लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो
बेगूसराय के उलाव स्थित स्पेस मचहा में बिदेसिया का सफल मंचन संपन्न हुआ, जिसने दर्शकों को भोजपुरी लोककला की समृद्ध विरासत से रूबरू कराया। ओपेरा आर्ट सोसाइटी बेगूसराय की प्रस्तुति एवं संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित इस आयोजन ने सांस्कृतिक संध्या को यादगार बना दिया।
बिदेसिया का सफल मंचन: भिखारी ठाकुर की विरासत को सलाम
भिखारी ठाकुर द्वारा लिखित एवं हरिकिशोर ठाकुर द्वारा निर्देशित नाटक बिदेसिया का सफल मंचन किया गया। नाटक का विधिवत उद्घाटन रंगकर्मी इम्तियज़ुल हक डब्लू, सिकंदर कुमार शर्मा, रंजन कुमार, शिक्षाविद प्रमोद मिश्रा, रामप्रवेश ठाकुर, समाज सेवी अशोक कुमार एवं नाट्य निर्देशक हरिकिशोर ठाकुर द्वारा संयुक्त रुप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
नाटक बिदेसिया भोजपुरी के महान लोक-नाटककार भिखारी ठाकुर द्वारा लिखा गया एक अत्यंत प्रसिद्ध और कालजयी लोक नाटक है। इसे भोजपुरी क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर और ‘भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की सबसे अमर कृति माना जाता है। यह नाटक मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों से रोजगार के लिए शहरों (जैसे कलकत्ता) की ओर होने वाले पलायन, गरीबी और उसके कारण परिवारों पर आने वाले संकटों पर आधारित है। नाटक का मुख्य पात्र ‘बिदेसी’ घरबार छोड़कर कमाने परदेश चला जाता है। पीछे उसकी नई नवेली पत्नी ‘प्यारी सुंदरी’ अकेली रह जाती है और उसके वियोग तथा अकेलेपन का दर्द इसमें मार्मिक ढंग से दिखाया गया है। इसमें गीत, संगीत और नृत्यों के माध्यम से पति-पत्नी के प्रेम, समाज की व्यवस्था और पारिवारिक टूटन को बहुत ही सरल व प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया गया।
कलाकारों के जीवंत अभिनय ने बांधा समां
बटोही की भूमिका में सिकंदर कुमार शर्मा, बिदेसी की भूमिका में हरिकिशोर ठाकुर एवं प्यारी सुंदरी की भूमिका में रानी कुमारी ने अपने अभिनय से लोगों को बांधे रखा। बिहारी की भूमिका में सचिन कुमार, बंगाली की भूमिका में साहिल कुमार, दूसरी पत्नी की भूमिका में करिश्मा कुमारी एवं कोरस की भूमिका में वर्षा, खुशबू, मीणा, शालिनी, दीपशिखा, नेहा, राजू, मोहन, विक्रम आदि ने अपने अभिनय से दर्शकों को काफी मनोरंजन किया।
अपने संगीत से गोपाल कुमार ने दर्शकों को जोड़े रखा। ढोलक पर शंभू कुमार मौजूद थे। इस आयोजन ने एक बार फिर साबित किया कि भिखारी ठाकुर की रचनाएं आज भी ग्रामीण भारत की पीड़ा और संवेदना को स्वर देने में सक्षम हैं। संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली के सहयोग से हुए इस आयोजन ने स्थानीय रंगकर्म को नई ऊर्जा प्रदान की है। संगीत नाटक अकादमी की आधिकारिक वेबसाइट पर ऐसी सांस्कृतिक गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

