फर्जी संपादक भेजे जाएंगे जेल, बिना आरएनआई पंजीकरण के प्रेस कार्ड जारी करने वालों पर मंत्रालय नकेल कसने के तैयारी में
देवानंद सिंह
सोशल मीडिया लोगों तक अपनी पहुंच बढ़ाने का बहुत बड़ा माध्यम बना हुआ है। जब अभी देश के पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उस लिहाज से सोशल मीडिया पर राजनीतिक पार्टियों द्वारा एक अलग ही होड़ दिखाई दे रही है। राजनीतिक पार्टियों की सोशल मीडिया पर प्रचार की होड़ के बीच बहुत से न्यूज पोर्टल और यूट्यूब चैनल वाले भी खूब नजर आ रहे हैं। हालांकि, ये अभी से नहीं, बल्कि डिजिटल मीडिया के इस युग में न्यूज़ पोर्टलों और यूट्यूब चैनलों की बाढ़ आई हुई है। इनको चलाने वाले लोग न केवल खुद को असली पत्रकार मानते हैं, बल्कि ये खुलेआम संपादक का बिल्ला भी लिए घूम रहे हैं, जबकि ये लोग जब चाहे, जैसी चाहे न्यूज चला देते हैं और इनके द्वारा रेवड़ियों की तरह प्रेसकार्ड भी बांटे जा रहे हैं, पर अब इनकी मनमानी नहीं चलने वाली है, क्योंकि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (आरएनआई) की नजर में अब ये लोग चढ़ने लगे हैं। हालांकि, इनके खिलाफ पहले भी सख्त कदम उठाने की पहल की गई थी, लेकिन कोई भी ठोस कदम उठाए नहीं जा सके, लेकिन अब जिस तरह मंत्रालय ने दिल्ली, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्य सहित अन्य सभी राज्यों में चलाए जा रहे न्यूज़ पोर्टल व यूट्यूब न्यूज़ चैनलों के खिलाफ कार्रवाई का मन बनाया है, उससे लगता है कि सोशल मीडिया पर आई इस बाढ़ को कम किया जा सकेगा, बल्कि इनके द्वारा खुद को फर्जी तरीके से घोषित की गई पत्रकार और संपादक जैसी पदवी से भी इनको वंचित किया जा सकता है। दरअसल, मंत्रालय ने साफतौर पर कहा है कि ऐसे मामलों से अब सख्ती से निपटा जाएगा। मात्रालय के मुताबिक, ज्यादातर न्यूज़ पोर्टल व यूट्यूब न्यूज़ चैनलों के संपादकों ने खुद को संपादक घोषित कर रखा है। तथा फर्जी प्रेस कार्ड भी जारी कर रहे हैं। ऐसे मामलों की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने सोशल साइट्स पर न्यूज़ पोर्टल, यूट्यूब न्यूज़ चैनल बनाकर स्वयं को संपादक लिखने वाले जाल-साजों पर केस दर्ज कर उन्हें जेल भेजने की तैयारी कर ली है। मंत्रालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि प्रेस कार्ड को जारी करने का अधिकार सिर्फ (आरएनआई) रजिस्टर्ड समाचार पत्रों के संपादक को ही है तथा ऐसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया चैनल, जो मिनिस्ट्री आफ ब्रॉडकास्ट से मान्यता प्राप्त हैं, वह भी कार्ड जारी कर सकते हैं। लिहाजा, अब सरकार द्वारा अभियान चलाकर फर्जी संपादकों पर नकेल कसी जाएगी और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। मंत्रालय के एक अधिकारी द्वारा बताया गया कि न्यूज़ पोर्टल और यूट्यूब चैनल बनाकर आप खबरों को तो दिखा सकते हैं, इसका मतलब यह नहीं कि आप एक पंजीकृत मीडिया संस्थान हो, आप प्रेस कार्ड जारी करने का अधिकार नहीं रखते हैं, यदि आप ऐसा करते हो तो यह विधि विरुद्ध है। प्रेस कार्ड जारी करने का अधिकार सिर्फ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा मान्यता प्राप्त प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों को ही है। लिहाजा, बिना आरएनआई पंजीकरण के स्वयं को संपादक और पत्रकार मान चुके लोगों को सरकार की तरफ से कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। यह आवश्यक भी है, क्योंकि खबरों की इंडस्ट्री में एक मापदंड तो होना ही चाहिए। आजकल हर ऐरा गैरा स्वयं को पत्रकार और संपादक बताकर घूम रहा है। न इनको खबरों का सेंस रहता है और न ही अन्य तरह की कोई जानकारी। ऐसे में, यह बहुत जरूरी है कि ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो, क्योंकि मीडिया इंडस्ट्री लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, इसीलिए यह बहुत ही जवाबदेही वाला काम है। अगर, यही इंडस्ट्री बिना मानक के चलेगी तो यह बात बिल्कुल भी जायज नहीं मानी जा सकती है। लिहाजा, सरकार को भी अब बातों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कार्रवाई करनी होगी।

