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    Home » यादें लौटकर नहीं आतीं: अतीत छोड़, वर्तमान में जिएं
    संपादकीय संवाद विशेष साहित्य

    यादें लौटकर नहीं आतीं: अतीत छोड़, वर्तमान में जिएं

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaMay 24, 2026No Comments3 Mins Read
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    यादें लौटकर नहीं आतीं
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    लेखक: इंद्र यादव

    ‘हम यादों के सहारे जी सकते हैं, लेकिन यादें लौट के नहीं आतीं।’ यह महज एक फिल्मी संवाद या किसी शायर की कल्पना नहीं है, बल्कि इंसानी जिंदगी का वो कड़वा सच है जिससे हर शख्स कभी न कभी रूबरू होता है। आज की इस भागती-दौड़ती, कंक्रीट की दुनिया में इस पंक्ति के मायने और गहरे हो जाते हैं।

    यादें: जिंदगी का सबसे बड़ा सहारा

    इंसान की फितरत है कि वह पीछे मुड़कर देखता है। जब वर्तमान धुंधला लगने लगे और भविष्य डराने लगे, तो इंसान अतीत की तिजोरी खोल लेता है।

    जब कोई अपना बिछड़ जाता है या वक्त बदल जाता है, तो पुरानी यादें ही जीने की वजह बनती हैं।

    बचपन के वो बेफिक्र दिन, दोस्तों के साथ बिताए वो पल, और त्योहारों की वो रौनक—ये सब वो पूंजी हैं जिसे कोई हमसे छीन नहीं सकता।

    हम अक्सर कहते हैं कि ‘यादें इंसान को जिंदा रखती हैं।’ लेकिन यहाँ एक बारीक और तीखा सवाल खड़ा होता है: क्या यादों के सहारे कटी जिंदगी वाकई एक मुकम्मल जिंदगी है

    कड़वी हकीकत: वक्त एकतरफा रास्ता है

    देखें तो यादों के सहारे जीना एक तरह का ‘इमोशनल ट्रैप’ (भावनात्मक जाल) भी है। सच्चाई यही है: आप बीते हुए कल की किसी एक शाम को भी दोबारा हूबहू जी नहीं सकते। वक्त का पहिया सिर्फ आगे घूमता है, पीछे नहीं।

    भ्रम का संसार

    यादें एक खूबसूरत साया हैं, लेकिन वे वर्तमान की भूख नहीं मिटा सकतीं। जो बीत गया, वह इतिहास है। उसे याद करके मुस्कुराया तो जा सकता है, लेकिन उसमें ठहरा नहीं जा सकता।

    ठहराव का खतरा: जो लोग सिर्फ यादों के भरोसे जीने लगते हैं, वे अक्सर अपने आज (वर्तमान) को बर्बाद कर लेते हैं। अतीत की गिरफ्त में रहने वाला इंसान भविष्य के नए अवसरों को देखने में नाकाम रहता है।

    आज की जरूरत: यादों का सम्मान, वर्तमान को कमान

    इस बात में कोई दोराय नहीं कि यादें लौटकर नहीं आएंगी। बचपन के वो दिन, वो पुराने दोस्त, वो पहला प्यार—सब कुछ वक्त की नदी में बह चुका है। तो फिर रास्ता क्या है।

    यादों को संदूक में रखें, बेडरुम में नहीं: पुरानी यादों को एक मीठी याद की तरह सहेज कर रखें, न कि उन्हें अपने आज पर हावी होने दें।

    नए पन्नों को लिखें: अगर पुरानी यादें इतनी खूबसूरत थीं, तो इसका मतलब है कि आपमें खूबसूरत पल जीने की काबिलियत है। आज कुछ ऐसा क्यों न किया जाए जो कल के लिए एक बेहतरीन याद बन जाए

    यादों के सहारे जिंदगी की गाड़ी को धक्का तो दिया जा सकता है, लेकिन सफर को मुकम्मल नहीं किया जा सकता। यादें लौटकर नहीं आएंगी—यह प्रकृति का क्रूर, मगर सबसे सच्चा नियम है। इस नियम को स्वीकार करने में ही भलाई है। अतीत को उसकी सही जगह (यादों में) रखिए और वर्तमान की कमान अपने हाथ में लीजिए, क्योंकि जिंदगी ‘था’ में नहीं, ‘है’ में चलती है।

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