
जमशेदपुर में दीपावली के पावन अवसर पर सिंहभूम चेंबर की दीपावली प्रदर्शनी का भव्य शुभारंभ बिष्टुपुर स्थित चेंबर भवन में किया गया है। इस बार की प्रदर्शनी ‘लोकल फॉर वोकल’ की थीम पर आधारित है, जिसमें करीब 40 स्टॉल लगाए गए हैं। यह आयोजन स्थानीय एवं स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिला उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रचार-प्रसार और सीधी बिक्री का एक मजबूत मंच प्रदान करने के उद्देश्य से किया गया है।
सिंहभूम चेंबर की दीपावली प्रदर्शनी: स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा
इस वार्षिक आयोजन की खास बात यह है कि इसमें चेंबर से जुड़ी महिला उद्यमियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। उन्होंने अपने-अपने स्टॉल को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया है, जहां ग्राहक दीपावली से जुड़े विभिन्न उत्पाद जैसे सजावटी सामान, दीये, मोमबत्तियां, गिफ्ट आइटम, हस्तनिर्मित वस्त्र और खाद्य सामग्री आदि एक ही छत के नीचे खरीद सकते हैं। इससे ग्राहकों को बाजार के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ती और उन्हें उचित दाम पर गुणवत्तापूर्ण सामान मिल जाता है।
चेंबर के पदाधिकारियों ने बताया कि सिंहभूम चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा हर वर्ष दीपावली पर इस तरह की प्रदर्शनी आयोजित की जाती रही है। इस पहल का मुख्य लक्ष्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ नारे को जमीनी स्तर पर साकार करना है। जब स्थानीय कारीगर और उद्यमी सीधे ग्राहक से जुड़ते हैं, तो न केवल उनकी आय बढ़ती है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होती है। इस प्रदर्शनी में रखे गए सभी उत्पाद ‘मेड इन इंडिया’ हैं, जो स्वदेशी भावना को बल देते हैं।
महिला सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
इस प्रदर्शनी का सबसे सकारात्मक पहलू महिला उद्यमियों की भागीदारी है। अक्सर महिलाएं घरेलू जिम्मेदारियों के कारण अपने हुनर को कारोबार का रूप नहीं दे पातीं। ऐसे आयोजन उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में सहायक सिद्ध होते हैं। यहां स्टॉल लगाने वाली कई महिलाएं पहली बार अपना उत्पाद लेकर बाजार में आई हैं। उनके लिए यह सीखने का भी एक बड़ा अवसर है कि ग्राहकों की पसंद क्या है, पैकेजिंग कैसे होनी चाहिए और मार्केटिंग के गुर क्या हैं।
एक प्रतिभागी महिला उद्यमी ने बातचीत में कहा, “इस मंच ने हमें अपने घर के बने उत्पादों को सीधे ग्राहकों तक पहुंचाने का हौसला दिया है। पहले हम केवल परिचितों तक सीमित थे, लेकिन अब पूरा शहर हमारे ग्राहक बन सकते हैं।” इस तरह के संवाद महिला सशक्तिकरण की दिशा में चेंबर की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
ग्राहकों को मिल रहा विविधता भरा अनुभव
प्रदर्शनी देखने आए ग्राहकों के लिए यह खरीदारी का एक अनूठा अनुभव है। यहां बड़े ब्रांड्स की चकाचौंध से अलग, हाथ के हुनर की बारीकियां दिखती हैं। 40 स्टॉल पर उत्पादों की विविधता देखते ही बनती है। कहीं पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग वाले दीये हैं, तो कहीं जैविक रंगों से बनी रंगोली। हैंडलूम के कपड़े, जूट के बैग, टेराकोटा की मूर्तियां और घर के बने अचार-पापड़ भी ग्राहकों को खूब लुभा रहे हैं। यह ‘लोकल फॉर वोकल’ की अवधारणा को व्यवहारिक रूप देता है।
चेंबर भवन का माहौल पूरी तरह त्योहारी रंग में रंगा हुआ है। प्रवेश द्वार पर रंगोली और तोरण द्वार स्वागत कर रहे हैं। सुरक्षा और स्वच्छता का भी पूरा ध्यान रखा गया है। आयोजकों का कहना है कि भीड़ को देखते हुए आने वाले दिनों में स्टॉल की संख्या और समयावधि बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
स्थानीय कारोबार को नई गति
जमशेदपुर औद्योगिक नगरी होने के साथ-साथ अब छोटे और मझोले उद्यमों का हब भी बनता जा रहा है। सिंहभूम चेंबर इस बदलाव में उत्प्रेरक की भूमिका निभा रहा है। ऐसी प्रदर्शनियों से एमएसएमई सेक्टर को बल मिलता है। सरकार भी एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ऐसे उद्यमियों को सहायता दे रही है। चेंबर इन योजनाओं की जानकारी भी उद्यमियों तक पहुंचाने का काम करता है।
आयोजन समिति के सदस्यों ने उम्मीद जताई कि इस प्रदर्शनी से होने वाली बिक्री का आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में बेहतर रहेगा। उन्होंने शहरवासियों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आकर स्थानीय प्रतिभाओं का उत्साहवर्धन करें और स्वदेशी अपनाएं। यह प्रदर्शनी अगले कुछ दिनों तक जारी रहेगी, जिससे दीपावली की खरीदारी के लिए लोगों को पर्याप्त समय मिल सकेगा।
अंत में, सिंहभूम चेंबर की दीपावली प्रदर्शनी केवल एक बाजार नहीं, बल्कि एक सामाजिक-आर्थिक आंदोलन का हिस्सा है। यह उस सोच को ताकत देता है जहां हर हाथ को काम मिले, हर हुनर को सम्मान मिले और हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो सके। इस दीपावली यदि आप भी अपने घर को स्थानीय कारीगरों के हाथों बने उत्पादों से रोशन करेंगे, तो वह रोशनी किसी के घर में खुशहाली लाएगी।

