🙏कड़वा सच अपनों से शिकायत 🙏
🙏दिल की बात 🙏
वो दौर भी क्या दौर था, जब ख़बर इबादत थी,
कलम को पन्नों पर सच लिखने की आदत थी।
शब्द कम थे पर असर में गहराई होती थी,
पन्नों में दर्ज समाज की सच्चाई होती थी।
आज हर पन्ना चिल्लाता है और सच भी थक गया है,
सनसनी के पीछे दौड़ता हर लफ़्ज़ भटक गया है।
तब पत्रकार चेहरा नहीं, विचार हुआ करते थे,
समाज हित में काम करने वाले पहरेदार हुआ करते थे।
आज बहस में अर्थ कहीं पीछे अटक गया है,
अखबारी कागज का लक्ष्य भी रास्ता भटक गया है।
#देव

