लेखक: प्रो. आरके जैन “अरिजीत”सपनों की उम्र जब नीट के पेपर लीक, अधूरी भर्तियों और बेरोजगारी में उलझे, तब गुस्सा भीतर ही भीतर जमा होने लगता है। 15 मई 2026 की अदालत टिप्पणी ने उसी दबे आक्रोश को आवाज दी। जब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में कुछ बेरोजगार युवाओं को “कॉकरोच” और “परजीवी” कहा, तो यह बयान पूरी पीढ़ी के आत्मसम्मान पर चोट बन गया। युवाओं ने चुप रहने के बजाय अपमान को प्रतिरोध में बदला दिया। कुछ ही दिनों में “कॉकरोच जनता पार्टी” अभियान सोशल मीडिया पर फैल गया और उसके फॉलोअर्स कई मिलियन पार कर गए।…
Author: Nikunj Gupta
लेखक: देवानंद सिंहदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में जिस तरह भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिल रही है, उसने लोकतांत्रिक संवाद की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा द्वारा राहुल गांधी पर ‘‘अराजकता फैलाकर’’ मोदी सरकार को गिराने की साजिश रचने का आरोप और इसके जवाब में कांग्रेस का लगातार सरकार पर हमला, यह दर्शाता है कि राजनीतिक विमर्श अब मुद्दों से अधिक व्यक्तिगत और वैचारिक टकराव का रूप ले चुका है।भाजपा नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों और…
लेखक: इंद्र यादव’हम यादों के सहारे जी सकते हैं, लेकिन यादें लौट के नहीं आतीं।’ यह महज एक फिल्मी संवाद या किसी शायर की कल्पना नहीं है, बल्कि इंसानी जिंदगी का वो कड़वा सच है जिससे हर शख्स कभी न कभी रूबरू होता है। आज की इस भागती-दौड़ती, कंक्रीट की दुनिया में इस पंक्ति के मायने और गहरे हो जाते हैं।यादें: जिंदगी का सबसे बड़ा सहाराइंसान की फितरत है कि वह पीछे मुड़कर देखता है। जब वर्तमान धुंधला लगने लगे और भविष्य डराने लगे, तो इंसान अतीत की तिजोरी खोल लेता है।जब कोई अपना बिछड़ जाता है या वक्त बदल…
लेखक: डाक्टर दीपक गोस्वामीशब्द राधे राधे अपने आप में अनन्य अनंत प्रेम की निधि है।जब किसी भक्त के शरीर पर बरसाना की रज लगती है तो रोम-रोम में एक ही नाम गूंजता है, राधे-राधे। ब्रज की माटी का कण-कण राधारानी की भक्ति से सना है और उसी भक्ति की अष्ट-धाराओं के रूप में ये आठ सखियाँ अनादिकाल से राधा जू की सेवा में लीन हैं।ऊँचा गाँव की ललिता सखी, जो राधारानी की परम प्रिय, उनकी अंतरंग सखी, मान की दूतिका, प्रेम की प्रथम आचार्या हैं। जिस दिन राधारानी का मान बढ़ता है उस दिन ललिता सखी ही श्रीकृष्ण को मनाकर…
लेखक: प्रो. आरके जैन “अरिजीत”’मेलोडी डिप्लोमेसी’ का उदयरोम की ऐतिहासिक प्राचीरों के साए में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को ‘मेलोडी’ टॉफी का पैकेट भेंट किया, तो दुनिया ने सिर्फ एक मीठा पल नहीं, बल्कि वैश्विक विश्व व्यवस्था में भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव का स्पष्ट संकेत देखा। यह ‘मेलोडी’ डिप्लोमेसी महज वायरल सेल्फी या कोलोसियम की सैर नहीं थी। यह दो मजबूत राष्ट्रवादियों के बीच उस रणनीतिक गठबंधन की शुरुआत थी, जो यूरोप के मध्य में भारत को नया द्वार खोल रहा है। जबकि विपक्ष ‘टॉफी डिप्लोमेसी’ पर तंज कस रहा है, हकीकत…
लेखक: देवानंद सिंहदेश में पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने आम लोगों की चिंता जरूर बढ़ाई है। 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल के दाम लगभग पांच रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुके हैं, जबकि सीएनजी भी चार रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है। स्वाभाविक है कि इसका असर परिवहन, महंगाई और घरेलू बजट पर पड़ेगा। लेकिन इस पूरे मुद्दे को केवल राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय वैश्विक परिस्थितियों और आर्थिक वास्तविकताओं के संदर्भ में समझना अधिक जरूरी है।वैश्विक परिस्थितियां और भारतपश्चिम एशिया में जारी तनाव, विशेषकर ईरान-इजराइल संघर्ष और होर्मुज…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताजमशेदपुर। झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति सात दिवसीय महाराष्ट्र अध्ययन दौरे पर महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल विकास और सुशासन से जुड़े विभिन्न मॉडलों का अध्ययन कर रही है। समिति की सभापति कल्पना मुर्मू सोरेन के नेतृत्व में जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू एवं पांकी विधायक डॉ. शशिभूषण मेहता सहित शिष्टमंडल ने मुंबई में आयोजित विभिन्न बैठकों और संवाद कार्यक्रमों में भाग लिया।मुंबई में ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया फाउंडेशन (TRIF) एवं द ब्रिजस्पैन ग्रुप द्वारा आयोजित कार्यक्रम में टाटा ट्रस्ट, अडानी फाउंडेशन, रिलायंस फाउंडेशन, एचडीएफसी फाउंडेशन समेत कई प्रमुख संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने समावेशी…
लेखक: देवानंद सिंह*त्वरित टिप्पणी*राजनीतिक मर्यादा का गिरता स्तर चिंताजनकमर्यादा ही लोकतांत्रिक संस्कृति की पहचान होती हैदेश इस समय महंगाई, बेरोजगारी, तेल की बढ़ती कीमतों, किसानों और व्यापारियों की परेशानियों जैसे गंभीर मुद्दों से जूझ रहा है। जनता उम्मीद करती है कि सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर समाधान का रास्ता निकालेंगे, लेकिन दुर्भाग्य से राजनीतिक विमर्श का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति अब व्यक्तिगत हमलों और अभद्र भाषा तक पहुंच चुकी है।प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिए “गद्दार” जैसे शब्दों का प्रयोग राजनीतिक असहमति नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं को चोट पहुंचाने वाला व्यवहार माना…
काला सोना या हरा भविष्य? सिंगरौली अब दोनों का मेल सिखाएगा [सिंगरौली: जहाँ धरती कोयला उगलती है और फैसले रास्ता बनाते हैं] [सुप्रीम कोर्ट का ‘डेवलपमेंट फर्स्ट’ मंत्र – अडानी परियोजना को नई उड़ान] · प्रो. आरके जैन “अरिजीत” ऊर्जा और विकास की जटिल धारा में बहता सिंगरौली आज फिर सुर्खियों के शिखर पर है। यह वही क्षेत्र है जहाँ कोयले की परतों के नीचे आर्थिक आकांक्षाएँ और पर्यावरणीय प्रश्न साथ-साथ सांस लेते हैं। 21 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने अजय दुबे की याचिका विलंब के आधार पर खारिज की, जिसमें अडानी समूह की महान एनर्जन लिमिटेड (धीरौली कोल…
लेखक: ललित गर्ग वर्ष 2026 की गर्मी केवल एक मौसमीय घटना नहीं, बल्कि मानव सभ्यता के सामने खड़ी एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आई है। अप्रैल-मई के दौरान भारत सहित दक्षिण एशिया के अनेक हिस्सों में पड़ी रिकॉर्ड हीटवेव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जलवायु परिवर्तन अब भविष्य का संकट नहीं, वर्तमान की भयावह वास्तविकता है। दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और मध्य भारत के अनेक क्षेत्रों में तापमान 46 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। कई शहरों में बिजली की मांग ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। सड़कें सूनी दिखने लगीं, श्रमिकों का श्रम ठहरने लगा और बच्चों,…
