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    Home » गरीबों और भूमिहीनों के हक के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे लाल झंडे के सिपाही नंदलाल पंडित
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    गरीबों और भूमिहीनों के हक के लिए जीवनभर संघर्ष करते रहे लाल झंडे के सिपाही नंदलाल पंडित

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 16, 2026No Comments5 Mins Read
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    नंदलाल पंडित
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    लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो

    बेगूसराय जिले के तेघड़ा प्रखंड अंतर्गत नोनपुर गांव की माटी ने एक ऐसे सपूत को विदाई दी, जिसने अपना संपूर्ण जीवन गरीबों, भूमिहीनों और मजदूरों के अधिकारों की लड़ाई लड़ने में समर्पित कर दिया। नंदलाल पंडित, जिन्हें साथी लाल झंडे के सिपाही के नाम से पुकारते थे, उनके निधन के बाद 12वीं शांति भोज के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा न केवल एक रस्म अदायगी थी, बल्कि यह एक ऐसे योद्धा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन था जिसने सत्ता की प्रताड़ना, जेल की यातनाओं और सामाजिक उपेक्षा की परवाह किए बगैर वंचितों की आवाज बुलंद की। प्रजापति कुम्हार समन्वय समिति के बैनर तले आयोजित इस सभा में राजनीतिक दलों की सीमाएं टूट गईं और हर विचारधारा के नेता उनके योगदान को नमन करने पहुंचे।

    नंदलाल पंडित: गरीबों और भूमिहीनों की आवाज बने लाल झंडे के सिपाही

    तेघड़ा प्रखंड के नोनपुर गांव स्थित दिवंगत नंदलाल पंडित के पैतृक आवासीय परिसर में बुधवार को प्रजापति कुम्हार समन्वय समिति की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। 85 वर्षीय नंदलाल पंडित के निधनों उपरांत 12वीं शांति भोज के अवसर पर आयोजित सभा की अध्यक्षता जमुना दास ठाकुरबाड़ी के अध्यक्ष शिक्षक प्रमोद पंडित ने की। संचालन समिति के प्रखंड अध्यक्ष शंभू पंडित ने किया।

    सभा में वक्ताओं ने नंदलाल पंडित को लाल झंडे का सिपाही एवं सामाजिक नेतृत्व बताते हुए उनके संघर्षपूर्ण जीवन को याद किया। कहा कि उन्होंने गरीबों, भूमिहीनों और मजदूरों के अधिकारों के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया। उत्तर तेघड़ा क्षेत्र में भूमिहीन परिवारों को जमीन पर कब्जा दिलाने और उन्हें घर बसाने के लिए उन्होंने आंदोलन किया। उचित मजदूरी और ग्रामीण विकास के मुद्दों को लेकर भी वे सक्रिय रहे।

    वक्ताओं ने बताया कि संघर्ष के दौरान उन्हें पुलिस की कार्रवाई और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। जेल में रहने के दौरान उन्होंने कैदियों की सुविधाओं और अधिकारों को लेकर भी आंदोलन किया। गांव में खेल मैदान ,ग्रामीण हाट बनाने के अलावे खेलकूद, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने में उनके योगदान का भी उल्लेख किया गया।

    पूर्व मंत्री सह बछवाड़ा विधायक सुरेंद्र मेहता ने कहा कि नंदलाल पंडित ने कमजोर और वंचित लोगों के अधिकारों के लिए लगातार आवाज उठाई। पूर्व एमएलसी भूमिपाल राय ने कहा कि भूमिहीनों के साथ-साथ जेल में बंद कैदियों की समस्याओं को लेकर भी उनका संघर्ष याद किया जाएगा।

    इस मौके पर पूर्व विधायक ललन कुंवर, जदयू जिलाध्यक्ष नंदलाल राय, राजकुमार आजाद, जिलाध्यक्ष विश्वनाथ पंडित, कोषाध्यक्ष कन्हैया पंडित, प्रखंड सचिव रमेश पंडित, रामाश्रय पंडित, रामचंद्र पाल और कन्हाई पंडित सहित अन्य लोग उपस्थित थे। उनके छोटे भाई फुलेना पंडित पुत्र सुनील पंडित एवं अनिल पंडित ने आगत अतिथियों का अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया।

    भूमि सुधार और सामाजिक न्याय की लड़ाई में अविस्मरणीय योगदान

    बिहार के बेगूसराय क्षेत्र का इतिहास वामपंथी आंदोलन और भूमि सुधार की लड़ाईयों से भरा पड़ा है। नंदलाल पंडित इसी परंपरा के एक मजबूत स्तंभ थे। 1970 और 80 के दशक में जब उत्तर तेघड़ा इलाके में भूमिहीन परिवार जमींदारों के अत्याचार और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार थे, तब नंदलाल पंडित ने लाल झंडे के नीचे उन्हें संगठित किया। उन्होंने न केवल जमीन पर कब्जा दिलाने के लिए सत्याग्रह और आंदोलन किए, बल्कि उचित मजदूरी के लिए खेतिहर मजदूरों को गोलबंद किया। उनकी यह लड़ाई आसान नहीं थी; पुलिस की कार्रवाई, प्रताड़ना और जेल उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए थे।

    यह नंदलाल पंडित की ही दूरदर्शिता थी कि उन्होंने जेल के अंदर भी संघर्ष का मोर्चा नहीं छोड़ा। कारागार में बंद कैदियों की सुविधाओं और मानवाधिकारों के लिए उन्होंने आवाज बुलंद की, जो उस दौर में एक दुर्लभ पहल थी। गांव स्तर पर खेल मैदान और ग्रामीण हाट का निर्माण कराकर उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध बनाने का प्रयास किया। उनके ये कार्य आज भी नोनपुर गांव और आसपास के इलाकों में विकास के मानक के रूप में देखे जाते हैं। भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की योजनाओं भारत सरकार का आधिकारिक पोर्टल पर भी ग्रामीण अवसंरचना के महत्व को रेखांकित किया जाता है, जिसे नंदलाल पंडित ने दशकों पहले जमीनी स्तर पर समझा और लागू किया।

    राजनीतिक दलों से ऊपर उठकर मिला सम्मान

    श्रद्धांजलि सभा में पूर्व मंत्री सह बछवाड़ा विधायक सुरेंद्र मेहता, पूर्व एमएलसी भूमिपाल राय, पूर्व विधायक ललन कुंवर, जदयू जिलाध्यक्ष नंदलाल राय समेत विभिन्न दलों के नेताओं की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि नंदलाल पंडित का कद किसी एक दल की सीमा से परे था। वे सामाजिक नेतृत्व के उस प्रतीक थे, जिसने कमजोर और वंचित वर्ग के लिए सत्ता से टकराने का साहस दिखाया। जमुना दास ठाकुरबाड़ी के अध्यक्ष शिक्षक प्रमोद पंडित की अध्यक्षता और शंभू पंडित के संचालन में संपन्न इस सभा ने यह सिद्ध कर दिया कि जननेता मरकर भी जनमानस के दिलों में जिंदा रहते हैं। उनके परिजनों, छोटे भाई फुलेना पंडित, पुत्र सुनील पंडित एवं अनिल पंडित द्वारा अतिथियों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित करना ग्रामीण परंपरा और संस्कार का जीवंत उदाहरण था।

    आज जब भूमिहीनों के अधिकार और सामाजिक न्याय की लड़ाई नए मोड़ पर खड़ी है, नंदलाल पंडित का जीवन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने सिखाया कि संघर्ष केवल अधिकारों को पाने का ही नहीं, बल्कि व्यवस्था में बैठी बुराइयों को दूर करने का भी नाम है। उनकी स्मृति को नमन करते हुए हम यह संकल्प लेते हैं कि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में प्रयास जारी रखेंगे।

    नंदलाल पंडित बेगूसराय भूमिहीन अधिकार लाल झंडा
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