जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है जो सीधे उनकी रसोई और स्वास्थ्य से जुड़ा है। रसोई घरों में रोजाना इस्तेमाल होने वाले सरसों तेल की शुद्धता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राष्ट्र संवाद की विशेष पड़ताल में पता चला है कि प्रतिष्ठित ब्रांड हाथी तेल के नाम पर बाजार में धड़ल्ले से नकली तेल खपाया जा रहा है। यह खेल केवल एक दुकान तक सीमित नहीं है, बल्कि सरायकेला से लेकर पूर्वी सिंहभूम तक एक संगठित नेटवर्क के रूप में फैला हुआ है। डिपो रेट से कम कीमत पर तेल की बिक्री इस गोरखधंधे का सबसे बड़ा संकेत है। खाद्य तेल जैसी आवश्यक वस्तु में मिलावट न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह आम आदमी के स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है। सरसों तेल में मिलावट के कारण हार्ट अटैक, कोलेस्ट्रॉल बढ़ना और पाचन संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। कोल्हान क्षेत्र के लाखों परिवार अनजाने में इस नकली तेल का सेवन कर रहे हैं। इस खुलासे के बाद से स्थानीय प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग पर दबाव बढ़ गया है कि वे तत्काल कार्रवाई करें। उपभोक्ता संगठनों ने भी इस मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग उठाई है।
जादूगोड़ा :आपके रसोई में इस्तेमाल होने वाला “हाथी ब्रांड कच्ची घानी सरसों तेल” असली है या नकली? राष्ट्र संवाद की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि कोल्हान के सरायकेला से पूर्वी सिंहभूम तक हाथी तेल के नाम पर नकली और सस्ते तेल का बड़ा खेल चल रहा है।
डिपो रेट ₹185 प्रति लीटर होने के बावजूद बाजार में यही तेल ₹171 से ₹175 में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। ₹10-14 का यह मूल्य अंतर ही सबसे बड़ा सबूत है कि कुछ तो गड़बड़ है।
प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती: हाथी तेल का अनाधिकृत नेटवर्क
हाथी तेल के एरिया सेल्स मैनेजर रामाधार मिश्रा और मिल व डिपो मालिक राघव भगत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती पूरे कोल्हान में फैले अनाधिकृत विक्रेताओं के नेटवर्क को तोड़ना है।
सरायकेला के हाथी तेल के सबसे बड़े थोक विक्रेता हैं टोनी चौधरी और जमशेदपुर परसुडी मंडी में भी कई लोग इसके थोक विक्रेता है का सवाल है कि डिपो और थोक विक्रेताओं का रेट में भारी अंतर होने से हम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है रोजाना दुकान में ग्राहक के साथ बहस हो रही है लोग नकली असली को लेकर काफी संकित है
सूत्रों के अनुसार, जैसे ही इस गड़बड़ी की खबर बाहर आई, कई व्यापारियों ने रातों-रात नकली माल ठिकाने लगाना शुरू कर दिया। इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक-दो दुकान का नहीं, बल्कि एक संगठित रैकेट का है।
उपभोक्ता और कंपनी दोनों को नुकसान
- उपभोक्ता के स्वास्थ्य से खिलवाड़: नकली तेल सेहत के लिए बेहद खतरनाक है।
- कंपनी की साख पर बट्टा: असली हाथी तेल की ब्रांड वैल्यू गिर रही है।
- राजस्व का नुकसान: टैक्स चोरी कर सरकार और कंपनी दोनों को चूना लगाया जा रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर उपभोक्ता हाथी तेल प्रबंधन से मांग करता है:
- अनाधिकृत विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक की जाए
- दोषियों पर एफआईआर और सख्त कानूनी कार्रवाई हो
- बाजार में हर स्तर पर जांच अभियान चलाया जाए
कोल्हान के लाखों उपभोक्ता अब जवाब मांग रहे हैं – हमारी थाली तक पहुंचने वाला तेल असली है या नकली
खुदरा विक्रेता संघ ने मांग किया है कि डिपो का रेट को भी संतुलित किया जाए जिससे लोगों को भ्रम ना हो वही सरायकेला से ही पूर्वी सिंहभूम जिला के कई थोक विक्रेता के द्वारा हाथी तेल मंगवाया जाता है खुदरा विक्रेता संघ ने हाथी तेल का जांच पड़ताल करवाने की भी मांग की है जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो सके।
उपभोक्ता खाद्य सुरक्षा मानकों के बारे में FSSAI की वेबसाइट पर जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस पूरे प्रकरण ने उपभोक्ताओं के भरोसे को हिलाकर रख दिया है। जहां एक ओर लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं, वहीं दूसरी ओर असली कारोबारियों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग से उम्मीद की जाती है कि वे तत्काल संज्ञान लेकर छापेमारी अभियान चलाएं। दोषियों पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ अधिकृत विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक करना समय की मांग है। तभी जाकर आम जनता की थाली तक शुद्ध तेल पहुंचना सुनिश्चित हो सकेगा। उपभोक्ताओं को भी सलाह दी जाती है कि वे केवल अधिकृत डीलरों से ही खरीदारी करें और बिल अवश्य लें। हाथी तेल जैसे प्रतिष्ठित ब्रांड की साख बचाने के लिए प्रबंधन को भी पारदर्शी कदम उठाने होंगे। उन्हें अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा और अनाधिकृत विक्रेताओं पर नकेल कसनी होगी। सरकार को भी खाद्य तेल बाजार में पारदर्शिता लाने के लिए सख्त नियम बनाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। जन जागरूकता ही मिलावटखोरी के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है।


