लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो
विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर बिहार के बेगूसराय जिले में तेघड़ा प्रखंड के गौरा स्थित सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूल में एक महत्वपूर्ण सेमिनार का आयोजन किया गया, जिसमें ओजोन परत की सुरक्षा पर गहन चर्चा हुई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें पृथ्वी के सुरक्षा कवच के महत्व से अवगत कराना था। सेमिनार में विद्यालय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
तेघड़ा प्रखंड अंतर्गत गौरा स्थित सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल) में विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता नोडल शिक्षक अविनाश शास्त्री ने किया ।जबकि संचालन बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रखंड सचिव रवि कुमार ने किया। सेमिनार में विद्यालय के सभी छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
शिक्षक अविनाश शास्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि ओजोन परत पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। यह सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से मनुष्य, पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों की रक्षा करती है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
कल सचिव रवि कुमार ने कहा कि ओजोन परत का संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें सभी की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रदूषण कम करने और प्रकृति के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
वरीय शिक्षिका मधु कुमारी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत घर, विद्यालय और समाज से की जा सकती है। पेड़-पौधों की रक्षा, कचरे का उचित निपटारा और अनावश्यक धुएं को कम करना इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
ओजोन परत समताप मंडल में पाई जाने वाली एक नाजुक गैस की परत है जो सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी विकिरण को पृथ्वी तक पहुंचने से रोकती है। इसके क्षरण से त्वचा कैंसर, मोतियाबिंद और फसलों को नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न होती हैं। मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल 1987 में ओजोन क्षयकारी पदार्थों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने के लिए अपनाया गया एक ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
ओजोन परत की सुरक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ओजोन परत के महत्व और उसके संरक्षण के उपायों की जानकारी दी गई। शिक्षक मनीष कुमार एवं धर्मवीर कुमार ने कहा कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता बच्चों के सुरक्षित भविष्य के लिए आवश्यक है।
इस अवसर पर उपस्थित सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि ओजोन परत की सुरक्षा केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शिक्षकों ने उन्हें दैनिक जीवन में प्लास्टिक का उपयोग कम करने, पेड़ लगाने, वाहनों का प्रयोग घटाने और ऊर्जा संरक्षण जैसे छोटे-छोटे कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) के अनुसार, मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल के सफल क्रियान्वयन से ओजोन परत में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन सतत प्रयास आवश्यक हैं। अधिक जानकारी के लिए आप UNEP की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने भी इस पहल की सराहना की और भविष्य में ऐसे और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि बच्चे ही देश का भविष्य हैं और उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव बचपन से ही डालना होगा। इस सेमिनार ने न केवल ज्ञानवर्धन किया बल्कि व्यावहारिक संकल्प भी दिलाए। गौरा मॉडल स्कूल की यह पहल निश्चित रूप से नई पीढ़ी में पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता जगाने में मील का पत्थर साबित होगी।

