सोना देवी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेमिनार, भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक शिक्षा और विज्ञान से जोड़ने पर जोर
सरयू राय बोले– ज्ञान का उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ नहीं, बल्कि समाज कल्याण होना चाहिए

राष्ट्र संवाद संवाददाता
घाटशिला। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में ‘समकालीन वैश्विक परिदृश्य एवं भारतीय ज्ञान प्रणाली : एक विश्लेषणात्मक विमर्श’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। स्वामी विवेकानंद सभागार में आयोजित सेमिनार में देश के विभिन्न शैक्षणिक एवं शोध संस्थानों से जुड़े विद्वानों ने भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रासंगिकता और आधुनिक शिक्षा, विज्ञान एवं तकनीक में उसकी भूमिका पर विचार रखे।
कार्यक्रम का उद्घाटन कुलपति प्रो. (डॉ.) ब्रज मोहन पाट पिंगुवा ने किया। कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने उच्च शिक्षण संस्थानों में भारतीय ज्ञान प्रणाली को शामिल करने की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान-विज्ञान परंपरा विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा को उसके मूल दर्शन और व्यापक संदर्भों में समझने की जरूरत है। ज्ञान का उद्देश्य केवल व्यावसायिक लाभ नहीं, बल्कि समाज का कल्याण और मानवीय मूल्यों का विकास होना चाहिए। वहीं एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को आधुनिक विज्ञान, रोबोटिक्स और तकनीकी अनुसंधान से जोड़ने पर जोर दिया।
डीबीएमएस कॉलेज ऑफ एजुकेशन की प्राचार्य डॉ. मोनिका उप्पल और कोल्हान विश्वविद्यालय की पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. रागिनी भूषण ने भी भारतीय ज्ञान परंपरा की आधुनिक संदर्भों में उपयोगिता रेखांकित की। कुलसचिव डॉ. नीत नयना ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, शोध और नवाचार की जानकारी दी।
सेमिनार में शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने प्राचीन भारतीय ज्ञान को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान से जोड़कर नई संभावनाएं विकसित करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. कंचन सिन्हा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

