सेवा, श्रद्धा और संगठन का संगम,ओम कांवरिया सेवा संघ की 15 वर्षों की अद्भुत यात्रा
धीरज कुमार सिंह

*जमशेदपुर:* जब सेवा भावना, धार्मिक आस्था और संगठित प्रयास एक साथ मिलते हैं, तो वह केवल एक आयोजन नहीं रह जाता, बल्कि समाज निर्माण की एक प्रेरक गाथा बन जाता है। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत करता है ॐ कांवरिया सेवा संघ, टाटानगर, जो अपनी स्थापना के 15वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है।

स्थापना से विस्तार तक की यात्रा
वर्ष 2011 में पप्पू सिंह (अध्यक्ष), पूर्व पुलिस उपाधीक्षक धनंजय प्रसाद सिंह, चंचल लकड़ा, हैप्पी सिंह और बेगूसराय के बब्बू सिंह ने सेवा भाव से प्रेरित होकर इस संघ की नींव रखी। शुरुआत मात्र पांच लोगों से हुई थी, लेकिन आज यह कारवां 150 से अधिक समर्पित सदस्यों तक पहुंच चुका है। संघ ने सूर्य पहाड़ से शिवलोक तक की कठिन यात्रा को सेवा और संकल्प से सहज बना दिया है।
*सेवा की बदलती परिभाषा*
2012 से एक ही स्थान पर स्थापित शिविर आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है। चाय और शरबत से शुरू हुई सेवा अब संपूर्ण सेवा मॉडल में परिवर्तित हो चुकी है।
सेवा शिविर में भोजन व्यवस्था के अंतर्गत पूरी-सब्जी, चावल, बुंदिया, जलेबी, पापड़ और चटनी जैसे व्यंजन नियमित रूप से परोसे जाते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में क्विक मसाजर, पेन रिलीफ और 24×7 डॉक्टरों की उपलब्धता शामिल है। फलाहारी कांवरियों के लिए साबूदाना, पेठा, खजूर और ड्राई फ्रूट्स जैसे विकल्प प्रतिदिन मध्याह्न तक उपलब्ध रहते हैं। स्वच्छता व्यवस्था के अंतर्गत ब्लीचिंग पाउडर का नियमित छिड़काव, मच्छर-नाशक लाइट्स और मोबाइल जल टैंकों द्वारा लार्वा नियंत्रण जैसी आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाता है। वहीं, आध्यात्मिक वातावरण बनाए रखने हेतु प्रतिदिन आठ घंटे का भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं, जो कांवरियों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करती हैं।
*प्रेरणा का स्रोत*
पप्पू सिंह की प्रेरणा 1982 में बाबा धाम की कठिन पदयात्रा से उपजी। सुईया पहाड़ की कठिनाई, पानी और विश्राम की कमी ने उनके भीतर सेवा का बीज बोया। समाजसेवी नथमल जी के शिविर से मिली प्रेरणा को उन्होंने संगठनात्मक रूप देकर ओम कांवरिया सेवा संघ की स्थापना की।

*सामूहिक सहयोग और समर्पण*
संघ के कार्यों में स्थानीय व्यापारिक संस्थानों, कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों का अहम योगदान रहता है। ये सभी सेवा में निस्वार्थ भाव से जुटे रहते हैं, जिससे शिविर न केवल सुरक्षित बल्कि व्यवस्थित और अनुशासित भी बना रहता है।
*एक चलता-फिरता तीर्थस्थल*

ओम कांवरिया सेवा संघ आज सिर्फ एक शिविर नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता तीर्थस्थल बन चुका है, जहां कांवरियों को न केवल शारीरिक विश्राम मिलता है, बल्कि आत्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता का अनुभव भी होता है। 15 वर्षों की यह यात्रा दर्शाती है कि जब श्रद्धा, सेवा और समर्पण मिलते हैं, तो वह सामाजिक चेतना का महायज्ञ बन जाते हैं। यह संघ सचमुच उस युगदृष्टि का परिणाम है, जिसने सेवा को केवल कर्म नहीं, धर्म बना दिया।
*ॐ कांवरिया सेवा संघ जमशेदपुर से जाने वाले कांवरिया से आग्रह करता है कि टाटानगर के इस शिविर में आकर सेवा का मौका जरूर दें और दूसरे को भी शिविर में आने के लिए प्रोत्साहित करें सेवा ही धर्म के आधार पर ओम कमरिया सेवा संघ टाटानगर 15 वर्षों से कम कर रही है*

*बहरहाल ॐ कांवरिया संघ की शुरुआत पप्पू सिंह पूर्व पुलिस उपाधीक्षक धनंजय प्रसाद सिंह पार्टनर चंचल लकड़ा हैप्पी सिंह और बेगूसराय के बब्बू सिंह के साथ शुरू की थी और यह कारवां दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है सेवा भाव से जुड़े लोग इस संघ से जुड़ने जा रहे हैं और हर वर्ष सेवा के क्षेत्र में विस्तार होते जा रहा है*
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