सोना देवी विश्वविद्यालय में उत्साह से मना 80वां स्वतंत्रता दिवस, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा- राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलें
राष्ट्र संवाद संवाददाता
घाटशिला, 15 अगस्त। सोना देवी विश्वविद्यालय, घाटशिला में 80वां स्वतंत्रता दिवस देशभक्ति और उत्साह के साथ मनाया गया। समारोह में कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने झंडोत्तोलन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि हमारी मातृभूमि है। प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हुए संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से ‘राष्ट्र प्रथम’ के सिद्धांत पर चलने का आह्वान किया।
कुलाधिपति ने कहा कि स्वतंत्रता अनेक बलिदानों के बाद मिली है। युवा वर्ग पर विकसित भारत के निर्माण की बड़ी जिम्मेदारी है। देशभक्ति का वास्तविक अर्थ जिम्मेदार नागरिक बनना और समाज व राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन करना है।
विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ब्रज मोहन पत पिंगुआ ने कहा कि लाखों कुर्बानियों के बाद देश को आजादी मिली है। भारत कई क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बन चुका है, हालांकि तकनीक के क्षेत्र में अभी काफी कार्य किया जाना बाकी है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी ज्ञान हासिल कर बाजार की जरूरतों के अनुरूप नए उत्पाद तैयार करने और ईमानदारी से कार्य करने का आह्वान किया।

कुलसचिव डॉ. नित नयना ने कहा कि सामाजिक समरसता बनाए रखते हुए देश के विकास में ईमानदारी से योगदान देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। समारोह में विद्यार्थियों ने देशभक्ति पर आधारित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बी.फार्मा के विद्यार्थी संदीप सिंह देव ने संवैधानिक मूल्यों के पालन की आवश्यकता पर विचार रखे, जबकि छात्रा मौसमी महतो ने देशभक्ति गीत पर नृत्य प्रस्तुत किया। छात्रा दीपा कुमारी ने समानता, स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार को गरिमापूर्ण वातावरण में सुनिश्चित करने की बात कही।
बांग्ला विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने हिंदी में देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर 30 जून को आयोजित हूल दिवस निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं अंकित कुमार, संजना मुंडा, लक्ष्मी मुर्मू और सीमा महतो को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में सिस्टर निवेदिता यूनिवर्सिटी के प्रो. राणा मजुमदार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों से समाज के प्रति सकारात्मक योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सफलता का वास्तविक अर्थ यह है कि व्यक्ति अपने समाज के लिए कितना योगदान देता है।
फार्मेसी विभाग में महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित औषधि का संदेश
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सोना देवी विश्वविद्यालय के एसडीयू स्कूल ऑफ फार्मेसी में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। समारोह की थीम “स्वस्थ राष्ट्र के लिए महिला सशक्तिकरण—सुरक्षित औषधि, बेहतर स्वास्थ्य” रही। कार्यक्रम में महिला स्वास्थ्य, सुरक्षित एवं तर्कसंगत औषधि उपयोग तथा जनस्वास्थ्य में फार्मासिस्ट की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।
कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता केवल राजनीतिक आजादी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, सम्मान, स्वास्थ्य और आत्मनिर्भरता उपलब्ध कराने की निरंतर प्रतिबद्धता है। महिलाओं को शिक्षा, स्वास्थ्य और निर्णय लेने के अवसर देकर सशक्त बनाना मजबूत एवं विकसित राष्ट्र के लिए आवश्यक है।
कुलपति डॉ. ब्रज मोहन पत पिंगुआ ने कहा कि फार्मेसी विद्यार्थियों पर समाज के स्वास्थ्य की रक्षा की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्हें सुरक्षित औषधि उपयोग, रोगी देखभाल और जनस्वास्थ्य के प्रति अपने दायित्व को प्राथमिकता देनी चाहिए।
कुलसचिव डॉ. नित नयना ने महिला सशक्तिकरण और बेहतर स्वास्थ्य को एक-दूसरे से जुड़ा बताते हुए स्वास्थ्य जागरूकता तथा गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को स्वस्थ भारत की आधारशिला बताया।
एसडीयू स्कूल ऑफ फार्मेसी के प्राचार्य सुधांशु शांडिल्य ने कहा कि फार्मासिस्ट की भूमिका अब केवल औषधि निर्माण और वितरण तक सीमित नहीं है। रोगी परामर्श, औषधि सुरक्षा, स्वास्थ्य जागरूकता और रोगों की रोकथाम में भी फार्मासिस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम में सहायक प्राध्यापिका हर्षा वर्मा, सहायक प्राध्यापक किशोर कुमार महाकुड़ और सहायक प्राध्यापिका उमा महतो ने भी विद्यार्थियों को महिला स्वास्थ्य, सुरक्षित औषधि उपयोग, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रसेवा के प्रति जागरूक किया।
बी.फार्मा एवं डी.फार्मा के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए महिला सशक्तिकरण, सुरक्षित औषधि, स्वास्थ्य जागरूकता और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेश प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय ने फार्मेसी शिक्षा को जनस्वास्थ्य, महिला स्वास्थ्य, औषधि सुरक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ने की प्रतिबद्धता दोहराई।

