पड़हा राजा की हत्या के विरोध में बुलाया गया झारखंड बंद जमशेदपुर में रहा बेअसर
राष्ट्र संवाद संवाददाता
आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के संरक्षक और पड़हा राजा सोमा मुंडा की जघन्य हत्या के विरोध में शनिवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा बुलाए गए राज्यव्यापी ‘झारखंड बंद’ का लौहनगरी जमशेदपुर में कोई खास असर देखने को नहीं मिला। शहर की रफ्तार पूरी तरह सामान्य रही और बंद का आह्वान यहां लगभग बेअसर साबित हुआ। संगठनों ने इस बंद के माध्यम से हत्याकांड में शामिल अपराधियों की अविलंब गिरफ्तारी, उन्हें कड़ी सजा देने, पीड़ित परिवार को न्याय और आर्थिक सहायता प्रदान करने तथा आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की थी। हालांकि, इन मांगों के बावजूद जमशेदपुर में आम जनजीवन पर बंद का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। सुबह से ही साकची, बिष्टुपुर, मानगो और जुगसलाई जैसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में दुकानें, प्रतिष्ठान और बाजार रोज की तरह खुले रहे। लोगों ने बिना किसी भय के अपनी दैनिक जरूरतों की खरीदारी की और बाजारों में सामान्य चहल-पहल बनी रही। परिवहन व्यवस्था भी पूरी तरह सुचारू रही। सीतारामडेरा बस टर्मिनल सहित अन्य बस स्टैंडों से लंबी दूरी और अंतरराज्यीय बसें अपने तय समय पर रवाना हुईं। ऑटो-रिक्शा, ओला-उबर और निजी वाहनों की आवाजाही भी सड़कों पर सामान्य रूप से होती रही। बंद की घोषणा को देखते हुए किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती और गश्ती व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद दिनभर कहीं भी प्रदर्शन, सड़क जाम या तोड़फोड़ की कोई सूचना नहीं मिली। शहर के स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय भी सामान्य दिनों की तरह खुले रहे। सुबह के समय लोगों में हल्की आशंका जरूर देखने को मिली, लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, शहर में भीड़ और गतिविधियां बढ़ती चली गईं। कुल मिलाकर, आदिवासी संगठनों के बंद के आह्वान के बावजूद जमशेदपुर में जनजीवन पूरी तरह सामान्य रहा और बंद का असर नगण्य साबित हुआ।

