चांडिल स्थित गौरी घाट से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में हो रहा है अवैध बालू का खनन, शमशान घाट बना बालू का स्टॉक यार्ड
आखिर विभिन्न घाटों से बालू उठाओ पर क्यों प्रशासन है मौन
राष्ट्र संवाद संवाददाता – अमन ओझा
सरायकेला-खरसावां जिला के चांडिल अनुमंडल अंतर्गत कपाली ओपी क्षेत्र से अवैध बालू कारोबार का गंभीर मामला सामने आया है। हाल ही में ईचागढ़ थाना क्षेत्र में अवैध बालू को लेकर हुए विवाद का मामला अभी पूरी तरह ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब गौरी घाट पर बालू माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। चांडिल के गौरी घाट में नदी से अवैध रूप से बालू उठाकर उसी घाट के पास श्मशान घाट परिसर में स्टॉक किया जा रहा है।

ट्रैक्टर और हाइवा के माध्यम से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में नदी से बालू निकाला जा रहा है, जिसे बाद में ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। इस अवैध उठाव से जहां एक ओर श्मशान घाट की पवित्रता भंग हो रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध बालू उठाव के कारण नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंच रहा है। बार-बार शिकायत के बावजूद जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तो माफियाओं के हौसले और बुलंद हो जाते हैं।
ग्रामीणों को आशंका है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ईचागढ़ थाना क्षेत्र जैसी गंभीर स्थिति यहां भी उत्पन्न हो सकती है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अवैध बालू उठाव पर रोक लगाकर पूरे स्टॉक को जब्त नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। अब सवाल यह है कि जिला प्रशासन कब तक इस अवैध कारोबार पर लगाम कसता है और सरकार को हो रहे राजस्व नुकसान को रोकता है। अब पूरे मामले में देखना है दिलचस्प होगा कि लाखों सीएफटी के अवैध बालू भंडारण को प्रशासन के द्वारा जप्त किया जाता है, की बालू माफियाओं के द्वारा खपाया जाएगा।

