Author: Devanand Singh

लेखक: ललित गर्गबांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिसंबर 2026 में स्वदेश लौटने की घोषणा केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति, लोकतांत्रिक मूल्यों और भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा तय करने वाला एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम बन गया है। जिस समय बांग्लादेश की राजनीति सत्ता परिवर्तन, वैचारिक धु्रवीकरण और संस्थागत अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, उसी समय शेख हसीना ने यह घोषणा कर राजनीतिक विमर्श को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।भारत-बांग्लादेश संबंधों की नई परीक्षाउनका यह कहना कि ‘गिरफ्तारी, जेल या मृत्यु का भय भी उन्हें अपने देश लौटने…

Read More

लेखक: मृत्युंजय बर्मनविश्व आदिवासी दिवस : 9 अगस्त की सियासतझारखंड की राजनीति में 9 अगस्त इस बार सिर्फ विश्व आदिवासी दिवस नहीं रहेगा। उसी दिन से केंद्र का ‘हर घर तिरंगा’ अभियान भी शुरू होगा और राज्य में भाजपा तिरंगा यात्रा के जरिए राष्ट्रवाद का संदेश देगी। दूसरी ओर झामुमो विश्व आदिवासी दिवस के मंच से आदिवासी अस्मिता, पहचान और अधिकार की अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करेगा। एक ही दिन दो प्रतीक आमने सामने होंगे, आदिवासी अस्मिता और राष्ट्रवाद।यहां तारीख का महत्व समझना जरूरी है। विश्व आदिवासी दिवस कोई राजनीतिक दल द्वारा तय किया गया अवसर नहीं है। संयुक्त…

Read More

राष्ट्र संवाद संवाददाता, गम्हरिया। झारखंड दौरे के क्रम में सरायकेला-खरसावां पहुंचे भारतीय गैर सरकारी शिक्षक संघ (इप्टा) के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डॉ. लोकेश कुमार झा का गम्हरिया में भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान संस्था के सदस्यों द्वारा गम्हरिया स्थित होटल एवेन्यू में समारोह आयोजित कर उन्हें फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. परमानंद मोदी की अध्यक्षता में कोर कमिटी की एक बैठक हुई। बैठक को संबोधित करते राष्ट्रीय संगठन मंत्री ने कहा कि देश और समाज के निर्माण में निजी शिक्षकों का योगदान अतुलनीय है। लेकिन इसके बावजूद वे अपने मूलभूत अधिकारों से वंचित…

Read More

लेखक: प्रो. आरके जैन “अरिजीत”संस्कारों से खाली होती नई पीढ़ी का सबसे दर्दनाक सच आज हमारे सामने है। [चिता पर लकड़ियाँ कम, रिश्ते अधिक जल रहे थे] [क्या सचमुच हम अब अपने माता-पिता के उत्तराधिकारी हैं?]समाज की संवेदनहीनता: एक खुला घावसमाज की संवेदनहीनता अब कोई छिपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि खुले घाव की तरह फैल रही है। जब कोई पिता, जिसने अपनी जवानी के सपने कुचलकर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया, बुढ़ापे में सोनीपत के वृद्धाश्रम की चारदीवारी में अंतिम सांस लेता है और उसकी संतानें अंतिम संस्कार में शरीर से नहीं, केवल पैसों या स्क्रीन से जुड़ती हैं, तब यह…

Read More

लेखक: देवानंद सिंहअयोध्या का राम मंदिर करोड़ों भारतीयों की आस्था, विश्वास और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे में जब मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि को लेकर विवाद सामने आया, तो स्वाभाविक रूप से देशभर में चर्चा तेज हुई। अब सरकार ने स्पष्ट किया है कि 3,300 करोड़ रुपये के चंदे में किसी प्रकार का वित्तीय घोटाला नहीं हुआ है। सरकार के अनुसार, पूरा हिसाब-किताब ऑडिट के दायरे में है, सभी भुगतान बैंकिंग माध्यम से हुए हैं और विवाद केवल नकदी की गिनती के दौरान हुई चोरी तक सीमित है।वित्तीय घोटाला नहीं हुआ है: सरकार का दावासरकार का…

Read More

लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताजिंदल स्टील के संस्थापक को दी गई श्रद्धांजलिअंगुल, 7 अगस्त: जिंदल स्टील, अंगुल ने अपने संस्थापक श्री ओ.पी. जिंदल (बाऊजी) की 96वीं जयंती सामाजिक सरोकारों और खेल गतिविधियों के साथ श्रद्धापूर्वक मनाई। इस अवसर पर ‘ओ.पी. जिंदल फुटबॉल टूर्नामेंट-2026’ का शुभारंभ किया गया तथा विभिन्न सेवा कार्य आयोजित किए गए।जिंदल स्टील के एमडी ने साझा किया विजनकार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिंदल स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर वी.आर. शर्मा ने कहा कि बाऊजी ने एक छोटी पाइप निर्माण इकाई से शुरुआत कर देश के प्रमुख स्टील उद्योग की नींव रखी। उन्होंने रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भर भारत…

Read More

समाधि के फूल—————–मेरी मृत्यु के दिनतुम सिसक-सिसक कर मत रोना,मैं अब और तुम्हें परेशान नहीं करूँगी।मेरी परिचित हवा की बयार से पूछोगे,तो तुम्हें पता चल जाएगा मेरी अंतिम यात्रा का हाल।आधी रात तक जगकरप्रेम, कोमलता और कविताओं से खेल खेलने के लिए,मैं अब और तुम्हें परेशान नहीं करूँगी।जीवन की दहकती आग में हाथ सेंककरमेरे लिए तुम दुखी मत होना,सिसक-सिसक कर मत रोना तुम।जैसे सागर अपनी लहरों को समेट कर रखता है,वैसे ही अपने दुखों को समेट कर रख लेना।मेरी पुरानी अलमारी मेंदिल के दर्द के साथ स्मृतियाँ ढूँढकररोने का बिलखता स्वर मत उठाना तुम,सीने के भीतर हाहाकार करवेदना से अपना…

Read More

लेखक: प्रो. आरके जैन “अरिजीत”समाज की संवेदनहीनता अब कोई छिपी हुई बीमारी नहीं, बल्कि खुले घाव की तरह फैल रही है। जब कोई पिता, जिसने अपनी जवानी के सपने कुचलकर बेटियों को आत्मनिर्भर बनाया, बुढ़ापे में सोनीपत के वृद्धाश्रम की चारदीवारी में अंतिम सांस लेता है और उसकी संतानें अंतिम संस्कार में शरीर से नहीं, केवल पैसों या स्क्रीन से जुड़ती हैं, तब यह घटना एक परिवार की नहीं, पूरे युग की कहानी बन जाती है। शिवचरण गुप्ता जैसे पिता की चिता के सामने खड़े समाजसेवियों के कंधे बताते हैं कि रिश्ते अब खून से नहीं, सुविधा से तय होते…

Read More

लेखक: अमन कुमार शांडिल्यसंसद के मानसून सत्र के अब केवल कुछ दिन शेष हैं, लेकिन सदन के भीतर जितनी चर्चा विधेयकों को लेकर होनी चाहिए, उससे कहीं अधिक देश का राजनीतिक विमर्श युवाओं और छात्रों के इर्द-गिर्द घूमता दिख रहा है। यह संयोग नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों का संकेत है।युवाओं और छात्रों: राजनीति का नया केंद्रप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युवाओं को भारत का भविष्य बता रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत नई पीढ़ी को ईमानदार और अधिक राष्ट्रनिष्ठ बता रहे हैं। राहुल गांधी भी छात्रों के मुद्दों पर खुलकर बोल रहे हैं और सरकारों से उनकी आवाज…

Read More

राष्ट्र संवाद संवाददाता जादूगोड़ा/घाटशिला: यूरेनियम नगरी के नाम से पहचान रखने वाले जादूगोड़ा और घाटशिला अनुमंडल में मिलावटी खाद्य पदार्थों की बिक्री को लेकर लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बाजार में नकली खाद्य तेल, घी और मसालों की खुलेआम बिक्री हो रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। स्थानीय चिकित्सक डॉ. संजय कुमार के अनुसार, मिलावटी खाद्य पदार्थों के लगातार सेवन से लीवर, किडनी और पेट संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। उन्होंने लोगों को अत्यधिक सस्ते तेल और चमकीले रंग वाले मसालों से बचने…

Read More