डॉ. जटाशंकर पांडे ने उठाए जमशेदपुर की बिगड़ती कानून-व्यवस्था पर सवाल
‘राष्ट्र संवाद’ से विशेष बातचीत में अपराध नियंत्रण, पुलिस की जवाबदेही और बदहाल यातायात व्यवस्था में सुधार की जरूरत पर बेबाक राय
राष्ट्र संवाद
जमशेदपुर। लौहनगरी जमशेदपुर अपनी औद्योगिक पहचान, कारोबारी गतिविधियों और व्यवस्थित शहरी जीवन के लिए जानी जाती है। लेकिन जब इसी शहर में बैंक डकैती, हत्या, गोलीबारी और अन्य आपराधिक घटनाओं की खबरें सामने आती हैं, तो स्वाभाविक रूप से कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। सवाल सिर्फ अपराध होने का नहीं, बल्कि यह भी है कि अपराधियों पर अंकुश लगाने, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आम लोगों के मन में भरोसा कायम करने के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
शहर की विधि-व्यवस्था और यातायात से जुड़ी समस्याओं पर ‘राष्ट्र संवाद’ के संपादक देवानंद सिंह ने भाजपा झारखंड प्रदेश के विशेष आमंत्रित सदस्य, शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह-संयोजक तथा झारखंड प्रदेश भाजपा बुद्धिजीवी मंच के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जटाशंकर पांडे से विशेष बातचीत की। बातचीत में अपराध नियंत्रण, पुलिस की सक्रियता, खुफिया तंत्र की मजबूती और यातायात नियमों के पालन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए।
डॉ. पांडे ने कहा कि जमशेदपुर औद्योगिक और व्यावसायिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। ऐसे में यहां की कानून-व्यवस्था का प्रभाव केवल नागरिकों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका संबंध व्यापार, रोजगार और शहर की समग्र छवि से भी है। आम नागरिकों को घर से निकलते समय, कारोबार करते हुए और सार्वजनिक स्थानों पर आवाजाही के दौरान सुरक्षा का भरोसा मिलना चाहिए। यह भरोसा कायम रखना पुलिस और प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है।
अपराध के बाद कार्रवाई नहीं, अपराध से पहले रोकथाम जरूरी
किसी भी आपराधिक घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई महत्वपूर्ण होती है, लेकिन केवल घटना के बाद सक्रिय होना पर्याप्त नहीं है। असली चुनौती अपराध होने से पहले उसे रोकने की है। इसके लिए संवेदनशील इलाकों की पहचान, नियमित गश्त, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और खुफिया तंत्र को मजबूत करना जरूरी है।
लगातार आपराधिक घटनाओं वाले क्षेत्रों का विश्लेषण कर पुलिस को अपनी रणनीति बनानी चाहिए। अपराध के तौर-तरीकों और घटनाओं के पैटर्न को समझकर निगरानी व्यवस्था मजबूत की जा सकती है। नागरिकों से मिलने वाली सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई और पुलिस की सक्रिय मौजूदगी भी अपराध नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बातचीत के दौरान डॉ. पांडे ने यातायात व्यवस्था का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। शहर में लगातार बढ़ रही वाहनों की संख्या और यातायात नियमों के उल्लंघन के कारण सड़क सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई। नाबालिगों के वाहन चलाने, बिना हेलमेट बाइक चलाने और बिना वैध लाइसेंस के वाहन चलाने जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण की जरूरत बताई गई।
डॉ. पांडे ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें अभिभावकों और आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अभिभावकों को नाबालिग बच्चों को वाहन देने से बचना चाहिए और उन्हें यातायात नियमों के पालन के प्रति जागरूक करना चाहिए। वहीं, प्रशासन को भी नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमित जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था और यातायात व्यवस्था, दोनों का सीधा असर शहर के सामान्य जनजीवन पर पड़ता है। इसलिए पुलिस और प्रशासन को विभिन्न स्तरों पर सामने आ रही समस्याओं की समीक्षा कर ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए। संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और नागरिकों से मिलने वाली सूचनाओं पर त्वरित कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
डॉ. पांडे ने सरकार और पुलिस प्रशासन से जमशेदपुर की विधि-व्यवस्था को लेकर गंभीरता से कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के साथ-साथ नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत करना भी प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, अभिभावकों और आम नागरिकों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रभावी निगरानी और समयबद्ध कार्रवाई के माध्यम से शहर में कानून-व्यवस्था की स्थिति को और बेहतर बनाया जा सकता है।

