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    Home » अयोध्या सभ्यता का उद्गम स्थल है – मनोज सिन्हा
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    अयोध्या सभ्यता का उद्गम स्थल है – मनोज सिन्हा

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarApril 3, 2026No Comments6 Mins Read
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    अयोध्या सभ्यता का उद्गम स्थल है – मनोज सिन्हा

    राष्ट्र की रक्षा भगवान राम के आदर्श से ही संभव – पूज्य महंत श्री कमल नयन दास जी महाराज

    – आईजीएनसीए में अयोध्या पर्व 2026 का भव्य शुभारम्भ

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    नई दिल्ली, 3 अप्रैल, शुक्रवार। अयोध्या न्यास द्वारा इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के सहयोग से आयोजित तीन दिवसीय ‘अयोध्या पर्व 2026’ का भव्य शुभारम्भ 3 अप्रैल को गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि थे श्री मणिरामदास छावनी, अयोध्या के पूज्य महंत श्री कमल नयन दास जी महाराज। इस सत्र में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, राजस्थान की उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं मार्गदर्शक श्री सुरेश भैयाजी जोशी की विशिष्ट उपस्थिति रही। इस अवसर पर आईजीएनसीए के अध्यक्ष श्री रामबहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, अयोध्या पर्व के संयोजक श्री लल्लू सिंह और पूर्व राज्यसभा सांसद श्री अशोक वाजपेयी की भी गरिमामय उपस्थिति रही। अयोध्या पर्व में के दौरान सुंदर प्रदर्शनियों का भी आयोजन किया गया है, जिसमें ‘रामोत्सव’ फोटो प्रदर्शनी, ‘बड़ी है अयोध्या’ प्रदर्शनी और रामकथा मर्मज्ञ स्व. पंडित रामकिंकर उपाध्याय से जुड़ी एक प्रदर्शनी शामिल है।

    उद्घाटन सत्र के दौरान अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, परम्पराओं और आध्यात्मिक चेतना को विभिन्न आयामों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। श्री कमल नयन दास जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में अयोध्या की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परम्परा के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भगवान राम के आदर्श जन-जन तक पहुंचें, यही अयोध्या पर्व का उद्देश्य है। भगवान राम का आदर्श है कि सबमें परस्पर प्रीति हो। भगवान राम ने सबको अपनाया। भगवान राम अपने पिता की क्रिया नहीं करते, लेकिन गिद्धराज जटायू की क्रिया पिता के समान करते हैं। शबरी को वह प्रेम देते हैं, जो बड़े-बड़े ऋषि-मुनियों को नहीं मिला। आज हमें आवश्यकता है भगवान राम की, तभी देश में समरसता आएगी। राष्ट्र है, तभी हम हैं, हमारी अस्मिता है, हमारा धर्म है, हमारा कर्म है। राष्ट्र की रक्षा भगवान राम के आदर्शों से ही संभव है।

    सुरेश भैयाजी जोशी ने भारतीय परम्पराओं की निरंतरता और समाज में उनकी पुनर्स्थापना पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, आज का परिवेश संकेत करता है कि अयोध्या के राम नहीं हैं, राम की अयोध्या है। उन्होंने कहा कि देश में 100 वर्ष पूर्व एक संगठन बना था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके 100वें वर्ष में रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण हुआ, यह एक सुखद संयोग है। उन्होंने कहा, राममंदिर का निर्माण देश का इतिहास लिखने की शुरुआत का एक पृष्ठ है। अयोध्या से देश बनने की प्रक्रिया शुरू हुई है। राममंदिर का निर्माण केवल एक मंदिर का निर्माण नहीं है, राष्ट्र निर्माण का शुभारम्भ है। अयोध्या ईश्वरीय शक्ति का केन्द्र है।

    श्री मनोज सिन्हा ने अयोध्या को भारतीय सांस्कृतिक चेतना का केंद्र बताते हुए इस पर्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि अयोध्या को केवल एक भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं देखें। जब हम अयोध्या की बात करते हैं, तो उसे केवल भगवान राम की जन्मभूमि के रूप में याद नहीं करते, बल्कि उस चेतना के रूप में याद करते हैं, जो भगवान राम के आर्विभाव से पैदा हुई थी। अयोध्या सभ्यता का उद्गम स्थल है। अयोध्या को कुछ लोग इतिहास के रूप में देखते हैं, लेकिन अयोध्या ऐसा नगर है, जहां इतिहास ने खुद को गढ़ने का काम किया है। अयोध्या केवल एक ऐतिहासिक नगर नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना, आत्मबोध और सभ्यतागत निरंतरता का मूल स्रोत है। हमारे पूर्वजों ने केवल जीवन जीने का काम नहीं किया, बल्कि जीवन के देखने का काम किया है। उन्होंने कहा, दुनिया के कई नगर काल के गर्त में समा गए, लेकिन अयोध्या काल के प्रवाह से परे खड़ा रहा। अयोध्या वर्तमान और भविष्य की चेतना है। अयोध्या हमारी सनातन संस्कृति का केन्द्र है, जहां से भारत का विचार पूरी दुनिया में पहुंच सकता है, पहुंचाया जा सकता है। अयोध्या पर्व हमें भीतर की यात्रा करने के लिए भी प्रेरित करता है।

    श्रीमती दीया कुमारी ने अपने उद्बोधन में भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में ऐसे आयोजनों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, राजस्थान और अयोध्या का सम्बंध बहुत पुराना और ऐतिहासिक है। राजस्थान के कछवाहा राजवंश के लोग भगवान राम के पुत्र कुश के वंशज हैं। राजस्थान की उपमुख्यमंत्री ने अयोध्या पर्व का आयोजन राजस्थान में भी करने का आग्रह किया।

    प्रारम्भ में, स्वागत भाषण करते हुए डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने अयोध्या पर्व के शेष दो दिनों के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा, अयोध्या पर्व में आईजीएनसीए का पूरा परिसर दिव्य ऊर्जा से भर जाता है। श्री अशोक वाजपेयी ने भी अपने विचार प्रकट करते हुए अयोध्या पर्व के आयोजकों को इस सुंदर आयोजन के लिए बधाई दी। उद्घाटन सत्र में अयोध्या पर्व की स्मारिका और चित्रांजलि संस्था द्वारा रामोत्सव पर आधारित फोटोग्राफ की कॉफी टेबल बुक का लोकार्पण किया गया। साथ ही, चित्रंजलि द्वारा आयोजित ‘रामोत्सव’ और ‘फेस्टिवल ऑफ इंडिया’ फोटोग्राफी प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। अंत में, अयोध्या न्यास के सचिव श्री राकेश सिंह ने धन्यवाद ज्ञपन किया।

    उद्घाटन सत्र से पूर्व, प्रथम सत्र में ‘भविष्य की अयोध्या-नगर योजना’ सत्र में इस विषय पर गंभीर विचार-विमर्श हुआ। इसमें यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह ने अयोध्या क्षेत्र में प्रवेश से पूर्व के स्थानों पर रामचरितमानस के अलग-अलग काण्ड पर थीम पार्क बनाने की आवश्यकता बताई। इस सत्र की अध्यक्षता करते हुए आईजीएनसीए के अध्यक्ष पद्म भूषण रामबहादुर राय ने कहा कि धर्म स्थलों के नवीनीकरण में संतों की आशंका का समाधान होना चाहिए। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम के विकास का उदाहरण दिया, जब आपातकाल और उसके पहले भी तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी यह काम नहीं करा सकीं। इसे 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्य रूप दिया। श्री राय ने कहा कि अयोध्या धाम के विकास में भी काशी से प्रेरणा लेनी चाहिए। जानकारी के मुताबिक, कई देशों ने अयोध्या में अपना केंद्र बनाने की इच्छा जताई है। देश के विभिन्न राज्य तो अपने अतिथि गृह बना ही रहे हैं। इस सत्र को गौड़ संस के प्रमुख डॉ. बी. एल. गौड़, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. शैलेष शुक्ल और फैजाबाद के पूर्व सांसद लल्लू सिंह ने भी सम्बोधित किया।

    दिन का अंत भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुआ। पं. डॉ. (मानद) अभय मानके ने गीत रामायण की प्रस्तुति से दर्शकों को आनंदित कर दिया।

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