लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
बहरागोड़ा प्रखंड के अंतर्गत आने वाला माटिहाना क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्ग 49 का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह क्षेत्र न केवल झारखंड को पश्चिम बंगाल और ओडिशा से जोड़ता है, बल्कि खनिज संपदा से लदे भारी वाहनों का प्रमुख गलियारा भी है। विडंबना यह है कि इतने व्यस्त राजमार्ग पर बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। रात के अंधेरे में यह राजमार्ग किसी ‘डेथ ट्रैप’ से कम नहीं लगता। इस राजमार्ग पर प्रतिदिन हजारों वाहनों का आवागमन होता है, लेकिन रात के समय दृश्यता शून्य हो जाती है।
बहरागोड़ा स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-49 के माटिहाना क्षेत्र में स्थापित सभी स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। इसके कारण रात्रि होते ही पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब जाता है, जिससे वाहन चालकों, राहगीरों एवं स्थानीय लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित विभाग का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग-49 के माटिहाना में अंधेरे के कारण बढ़ रहीं चुनौतियां
माटिहाना राष्ट्रीय राजमार्ग 49 का व्यस्त हिस्सा है, जहां दिन-रात भारी मालवाहक वाहनों, बसों, निजी वाहनों एवं दोपहिया वाहनों का आवागमन लगातार बना रहता है। स्ट्रीट लाइटें बंद रहने से रात्रि के समय सड़क पर दृश्यता काफी कम हो जाती है। ऐसे में वाहन चालकों को आगे की स्थिति का सही आकलन करने में कठिनाई होती है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। वहीं, पैदल चलने वाले लोगों और स्थानीय ग्रामीणों को भी अंधेरे के कारण सुरक्षा संबंधी जोखिम का सामना करना पड़ता है।
मुख्य समस्याएं और जोखिम
- दुर्घटनाओं में वृद्धि: अंधेरे के कारण वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
- आपराधिक घटनाएं: सुनसान और अंधेरे राजमार्ग पर लूटपाट और छिनतई की आशंका बनी रहती है।
- आर्थिक नुकसान: वाहन चालक रात में इस रास्ते से गुजरने से कतराते हैं, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है।
- स्वास्थ्य आपातकाल: एम्बुलेंस और आपातकालीन वाहनों को रास्ता ढूंढने में देरी होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कर उन्हें चालू नहीं कराया गया तो भविष्य में कोई गंभीर सड़क दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था यात्रियों और स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) एवं संबंधित विभाग से अविलंब स्थल का निरीक्षण कर बंद पड़ी सभी स्ट्रीट लाइटों की मरम्मत कराने तथा नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि शीघ्र कार्रवाई से दुर्घटनाओं की आशंका कम होगी और रात्रि में आवागमन करने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
प्रशासनिक उदासीनता और आगे की राह
इस पूरे प्रकरण में सबसे चिंताजनक पहलू संबंधित विभागों की उदासीनता है। बार-बार शिकायत के बावजूद मरम्मत कार्य शुरू न होना व्यवस्था की लचर कार्यप्रणाली को दर्शाता है। झारखंड सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए। स्ट्रीट लाइटों के लिए सौर ऊर्जा आधारित समाधान अपनाए जा सकते हैं, जो दीर्घकालिक और रखरखाव मुक्त होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट सिटी मिशन और भारतमाला परियोजना के तहत राजमार्गों पर प्रकाश व्यवस्था अनिवार्य है। साथ ही, एक शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाना चाहिए जहां नागरिक सीधे अपनी समस्या दर्ज करा सकें।

