कोल्हान डीआईजी के हाई अलर्ट के 8 घंटे के अंदर फिर वारदात!
*क्या पुलिस की तैयारी अपराधियों से एक कदम पीछे चल रही है?*
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता, सरायकेला
गोलमुरी में बैंक लूट और उसके कुछ ही घंटों बाद ज्वेलरी दुकान में सेंधमारी की घटनाओं के बाद शुक्रवार को सरायकेला-खरसावां पुलिस ने विभिन्न बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था का ऑडिट शुरू किया। पुलिस ने सीसीटीवी कवरेज, बैकअप व्यवस्था, इमरजेंसी अलार्म, निजी सुरक्षा गार्डों के हथियार और लाइसेंस समेत उन तमाम बिंदुओं की जांच की, जिनका मकसद किसी भी आपराधिक घटना से पहले सुरक्षा की कमजोर कड़ियों को पहचानना है।
पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गियारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि बैंक प्रबंधन, सुरक्षा गार्ड और पुलिस की गश्ती व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। शाखा प्रबंधकों को संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और तत्काल पुलिस को सूचना देने को कहा गया है। बैंक और एटीएम के आसपास लगातार गश्ती तथा पीसीआर वाहनों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।
लेकिन इस ऑडिट के साथ एक बड़ा सवाल भी सामने आया है कि क्या पुलिस की सतर्कता किसी घटना के बाद बढ़ती है या घटना से पहले भी उतनी ही प्रभावी रहती है? गुरुवार को बैंक लूट के बाद कोल्हान डीआईजी ने दोनों जिलों की पुलिस को हाई अलर्ट किया था। इसके बावजूद उसी रात गोलमुरी में दूसरी आपराधिक वारदात सामने आ गई। घटना का विवरण अलग जांच का विषय है, लेकिन घटनाओं का यह क्रम पुलिस की पूर्व-सतर्कता, गश्ती व्यवस्था और संवेदनशील प्रतिष्ठानों की निगरानी पर सवाल जरूर खड़ा करता है।
बैंक सुरक्षा का ऑडिट इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि बैंक केवल वित्तीय संस्थान नहीं, बल्कि बड़ी संख्या में नकदी और संवेदनशील ग्राहक गतिविधियों वाले स्थान हैं। अब देखना यह होगा कि शुक्रवार का ऑडिट केवल कागजी जांच बनकर रह जाता है या इसकी कमियों के आधार पर जमीन पर पुलिसिंग में भी स्थायी बदलाव दिखाई देता है।

