दुर्गापूजा के बीच 108 एंबुलेंस कर्मियों की चेतावनी, 21 से ठप कर सकते हैं सेवा
मंत्री से वार्ता के बाद भी आंदोलन जारी; बकाया वेतन और श्रमिक अधिकारों पर अड़े कर्मचारी
मृत्युंजय बर्मन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
दुर्गापूजा के व्यस्त समय में झारखंड की 108 एंबुलेंस सेवा को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। लंबित वेतन और अन्य मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे एंबुलेंस कर्मियों ने 21 अक्टूबर से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। शुक्रवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी और विभागीय अधिकारियों के साथ कर्मचारियों की वार्ता हुई, लेकिन सभी मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।
वार्ता के दौरान विभाग की ओर से 17 अक्टूबर तक बकाया वेतन भुगतान का आश्वासन दिया गया। नौकरी से हटाए गए 20 कर्मचारियों की बहाली का निर्देश भी दिया गया। इसके बावजूद झारखंड प्रदेश एंबुलेंस कर्मचारी संघ ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार किया है। संघ का कहना है कि केवल आश्वासन से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा।
*संचालन व्यवस्था पर सरकार और संघ आमने-सामने*
कर्मचारी चाहते हैं कि 108 एंबुलेंस सेवा का संचालन जिला स्तर पर सिविल सर्जन के माध्यम से हो। वहीं, स्वास्थ्य मंत्री ने मौजूदा एजेंसी को बदलकर नई एजेंसी लाने की बात कही है, लेकिन सिविल सर्जन के माध्यम से संचालन की मांग स्वीकार नहीं की। इस मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है।
संघ की प्रमुख मांगों में बकाया मानदेय का भुगतान, बर्खास्त कर्मियों की बहाली, न्यूनतम मजदूरी, ईपीएफ, ईएसआई, ओवरटाइम और अन्य वैधानिक सुविधाएं सुनिश्चित करना शामिल है। कर्मचारियों का आरोप है कि पहले भी समाधान का आश्वासन मिला था, लेकिन उनकी समस्याएं दूर नहीं हुईं।
अब 17 अक्टूबर तक भुगतान के आश्वासन के क्रियान्वयन पर सबकी नजर है। यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो 21 अक्टूबर से प्रस्तावित हड़ताल का असर राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है।

