सुंदरनगर पहुंची डालसा की मोबाइल वैन, स्कूली बच्चों को दी कानूनी अधिकारों की जानकारी
राष्ट्र संवाद संवाददाता, जमशेदपुर। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के 90 दिवसीय जागरूकता अभियान के तहत बुधवार को डालसा मोबाइल वैन सुंदरनगर पहुंची। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूली बच्चों और स्थानीय समुदाय को उनके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय नांदुप में आयोजित विशेष कार्यक्रम में बच्चों को कानून की बुनियादी बातों से परिचित कराया गया, जिससे उन्हें एक सुरक्षित और जागरूक नागरिक बनने में मदद मिल सके। यह अभियान न केवल बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज के हर वर्ग तक कानूनी जानकारी पहुंचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
यह 90 दिवसीय जागरूकता अभियान जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका लक्ष्य दूरदराज के क्षेत्रों तक कानूनी साक्षरता पहुंचाना है। अक्सर ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोग अपने अधिकारों और सरकारी योजनाओं से अनभिज्ञ रहते हैं, जिसके कारण उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या को दूर करने के लिए डालसा की यह मोबाइल वैन एक चलता-फिरता ज्ञान केंद्र बनकर सामने आई है। इसका मुख्य फोकस बच्चों पर है क्योंकि उन्हें बचपन से ही सशक्त बनाना भविष्य के लिए आवश्यक है।
डालसा मोबाइल वैन सुंदरनगर: जागरूकता का नया अध्याय
उत्क्रमित मध्य विद्यालय नांदुप में हुए कार्यक्रम में, लीगल एड डिफेंस काउंसिल की सदस्य योगिता कुमारी और डालसा के पीएलवी (पैरा लीगल वॉलंटियर) सदस्यों ने बच्चों को विभिन्न महत्वपूर्ण कानूनी विषयों पर जानकारी दी। बच्चों ने बड़े उत्साह और जिज्ञासा के साथ इस जानकारी को ग्रहण किया। उन्हें ऐसे विषयों से अवगत कराया गया जो उनके दैनिक जीवन में सीधे तौर पर प्रभाव डालते हैं और उन्हें संभावित खतरों से बचा सकते हैं। इस दौरान 60 से अधिक स्कूली बच्चों ने कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लिया और सवाल-जवाब सत्र में अपनी शंकाओं का समाधान किया।
कार्यक्रम के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर बच्चों को जागरूक किया गया, उनमें शामिल हैं:
- घरेलू हिंसा: बच्चों को इसके प्रकार और इससे बचाव के कानूनी उपायों के बारे में बताया गया। उन्हें यह समझाया गया कि कैसे वे ऐसे मामलों में मदद मांग सकते हैं।
- पॉक्सो एक्ट (POCSO Act): बच्चों को यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम की जानकारी दी गई, जिसमें “गुड टच-बैड टच” के बारे में स्पष्ट रूप से बताया गया। यह जानकारी बच्चों को अपने शरीर और सुरक्षा के प्रति सचेत रहने में मदद करती है।
- बाल विवाह और बाल श्रम: इन सामाजिक बुराइयों के खिलाफ कानूनों और इनके गंभीर परिणामों पर प्रकाश डाला गया। बच्चों को शिक्षा के महत्व और बाल श्रम के नुकसान समझाए गए।
- चाइल्ड प्रोटेक्शन और मानव तस्करी: बच्चों की सुरक्षा के लिए बने कानूनों और मानव तस्करी जैसे जघन्य अपराधों के प्रति जागरूक किया गया। उन्हें सिखाया गया कि संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट कैसे करें।
- नशा उन्मूलन: नशे के दुष्परिणामों और इससे बचने के तरीकों पर जोर दिया गया, जिससे बच्चे एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य का चुनाव कर सकें।
- सरकारी योजनाएं: बच्चों और उनके परिवारों के लिए उपलब्ध विभिन्न सरकारी योजनाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जानकारी भी प्रदान की गई।
समुदाय तक कानूनी जागरूकता का विस्तार
यह जागरूकता अभियान केवल विद्यालयों तक ही सीमित नहीं रहा। डालसा मोबाइल वैन सुंदरनगर और उसके आसपास के विभिन्न सार्वजनिक स्थानों पर भी पहुंची, ताकि अधिक से अधिक लोगों को कानूनी जानकारी मिल सके। इस अभियान के तहत करनडीह ब्लॉक परिसर स्थित आधार केंद्र, करनडीह चौक, सुंदरनगर यात्री पड़ाव, तुरामडीह और कुदादा जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर भी लोगों को विधिक जागरूकता संबंधी जानकारी दी गई। इन स्थानों पर स्थानीय निवासियों, दुकानदारों और राहगीरों को रोककर उन्हें कानूनी सहायता प्राप्त करने के तरीकों और उनके मौलिक अधिकारों से अवगत कराया गया।
एक स्थानीय निवासी, राजेश कुमार ने कहा, “यह बहुत अच्छी पहल है। हमें अपने बच्चों को इन बातों की जानकारी देनी चाहिए, लेकिन कई बार हमें खुद पूरी जानकारी नहीं होती। डालसा की टीम ने बहुत सरल भाषा में समझाया, जिससे हम सभी को फायदा हुआ है।” इस तरह के सीधे संवाद से लोगों में विश्वास पैदा होता है और वे अपनी समस्याओं के लिए कानूनी सहायता लेने को प्रेरित होते हैं। डालसा का यह प्रयास सुनिश्चित करता है कि न्याय केवल न्यायालयों तक ही सीमित न रहे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक भी पहुंचे।
यह अभियान लोगों को सशक्त बनाने और उन्हें न्याय तक पहुंच प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) का मुख्य उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करना है, ताकि कोई भी व्यक्ति आर्थिक या अन्य अक्षमताओं के कारण न्याय से वंचित न रहे। ऐसे अभियानों के माध्यम से लोगों में कानूनी साक्षरता बढ़ती है और वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो पाते हैं। आप कानूनी सहायता और अधिकारों के बारे में अधिक जानकारी के लिए राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की वेबसाइट पर जा सकते हैं।
डालसा की यह पहल दर्शाती है कि कानूनी जागरूकता एक सतत प्रक्रिया है, और इसे प्रभावी बनाने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे। भविष्य में भी ऐसे ही अभियान जारी रखने की योजना है, ताकि जमशेदपुर और आसपास के सभी क्षेत्रों में कानूनी साक्षरता का स्तर बढ़े और हर नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति पूरी तरह से सजग हो सके। यह वास्तव में जमीनी स्तर पर बदलाव लाने का एक सार्थक प्रयास है।

