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    Home » चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराया, कई कार्यकर्ता हिरासत में
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    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराया, कई कार्यकर्ता हिरासत में

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 1, 2026No Comments4 Mins Read
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    शिबू सोरेन की प्रतिमा
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर विवाद गहराता जा रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है।

    शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना पर विवाद

    चाईबासा: झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता एवं दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि से पहले उनकी प्रतिमा स्थापना को लेकर शनिवार को चाईबासा में विवाद गहरा गया। टाटा बाईपास चौक स्थित प्रस्तावित प्रतिमा स्थल पर झामुमो समर्थकों और सामाजिक एवं आदिवासी संगठनों के बीच तनाव की स्थिति बन गई।

    झामुमो की ओर से 4 अगस्त को श्रद्धांजलि कार्यक्रम के तहत प्रतिमा स्थापना की तैयारी की जा रही है। वहीं, विरोध कर रहे सामाजिक संगठनों का कहना है कि झारखंड आंदोलन में शहीद हुए सभी आंदोलनकारियों को पहले सम्मान मिलना चाहिए और केवल एक नेता की प्रतिमा स्थापित करना उचित नहीं है।

    स्थिति बिगड़ने की आशंका के बीच पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए विरोध कर रहे कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर बस से चाईबासा थाना भेज दिया। इसके बाद क्षेत्र में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया।

    फिलहाल प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है, हालांकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। ऐसे में प्रतिमा स्थापना को लेकर विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

    पृष्ठभूमि और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

    शिबू सोरेन झारखंड आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में से एक माने जाते हैं। उन्हें दिशोम गुरु की उपाधि से सम्मानित किया गया था। उनके निधन के बाद पहली पुण्यतिथि पर 4 अगस्त को श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की ओर से टाटा बाईपास चौक पर उनकी प्रतिमा लगाने की योजना है। हालांकि, कई आदिवासी संगठन और सामाजिक कार्यकर्ता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि आंदोलन में सैकड़ों शहीद हुए, केवल एक नेता की प्रतिमा लगाना अन्य शहीदों का अपमान है।

    प्रशासनिक कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था

    पुलिस ने एहतियातन कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया है। चाईबासा थाना प्रभारी ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है लेकिन अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। जिला प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। उपायुक्त ने कहा कि प्रतिमा स्थापना के लिए उचित प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

    कानूनी पहलू और आगे की राह

    जानकारों का मानना है कि सार्वजनिक स्थल पर प्रतिमा लगाने के लिए नगर निगम या संबंधित प्राधिकरण की अनुमति आवश्यक है। बिना अनुमति के प्रतिमा स्थापना कानूनी विवाद को जन्म दे सकती है। झामुमो नेताओं का कहना है कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं। वहीं, विरोधी गुट हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी कर रहा है।

    जनमत और सामाजिक प्रभाव

    स्थानीय निवासियों में इस मुद्दे पर मिली-जुली प्रतिक्रिया है। कुछ लोग शिबू सोरेन के योगदान को देखते हुए प्रतिमा के पक्ष में हैं, जबकि अन्य का मानना है कि सभी शहीदों का सामूहिक स्मारक बनना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता रमेश हेम्ब्रम ने कहा, “हम किसी नेता के विरोधी नहीं हैं, लेकिन इतिहास में सबका योगदान समान है।”

    मुख्य बिंदु

    • तारीख: 4 अगस्त को श्रद्धांजलि कार्यक्रम
    • स्थान: टाटा बाईपास चौक, चाईबासा
    • विवाद: प्रतिमा स्थापना बनाम सामूहिक स्मारक
    • कार्रवाई: कई कार्यकर्ता हिरासत में
    • स्थिति: तनावपूर्ण, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात

    इस बीच, BBC हिंदी की एक रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में प्रतिमा राजनीति नई नहीं है। पहले भी कई मौकों पर प्रतिमा स्थापना को लेकर टकराव हुए हैं। प्रशासन के लिए चुनौती है कि वह कानून व्यवस्था बनाए रखते हुए सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करे।

    निष्कर्ष

    चाईबासा में शिबू सोरेन की प्रतिमा को लेकर उपजा विवाद फिलहाल थमता नहीं दिख रहा। दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हैं। प्रशासनिक सूझबूझ और संवाद से ही इस गतिरोध का हल निकल सकता है। आगामी दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने के आसार हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवाद झारखंड की राजनीति में नए नहीं हैं। पूर्व में भी महापुरुषों की प्रतिमाओं को लेकर संघर्ष होते रहे हैं। प्रशासन को चाहिए कि वह सर्वदलीय बैठक बुलाकर सहमति बनाए।

    चाईबासा प्रतिमा विवाद
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