
बखरी में पत्रकार एकता का स्वर उस समय गूंजा जब पत्रकार से मारपीट के विरोध में निकाला गया कैंडल मार्च महादेव स्थान चौक से अंबेडकर चौक तक निकाला गया। इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन में सैकड़ों की संख्या में पत्रकारों के साथ सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने भाग लेकर एकजुटता का परिचय दिया।
सहरसा की घटना ने भड़काया आक्रोश
बखरी- बेगूसराय। सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार के साथ हुई बर्बर मारपीट की घटना ने पूरे बिहार के पत्रकारों में आक्रोश भर दिया है। इस अमानवीय घटना के विरोध में अनुमंडल पत्रकार संघ बखरी ने बुधवार की संध्या कैंडल मार्च निकालकर विरोध प्रदर्शन किया। यह शान्ति पूर्ण कैंडल मार्च महादेव स्थान चौक स्थित से निकलकर पूरी बाजार होते हुए अम्बेडकर चौक पर संपन्न हुई।
बतातें चलें कि 12 सितंबर को सहरसा सदर अस्पताल में मिड-डे मील खाने के बाद बीमार हुए बच्चों की रिपोर्टिंग करने गए प्रभात खबर डिजिटल के पत्रकार के साथ अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मियों ने मारपीट, गाली-गलौज की घटना को अंजाम दिया था। इस घटना को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला बताते हुए बखरी अनुमंडल के पत्रकारों में भारी नाराजगी देखी गई है।
पत्रकार से मारपीट के विरोध में निकाला गया कैंडल मार्च: एकता का प्रदर्शन
अनुमंडल पत्रकार संघ के अध्यक्ष सुमन झा ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना अपराध नहीं है। सहरसा की घटना ने साबित किया है कि किस तरह सच दिखाने वालों को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोपित डॉक्टरों पर एफआईआर कर उन्हें गिरफ्तार करने की मांग की है। साथ ही सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून भी लागू करने की मांग की है।

संघ ने कहा कि यह मार्च सिर्फ एक पत्रकार के लिए नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बचाने के लिए है। पत्रकारों के समर्थन में बड़ी संख्या में समाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता शामिल हुए। इस मौके पर जिला परिषद सदस्य अमित कुमार देव, राजद के मनोहर केसरी, सपा के दिलीप केसरी, सीपीआई के सुरेश सहनी, जितेन्द्र जीतू, जदयू के सुनील कुमार, जवाहर राय, रामबली महतो, नीरज राय, निशांत कुमार, पार्षद मधुसूदन महतो, समीर श्रवण, मुख्य पार्षद प्रतिनिधि राजू कुशवाहा, भाजपा के सिधेश आर्य, नीरज नवीन, अमरनाथ पाठक, लोजपा के पंकज पासवान, कांग्रेस के सुमनजीत सुमन, कमलेश कंचन, जनसुराज के तुफैल अहमद खान, अंकुल सिंह, रामचंद्र सहनी सहित बड़ी संख्या में समाजिक राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च में पत्रकारों को अपना समर्थन दिया।
पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग तेज
इस घटना ने एक बार फिर बिहार में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ वर्षों में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों पर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं। भारतीय प्रेस परिषद भी कई बार राज्य सरकारों को पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की अनुशंसा कर चुका है। बखरी के पत्रकारों का यह आंदोलन उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी आश्वासन दिया है कि वे इस मुद्दे को विधानसभा तक पहुंचाएंगे।
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि जब तक दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। कैंडल मार्च में शामिल युवा पत्रकार निशांत कुमार ने कहा कि हम डरने वाले नहीं हैं, सच लिखना हमारा कर्तव्य है और हम उसे निभाते रहेंगे। इस मार्च ने यह साबित कर दिया कि बखरी ही नहीं, पूरे बेगूसराय जिले का पत्रकार समुदाय एकजुट है।


