Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » मुख्यमंत्री मातृ-वियोग में, इधर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
    Breaking News Headlines उत्तर प्रदेश खबरें राज्य से झारखंड पश्चिम बंगाल बिहार मुंबई राजनीति राष्ट्रीय शिक्षा

    मुख्यमंत्री मातृ-वियोग में, इधर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

    Devanand SinghBy Devanand SinghOctober 17, 2026No Comments4 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    मुख्यमंत्री मातृ-वियोग में, इधर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

    108 एम्बुलेंसकर्मियों की हड़ताल ने खोली सिस्टम की पोल

    देवानंद सिंह
    झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी माता रूपी सोरेन के निधन के बाद पैतृक गांव नेमरा में पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन कर रहे हैं। इस कठिन समय में मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन की सादगी, पारिवारिक एकजुटता और संस्कारों के प्रति प्रतिबद्धता संवेदनशीलता का परिचय देती है। लेकिन इसी झारखंड में दूसरी ओर स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर सवाल खड़ा हो रहा है—जब मरीजों की जिंदगी बचाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा के कर्मचारी ही आंदोलन और हड़ताल पर उतर आएं, तो सरकार की प्राथमिकताएं और प्रशासनिक जवाबदेही कहां ठहरती हैं?

    राज्यभर के 108 एम्बुलेंसकर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर 40 घंटे की हड़ताल शुरू की है। बर्खास्त कर्मचारियों की बहाली, लंबित वेतन का भुगतान, न्यूनतम वेतन, ईपीएफ-ईएसआईसी, ओवरटाइम और ग्रेच्युटी जैसे अधिकारों की मांग को लेकर कर्मचारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन मुख्यालय, नामकुम के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 21 अक्टूबर 2026 से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी।
    यह केवल कर्मचारियों और एजेंसी के बीच का विवाद नहीं है। यह सीधे तौर पर आम जनता, गरीब मरीजों, गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं पर निर्भर लोगों के जीवन से जुड़ा मामला है। राज्य में लगभग 543 एम्बुलेंस मरीजों की सेवा में लगी हैं, जिनमें करीब 500 का परिचालन सम्मान फाउंडेशन के जिम्मे है। ऐसे में सेवा बाधित होने का अर्थ है कि संकट की घड़ी में जरूरतमंदों को समय पर सहायता मिलने का भरोसा कमजोर होना।
    सबसे गंभीर पहलू यह है कि कर्मचारी संघ का दावा है कि आंदोलन की सूचना पहले ही संबंधित एजेंसी, स्वास्थ्य विभाग और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को दे दी गई थी। यदि यह दावा सही है, तो सवाल उठता है कि समय रहते वार्ता कर समाधान निकालने की कोशिश क्यों नहीं हुई? क्या सरकार और संबंधित एजेंसी किसी बड़े संकट के इंतजार में थीं? क्या कर्मचारियों की समस्याओं को तब तक नजरअंदाज किया जाता रहेगा, जब तक वे सड़क पर उतरकर सेवा बाधित करने को मजबूर न हो जाएं?

    मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के लिए यह परिस्थिति प्रशासनिक दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। मातृ-वियोग के इस कठिन दौर में उनके प्रति संवेदना स्वाभाविक है और पारिवारिक रीति-रिवाजों के निर्वहन का उनका अधिकार भी सम्मान के योग्य है। लेकिन राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा संकट ऐसा विषय है, जिस पर सरकार की ओर से समयबद्ध हस्तक्षेप आवश्यक है। मुख्यमंत्री को व्यक्तिगत रूप से हर मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं, लेकिन शासन की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि किसी भी विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को न भुगतना पड़े।
    सरकार को तत्काल कर्मचारी प्रतिनिधियों और संबंधित एजेंसी के साथ वार्ता कर विवाद के वास्तविक कारणों का पता लगाना चाहिए। वेतन और वैधानिक सुविधाओं से जुड़े दावों की जांच होनी चाहिए, बर्खास्त कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा की जानी चाहिए और 108 एम्बुलेंस सेवा को निर्बाध रखने के लिए ठोस वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। साथ ही, 21 अक्टूबर से प्रस्तावित अनिश्चितकालीन हड़ताल को रोकने के लिए बातचीत का रास्ता समय रहते अपनाना होगा।

    सवाल सिर्फ 108 एम्बुलेंसकर्मियों का नहीं, बल्कि झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही का है। मुख्यमंत्री का पारिवारिक दुख अपनी जगह है, कर्मचारियों की मांगें अपनी जगह और मरीजों की जिंदगी अपनी जगह। इन तीनों के बीच सरकार को ऐसा समाधान निकालना होगा, जिसमें न कर्मचारियों के अधिकारों की अनदेखी हो और न आम जनता की चिकित्सा सुरक्षा से समझौता।

    क्योंकि किसी भी सरकार की असली परीक्षा मंचों से दिए गए भाषणों या जारी किए गए बयानों से नहीं, बल्कि संकट के समय आम नागरिक को मिलने वाली सुविधा से होती है। झारखंड की जनता अब यही जानना चाहती है कि जब जीवन बचाने वाली एम्बुलेंस सेवा ही विवादों में घिर जाए, तो जवाबदेही आखिर किसकी होगी?

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleवोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान में बन्ना गुप्ता को बड़ी जिम्मेदारी, AICC पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को मंजू

    Related Posts

    वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान में बन्ना गुप्ता को बड़ी जिम्मेदारी, AICC पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को मंजू

    October 17, 2026

    सुप्रीम कोर्ट का सरकार से सवाल: मरीजों को दवाओं की कीमतों के खेल से कब मिलेगी मुक्ति?

    October 17, 2026

    समाज के कर्णधारों की चाटुकारिता और जन-मानस का दूषितीकरण—

    October 17, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    मुख्यमंत्री मातृ-वियोग में, इधर स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल

    वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान में बन्ना गुप्ता को बड़ी जिम्मेदारी, AICC पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को मंजू

    सुप्रीम कोर्ट का सरकार से सवाल: मरीजों को दवाओं की कीमतों के खेल से कब मिलेगी मुक्ति?

    समाज के कर्णधारों की चाटुकारिता और जन-मानस का दूषितीकरण—

    सुप्रीम कोर्ट के आवश्यक न्यायिक फैसलों के उजाले

    सरयू राय ने रूपी सोरेन को दी श्रद्धांजलि, मुख्यमंत्री से मिलकर जताई संवेदना

    दुर्गोत्सव हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और अटूट आस्था का प्रतीक है : काले

    दुर्गापूजा के बीच 108 एंबुलेंस कर्मियों की चेतावनी, 21 से ठप कर सकते हैं सेवा

    कैकेयी-दशरथ संवाद और राम वन गमन का भावपूर्ण मंचन, साकची मैदान में उमड़े श्रद्धालु

    पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता एवं मानगो मेयर सुधा गुप्ता ने जमशेदपुर के विभिन्न पूजा पंडालों का किया उद्

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.