरीके से इस्तेमाल करना समय की मांग है: प्रधानमंत्री मोदी हैदराबाद, 10 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि पश्चिम एशिया संकट के मद्देनजर फिलहाल पेट्रोलियम उत्पादों का संयमित तरीके से उपयोग करना समय की मांग है। तेलंगाना में लगभग 9,400 करोड़ रुपये के विकास परियोजनाओं के डिजिटल माध्यम से शिलान्यास और उद्घाटन के मौके पर यहां हैदराबाद में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि आयातित पेट्रोलियम उत्पादों का उपयोग केवल आवश्यकता के अनुसार किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी बल्कि युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव को भी…

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15वें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का भव्य समापन, ‘ए न्यू पोस्टबॉक्स : टेल्स फ्रॉम पार्टीशन’ सम्मानित राष्ट्र संवाद संवाददाता नई दिल्ली, 8 मई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से आयोजित 15वें दिल्ली अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (DIFF 2026) का शुक्रवार को भव्य समापन हुआ। समापन समारोह में प्रसिद्ध अभिनेत्री ऋतुपर्णा सेनगुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं और प्रतियोगिता खंड की उत्कृष्ट फिल्मों को सम्मानित किया। भारत विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित तथा डॉ. सच्चिदानंद जोशी निर्देशित फिल्म ‘ए न्यू पोस्टबॉक्स : टेल्स फ्रॉम पार्टीशन’ को विशेष सम्मान प्रदान किया गया। यह फिल्म विभाजन की मानवीय पीड़ा…

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सावधान! अगर आप भी बीवी को पढ़ा रहे हैं, तो गोंडा के ‘राजेश’ की कहानी जरूर सुन लें! राष्ट्र संवाद संवाददाता गोंडा (इंद्र यादव) कहते हैं कि प्यार अंधा होता है, लेकिन उत्तर प्रदेश के गोंडा में प्यार अब ‘कानूनी’ और ‘हिसाबी’ हो गया है। एक तरफ राजेश हैं, जिनका दावा है कि उन्होंने गन्ना बेचकर और पंजाब में पल्लेदारी करके पत्नी को नर्स बनाया। दूसरी तरफ रेनू हैं, जिनका कहना है कि उन्होंने अपनी पायल बेचकर खुद को काबिल बनाया। अब आलम यह है कि नर्स साहिबा को पति का साथ ‘कड़वी दवा’ जैसा लग रहा है। राजेश का…

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छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, अब तो बिककर छप रहे, कलम है शर्मसार॥ सच की कीमत लग गई, बोली लगे बाज़ार, ख़बरों के भी दाम हैं, बिकता हर विचार। इश्तहारों के तले, दबे जन सरोकार— छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥ मालिक की मर्ज़ी चले, लिखे वह समाचार, जो दिखना है वह दिखे, बाकी सब बेकार। शीर्षक में तूफ़ान है, भीतर खोखला सार— छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार॥ चंद दलालों के हुए, अब सारे अख़बार, सच की कश्ती डूबती, बीच भँवर मझधार॥ झूठों के उत्सव में, सच होता लाचार— छपकर बिकते थे…

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महिला आरक्षण पर राजनीतिक दलों का दोहरा चरित्र -ः ललित गर्ग:- भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबनाओं में से एक यह है कि जिस देश में महिलाओं को “शक्ति”, “मातृशक्ति” और “आधी दुनिया” कहकर सम्मानित किया जाता है, वहीं राजनीति में उन्हें समान भागीदारी देने के प्रश्न पर लगभग सभी राजनीतिक दलों की नीयत संदिग्ध दिखाई देती है। संसद से लेकर चुनावी मंचों तक महिला आरक्षण के समर्थन में बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जब उम्मीदवारों को टिकट देने का समय आता है, तब अधिकांश दल महिलाओं को हाशिये पर धकेल देते हैं। हालिया विधानसभा चुनावों ने इस विरोधाभास…

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प्रतिनिधित्व, संतुलन और संदेश: शुभेंदु मंत्रिमंडल में नए बंगाल की झलक देवानंद सिंह पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहली बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपने शुरुआती मंत्रिमंडल के माध्यम से एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया है। ब्रिगेड परेड ग्राउंड में हुए शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री सहित कुल छह सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। यह छोटा लेकिन प्रतीकात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रिमंडल राज्य के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों, सामाजिक समूहों और राजनीतिक धाराओं का प्रतिनिधित्व करता है। शुभेंदु अधिकारी ने अपने पहले मंत्रिमंडल के गठन में यह संकेत…

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शुभेंदु मंत्रिमंडल में बंगाल के हर इलाके और समुदाय की झलक कोलकाता, नौ मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और पांच मंत्रियों ने शनिवार को ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ली जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनी है। राज्य के उत्तरी और दक्षिणी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है, लेकिन कोलकाता से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है। पश्चिम बंगाल की विविधतापूर्ण जातीय संरचना को दर्शाते हुए, मंत्रिमंडल में मतुआ और संथाल सहित विभिन्न समुदायों का प्रतिनिधित्व है। अधिकारी की मंत्रिपरिषद के जिन पांच सदस्यों ने शपथ ली,…

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साहब! मेहनत हम बेच रहे हैं, आप बस ‘गुलामी’ खरीद रहे हैं। राष्ट्र संवाद संवाददाता मुंबई (इंद्र यादव) आज के दौर में अगर आप किसी दफ्तर, फैक्ट्री या निर्माण स्थल पर जाकर देखें, तो आपको लोग पसीने में तर-बतर जी-तोड़ मेहनत करते दिखेंगे। अक्सर बड़े-बड़े मंचों से भाषण दिया जाता है कि “मेहनत ही सफलता की कुंजी है।” लेकिन हकीकत के धरातल पर खड़े होकर एक कड़वा सवाल पूछना जरूरी हो गया है: क्या वाकई लोगों को उनकी मेहनत के बदले वाजिब हक मिल रहा है! सवाल यह नहीं है कि लोग आलसी हैं; सवाल यह है कि क्या उनकी…

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