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    Home » बाघराय मार्डी का आंदोलन लाया रंग, UCIL स्कूलों में अब गरीब बच्चों को भी मिलेगा दाखिला
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    बाघराय मार्डी का आंदोलन लाया रंग, UCIL स्कूलों में अब गरीब बच्चों को भी मिलेगा दाखिला

    Aman OjhaBy Aman OjhaJune 13, 2026No Comments2 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    मार्च से चल रहे विवाद पर आखिरकार विराम लग गया। झामुमो के पूर्व मुख्य संयोजक व पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी के आंदोलन के बाद UCIL ने बड़ा फैसला लिया है। अब परमाणु ऊर्जा केंद्रीय विद्यालय जादूगोड़ा, नरवा पहाड़ और तुरामडीह की सभी यूनिटों में गैर-UCIL कर्मी, विस्थापित और गरीब परिवारों के बच्चों का भी बाल वाटिका वन से लेकर स्टैंडर्ड वन तक मुफ्त दाखिला होगा।

     

    कर्मचारियों तक सीमित था दाखिला

    अब तक बाल वाटिका वन में सिर्फ UCIL कर्मचारियों के बच्चों का ही नामांकन होता था। मार्च में कंपनी प्रबंधन ने LKG, UKG और नर्सरी में गैर-कर्मी बच्चों को शिक्षा से वंचित कर दिया था। इसके खिलाफ बाघराय मार्डी ने मोर्चा खोल दिया।

     

    UCIL ने भेजा पत्र, 3 साल के बच्चों को भी मिलेगा लाभ

    आंदोलन के बाद UCIL प्रबंधन झुका। परमाणु ऊर्जा शिक्षा सोसायटी मुंबई और UCIL के संरक्षण में चल रहे स्कूलों में अब तीन साल या उससे अधिक उम्र के नौनिहालों को मुफ्त शिक्षा मिलेगी। UCIL ने पत्र भेजकर बाघराय मार्डी को इसकी जानकारी दी।

     

    “अब उच्च शिक्षा की लड़ाई लड़ेंगे” – बाघराय मार्डी

    झामुमो नेता बाघराय मार्डी ने कहा, “UCIL जिस जमीन से यूरेनियम निकाल रही है, उसी के विस्थापितों को शिक्षा से वंचित रखना गलत था। विरोध का नतीजा है कि अब बच्चे नर्सरी से 12वीं तक मुफ्त पढ़ेंगे। अब हमारी लड़ाई 12वीं के बाद उच्च शिक्षा में दाखिला और विस्थापित युवकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार दिलाने की है।”

     

    CSR से 400 बच्चों की पढ़ाई, सालाना खर्च 1 करोड़

    मार्डी ने दावा किया कि उनके आंदोलन से UCIL के आसपास के करीब 400 विस्थापित और गरीब बच्चों को पहली से 12वीं तक मुफ्त शिक्षा मिल रही है। UCIL CSR के तहत फीस, किताब, ड्रेस और छात्रवृत्ति पर सालाना करीब 1 करोड़ खर्च करती है।

     

    आहारघुटू में मना जश्न, बंटी मिठाइयां

    फैसले के बाद तुरामडीह के आहारघुटू में अभिभावक संघ ने भव्य समारोह किया। बाघराय मार्डी, पूर्व जिला परिषद पिंटू दत्त, मुखिया कान्हू मुर्मू का आदिवासी परंपरा से स्वागत हुआ। महिलाओं ने पत्ता मुकुट और पट्टा पहनाकर सम्मानित किया। लोगों ने मांग की कि UCIL बच्चों की उच्च शिक्षा का भी भार उठाए।

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