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    Home » चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद, कई सामाजिक कार्यकर्ता हिरासत में
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    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद, कई सामाजिक कार्यकर्ता हिरासत में

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments3 Mins Read
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    शिबू सोरेन की प्रतिमा
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    चाईबासा: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता एवं दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि से पहले उनकी शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना को लेकर शनिवार को चाईबासा में विवाद गहरा गया। टाटा बाईपास चौक स्थित प्रस्तावित प्रतिमा स्थल पर झामुमो समर्थकों और सामाजिक एवं आदिवासी संगठनों के बीच तनाव की स्थिति बन गई।

    शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना पर विवाद

    झामुमो की ओर से 4 अगस्त को श्रद्धांजलि कार्यक्रम के तहत प्रतिमा स्थापना की तैयारी की जा रही है। वहीं, विरोध कर रहे सामाजिक संगठनों का कहना है कि झारखंड आंदोलन में शहीद हुए सभी आंदोलनकारियों को पहले सम्मान मिलना चाहिए और केवल एक नेता की प्रतिमा स्थापित करना उचित नहीं है।

    पुलिस ने संभाला मोर्चा

    स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए विरोध कर रहे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बस से चाईबासा थाना भेज दिया। इसके बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है, हालांकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

    पृष्ठभूमि और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    शिबू सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और झारखंड आंदोलन के शीर्ष नेता रहे हैं। उन्हें दिशोम गुरु के नाम से जाना जाता है। उनकी पहली पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने के लिए झामुमो ने प्रतिमा स्थापना का निर्णय लिया था।

    विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि सरकार एक खास नेता को महिमामंडित कर रही है जबकि झारखंड आंदोलन के सैकड़ों शहीदों को भुला दिया गया है। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अभी तक कोई बयान नहीं दिया है।

    वरिष्ठ पत्रकार रामनाथ झा का मानना है कि इस विवाद से आदिवासी अस्मिता की राजनीति नया मोड़ ले सकती है। उन्होंने कहा, प्रतिमा लगाना सम्मान की बात है, लेकिन सभी शहीदों को समान सम्मान मिलना चाहिए।

    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, टाटा बाईपास चौक पर धारा 144 लागू कर दी गई है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है।

    अधिक जानकारी के लिए शिबू सोरेन का जीवन परिचय देखें।

    आगे क्या?

    राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यदि विवाद लंबा खिंचा तो इसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है। झामुमो अपने कैडर को एकजुट रखने के लिए प्रतिमा स्थापना को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना चुकी है।

    वहीं, सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सभी शहीदों की प्रतिमा नहीं लगाई गई तो वे आंदोलन तेज करेंगे। फिलहाल चाईबासा में शांति बनी हुई है, लेकिन तनाव बरकरार है।

    आदिवासी संगठनों की मांग

    आदिवासी महासभा के अध्यक्ष सुरेश मुर्मू ने कहा कि झारखंड आंदोलन में सिदो-कान्हू, बिरसा मुंडा और नीलांबर-पीतांबर जैसे अनेक वीरों ने बलिदान दिया है। केवल शिबू सोरेन की प्रतिमा लगाना अन्य शहीदों का अपमान है।

    उन्होंने मांग की कि चाईबासा ही नहीं, पूरे राज्य में सभी शहीदों की प्रतिमाएं एक साथ स्थापित की जाएं। इस संबंध में उन्होंने राज्यपाल को ज्ञापन भी सौंपा है।

    कानूनी पहलू

    कानूनी जानकारों के अनुसार, सार्वजनिक स्थान पर प्रतिमा स्थापना के लिए नगर निगम की अनुमति आवश्यक है। झामुमो ने दावा किया है कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, लेकिन विरोधी पक्ष इसे नियम विरुद्ध बता रहा है।

    अदालत में इस मामले को लेकर जनहित याचिका दायर करने की तैयारी चल रही है। झारखंड हाईकोर्ट में अगले सप्ताह सुनवाई संभावित है।

    चाईबासा झारखंड आंदोलन प्रतिमा विवाद
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