जमशेदपुर को स्वच्छता में अव्वल बनाने का संकल्प के साथ स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के शिक्षा प्रतिनिधि एसपी सिंह ने नागरिकों से शहर को स्वच्छ और विकसित बनाने का आह्वान किया। जमशेदपुर को स्वच्छता में अव्वल बनाने का संकल्प: सामूहिक प्रयास की आवश्यकता जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के शिक्षा प्रतिनिधि एसपी सिंह ने कहा कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी शहरों में यूटिलिटी सर्विसेज पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो सकी हैं। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक और महत्वपूर्ण शहर में भी स्वच्छता और पेयजल उपलब्धता जैसी बुनियादी समस्याएं आज गंभीर मुद्दा…
Author: Devanand Singh
जमशेदपुर। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय के शिक्षा प्रतिनिधि एसपी सिंह ने कहा कि आजादी के 80 वर्ष बाद भी शहरों में यूटिलिटी सर्विसेज पूरी तरह व्यवस्थित नहीं हो सकी हैं। जमशेदपुर जैसे औद्योगिक और महत्वपूर्ण शहर में भी स्वच्छता और पेयजल उपलब्धता जैसी बुनियादी समस्याएं आज गंभीर मुद्दा बनी हुई हैं। प्रशासन को इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए प्राथमिकता के साथ काम करना चाहिए। स्वच्छता और पेयजल उपलब्धता: प्रमुख मुद्दा एसपी सिंह शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बिष्टुपुर में झंडोत्तोलन के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश आजादी के…
लेखक: ललित गर्ग15 अगस्त भारत के राष्ट्रीय जीवन का वह गौरवपूर्ण दिन है, जब हमारी धरती ने पराधीनता की लंबी रात के बाद स्वतंत्रता का सूर्य देखा था। 2026 में हम स्वतंत्रता का 80वां दिवस मना रहे हैं। यह केवल अतीत के गौरव को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन करने का भी समय है कि जिन सपनों के लिए असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था, उन सपनों को हमने कितना साकार किया और अब 2047 में स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को कैसा बनाना है। 1947 ने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता दी थी, लेकिन…
लेखक: ललित गर्ग15 अगस्त भारत के राष्ट्रीय जीवन का वह गौरवपूर्ण दिन है, जब हमारी धरती ने पराधीनता की लंबी रात के बाद स्वतंत्रता का सूर्य देखा था। 2026 में हम स्वतंत्रता का 80वां दिवस मना रहे हैं। यह केवल अतीत के गौरव को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन करने का भी समय है कि जिन सपनों के लिए असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था, उन सपनों को हमने कितना साकार किया और अब 2047 में स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को कैसा बनाना है। 1947 ने हमें राजनीतिक स्वतंत्रता दी थी, लेकिन…
लेखक: देवानंद सिंह स्वतंत्रता दिवस का महत्व और झारखंड की चुनौतियां 15 अगस्त हमारे लिए केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह वह दिन है जब भारत ने औपनिवेशिक शासन की लंबी गुलामी से निकलकर अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करने का अधिकार हासिल किया था। यह आजादी लाखों लोगों के संघर्ष, त्याग, सत्याग्रह और बलिदान का परिणाम थी। इसलिए स्वतंत्रता दिवस का उत्सव केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और शुभकामनाएं देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह दिन हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि लोकतंत्र ने आम नागरिक को क्या दिया है और लोकतंत्र को मजबूत बनाए…
लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाताजमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है जो सीधे उनकी रसोई और स्वास्थ्य से जुड़ा है। रसोई घरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्र संवाद की विशेष पड़ताल में पता चला है कि प्रतिष्ठित ब्रांड हाथी तेल के नाम पर बाजार में धड़ल्ले से नकली तेल खपाया जा रहा है। यह खेल केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि सरायकेला से लेकर पूर्वी सिंहभूम तक एक संगठित नेटवर्क के रूप में फैला हुआ है। डिपो रेट से…
लेखक: ललित गर्गआत्मनिर्भरता से विकसित भारत की दिशा में 2026 का स्वतंत्रता दिवस एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जहां हम 2047 के विकसित भारत के संकल्प को दोहराते हैं।15 अगस्त भारत के राष्ट्रीय जीवन का वह गौरवपूर्ण दिन है, जब हमारी धरती ने पराधीनता की लंबी रात के बाद स्वतंत्रता का सूर्य देखा था। 2026 में हम स्वतंत्रता का 80वां दिवस मना रहे हैं। यह केवल अतीत के गौरव को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि यह आत्ममंथन करने का भी समय है कि जिन सपनों के लिए असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया था, उन सपनों को हमने…
लेखक: आशीष कुमार त्रिवेदीभारत के स्वतंत्रता संग्राम में उत्तर बिहार के छोटे-छोटे गांवों का योगदान अतुलनीय है, और इसी कड़ी में तरियानी छपरा का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। यह गांव न केवल भौगोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि 1942 की अगस्त क्रांति में यहां के वीरों ने जिस शौर्य का परिचय दिया, वह अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाने के लिए पर्याप्त था। आज हम उस ऐतिहासिक घटना का स्मरण कर रहे हैं जिसने तरियानी छपरा को शहादत की धरती बना दिया।तरियानी छपरा की धरती पर लिखी गई आजादी की अमर गाथाजब भारत की आजादी का इतिहास लिखा जाता…
लेखक: देवानंद सिंह15 अगस्त हमारे लिए केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह वह दिन है जब भारत ने औपनिवेशिक शासन की लंबी गुलामी से निकलकर अपने भविष्य का निर्णय स्वयं करने का अधिकार हासिल किया था। यह आजादी लाखों लोगों के संघर्ष, त्याग, सत्याग्रह और बलिदान का परिणाम थी। इसलिए स्वतंत्रता दिवस का उत्सव केवल तिरंगा फहराने, राष्ट्रगान गाने और शुभकामनाएं देने तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह दिन हमें आत्ममंथन का अवसर देता है कि लोकतंत्र ने आम नागरिक को क्या दिया है और लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखने के लिए हमारी जिम्मेदारियां क्या हैं।स्वतंत्रता दिवस: झारखंड…
लेखक: आशीष कुमार त्रिवेदी तरियानी छपरा की धरती पर लिखी गई आजादी की अमर गाथा जब भारत की आजादी का इतिहास लिखा जाता है, तो उसमें दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के साथ-साथ उत्तर बिहार के उन गांवों का भी स्मरण होना चाहिए, जहां किसानों, मजदूरों और युवाओं ने अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी थी। शिवहर का तरियानी छपरा ऐसी ही शहादत की धरती है, जहां 1942 की अगस्त क्रांति में देश की आजादी के लिए कई वीरों ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। जब गांवों से उठी बगावत की आवाज 9 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के ‘अंग्रेजों भारत…
