विरोध की भी एक मर्यादा होती है — राजनीति में नहीं, संस्कृति में बेटी का सम्मान सर्वोपरि है राष्ट्र संवाद संवाददाता पूरे देश में प्रचलित है “बेटी का सम्मान देखना है तो मिथिला में देखो।” सीता जी की पावन भूमि मिथिला में बेटी को देवी का रूप माना गया है। यहाँ दामाद की आवभगत जगप्रसिद्ध है, और बेटियों को संस्कारों की शिरोमणि समझा जाता है। परंतु पिछले कुछ दिनों से मिथिला की इस गरिमा पर प्रश्न उठे हैं।सिर्फ इसलिए कि 20–25 वर्ष की कलाकार मैथिली ठाकुर को भारतीय जनता पार्टी ने प्रत्याशी बनाया, सोशल मीडिया पर उनके…
Author: News Desk
🙏🌅नमस्कार 🌅🙏 *आपका *राष्ट्र* *आपका *संवाद* *राष्ट्र संवाद पञिका* *राष्ट्र संवाद तीसरे दशक में* *बेमिसाल 25 साल* *राष्ट्र संवाद की मुहिम : सकारात्मक पत्रकारिता से ही बदलेगा समाज* 🪷जय गणेश 🪷 💐दिनांक 16अक्टूबर गुरुवार 2025 www.rashtrasamvad.com www.rastrasamvad.com Devanandsingh.com rashtrasamwad. com *********************** Check out rashtrasamvad (@rashtrasamvad1): https://twitter.com/rashtrasamvad1?s=08 ************************* *NOW RASHTRASAMVAD AVAILABLE ON MOBILE APP* JHAHIN2000/1039 *राष्ट्रसंवाद दैनिक:-* JHAHIN01092 *राष्ट्र संवाद नजरिया : 16-10-2025-Page 1-Rashtrasamvad https://epaper.rashtrasamvad.com/publication/daily/16-10-2025?page=1 ************************** ✍️अफगानिस्तान को कौन देता है हथियार, किसके दम पर पाकिस्तान को पटखनी दे रहा तालिबान? ✍️सिर्फ 8 घंटों में घुटनों पर कैसे आया पाकिस्तान? ✍️इजरायल संग हमास ने कर दिया खेल, बंधकों से मैच नहीं…
शहर के बीचों-बीच एक और शहर। शहर अपने साथ शहर का ही एक अलिखित काला अध्याय समेटे हुए है। यहाँ बहुत से ऐसे लोग हैं जो नहीं होने चाहिए, बहुत सी ऐसी बातें हैं जिनके बारे में नहीं सोचा जाना चाहिए। एक ऐसा मानव-जीवन जो जीवन जैसा नहीं है। जहाँ जवानी की कोई क़ीमत नहीं। ज़िंदगी और जवानी की क़ीमत चावल के कुछ निवाले या दो रोटियों से मापी जाती है। एक वक्त की रोटी से दूसरे वक्त की रोटी तक बड़ी फ़ासला है। अश्लील भाषा, गाली-गलौज, सबकुछ जायज है यहां। शराब और गांजा यहाँ छिपकर पीने की जरूरत नहीं…
शिक्षा, समाज सेवा और प्रेरणा का अमर उत्सव झज्जर ,चंडीगढ़ ,पंचकूला: राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, बादली में स्वर्गीय के.डी. शर्मा जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित 20वां के.डी. शर्मा मेमोरियल वजीफा पुरस्कार समारोह शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी आयोजन बनकर उभरा। समारोह में शिक्षा, प्रशासन और समाज के विभिन्न वर्गों से आए गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। इस अवसर पर विद्यालय की आठवीं, दसवीं और बारहवीं कक्षाओं में प्रथम एवं द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को वजीफा, सम्मान पत्र और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। स्वर्गीय के.डी. शर्मा जी…
– ललित गर्ग – भारत में आज भी कई सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बच्चे सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे सभी विषय पढ़ रहे हैं। शिक्षा मंत्रालय के साल 2024-25 के आधिकारिक डेटा के मुताबिक देश के कुल 1,04,125 स्कूलों में एक ही शिक्षक सभी कक्षाओं एवं सभी विषयों को पढ़ा रहे हैं। यह आंकड़ा हमारे शिक्षा तंत्र की विफलता को दर्शाता ही नहीं रहा है बल्कि चिन्ताजनक स्थिति को बयां कर रहा है। ये आंकडे़ हमारे शैक्षणिक विकास पर एक गंभीर प्रश्न खड़ा कर रहे हैं। “शिक्षा किसी राष्ट्र की आत्मा होती है।” स्वामी विवेकानंद का यह वाक्य आज…
देवानंद सिंह चुनाव का समय है। आपकी, हमारी पूछ बढ़नी शुरू हो गई है। खूब लुभावने वायदे, जुमले सुनने को मिलने शुरू हो गए हैं। कोई कहता है कि बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट, एक बिहारी सब पर भारी, बिहार IAS की फैक्ट्री है, बिहारी बहुत मेहनती होते हैं, बिहार लोकतंत्र की जननी है, बिहार का इतिहास बहुत ही गौरवपूर्ण रहा है आदि आदि। आपको लगता है कि क्या इस तरह के जुमलों, वायदों से हर बिहारी को झूमना शुरू कर देना चाहिए ? क्या अपनी-अपनी नाप वाला 56 इंच का सीना तानकर हर बिहारी को इस चुनावी मौसम…
क्या तालिबान सरकार को भारत मान्यता देगा ? देवानंद सिंह तालिबान सरकार के विदेश मंत्री भारत दौरे पर हैं। उनके भारत दौरे पर सबसे ज्यादा मिर्ची अगर किसी को लगी है तो वह पाकिस्तान है। भारत अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पड़ोसी देश को ऐसा कर उसे चिढ़ाने में भले ही सफल हो गया हो लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठना शुरू हो गया है कि क्या मान्यता देने जा रहा है भारत तालिबान सरकार को ? चीन ने तो 2021 में अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर तालिबान के क़ब्ज़े के बाद से ही संपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया था। लेकिन भारत…
(समाज सेवा विशेष) “कुर्सी नहीं, भरोसे की राजनीति: रमेश वर्मा का सफ़र” (स्वयं विधायक पद का चुनाव नहीं लड़ा, पर कई विधायकों की डूबती नैया पार लगवाई।) भिवानी के गाँव बड़वा में जन्में रमेश वर्मा की राजनीतिक यात्रा एक ऐसे जननेता की कहानी है जिसने सत्ता नहीं, सेवा को साधन बनाया। चार दशक से अधिक समय में उन्होंने पंचायत से लेकर विधानसभा तक अपनी पहचान ईमानदारी, पारदर्शिता और जनसेवा से बनाई। गांवों में विकास, महिलाओं का सशक्तिकरण और युवाओं को दिशा देने के उनके प्रयास ग्राम राजनीति को नई परिभाषा देते हैं। भले ही उन्होंने स्वयं विधायक पद का…
इस्राइल-हमास युद्धविरामः आशा की किरण या अस्थायी विराम? – ललित गर्ग – गाज़ा की धरती लम्बे दौर से संघर्ष, हिंसा, विनाश और तबाही की त्रासदी की गवाह रही है, आज फिर एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहाँ शांति की एक हल्की किरण दिखाई तो देती है, परंतु उसके चारों ओर धुएँ और राख का अंधकार अब भी विद्यमान है। हाल ही में हुए युद्ध-विराम ने न केवल मध्यपूर्व बल्कि समूचे विश्व को राहत की एक साँस दी है। गाजा में अमन-चैन की ओर जो सुखद कदम बढ़े हैं, उनका स्वागत होना चाहिए। परंतु यह सवाल भी उतना ही प्रासंगिक…
🙏🌅नमस्कार 🌅🙏 *आपका *राष्ट्र* *आपका *संवाद* *राष्ट्र संवाद पञिका* *राष्ट्र संवाद तीसरे दशक में* *बेमिसाल 25 साल* *राष्ट्र संवाद की मुहिम : सकारात्मक पत्रकारिता से ही बदलेगा समाज* 🪷जय गणेश 🪷 💐दिनांक 15अक्टूबर बुधवार 2025 www.rashtrasamvad.com www.rastrasamvad.com Devanandsingh.com rashtrasamwad. com *********************** Check out rashtrasamvad (@rashtrasamvad1): https://twitter.com/rashtrasamvad1?s=08 ************************* *NOW RASHTRASAMVAD AVAILABLE ON MOBILE APP* JHAHIN2000/1039 *राष्ट्रसंवाद दैनिक:-* JHAHIN01092 *राष्ट्र संवाद नजरिया : आईपीएस आत्महत्या Vs एएसआई आत्महत्या: कौन सच्चा कौन झूठा,अब निकलेगी सच्चाई* *RJD-कांग्रेस में कहां झगड़ा, महागठबंधन में क्यों नहीं बनी बात, क्या रहेगा साथ?* *मंत्रियों के टिकट कटे, नए चेहरों पर भरोसा… बीजेपी की पहली लिस्ट की बड़ी बातें* ************************** ✍️चीन ने…
