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    Home » अभिनव सिंह का ‘फेक दबदबा’: पुलिस के घेरे में खुला राज
    Breaking News Headlines अपराध राष्ट्रीय संवाद की अदालत

    अभिनव सिंह का ‘फेक दबदबा’: पुलिस के घेरे में खुला राज

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 15, 2026No Comments3 Mins Read
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    अभिनव सिंह
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    नीले कबूतर को उड़ाने चले थे, खुद ही पिंजरे में कैद हो गए! अभिनव सिंह करनी सेना के ‘फेक दबदबे’ का भयंकर पर्दाफाश!

    राष्ट्र संवाद
    उत्तर प्रदेश (इंद्र यादव) बाराबंकी की धरती पर इन दिनों एक नया ‘सर्कस’ चल रहा है, जिसके रिंगमास्टर हैं अभिनव सिंह करनी सेना। भाई साहब चले थे भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद (जिन्हें ये अपनी डिक्शनरी में ‘नीला कबूतर’ कहते हैं) का रास्ता रोकने, लेकिन सीन ऐसा पलटा कि अब खुद ही ‘कबूतर’ की तरह पिंजरे (पुलिस प्रोटेक्शन) में बैठकर दाना चुग रहे हैं!

    हाउस अरेस्ट है या ‘हॉलिडे पैकेज’

    तस्वीरों को गौर से देखिए जनाब!”एक शेर को रोकने के लिए पूरे जिले की पुलिस ने घेराबंदी कर ली।” भाई, मतलब कुछ भी! फोटो में तो ‘शेर’ सोफे पर पसरा हुआ है, बगल में पुलिस वाले ऐसे बैठे हैं जैसे पंचायत की मीटिंग चल रही हो। इसे ‘गिरफ्तारी’ नहीं, इसे “सरकारी दामाद वाली फीलिंग” कहते हैं।

    जनता का सवाल: अगर आप इतने ही बड़े ‘योद्धा’ थे, तो पुलिस के आने पर सीना तान के बाहर क्यों नहीं निकले? ये घर के अंदर सोफे पर बैठकर “फोटोशूट” कराने का क्या लॉजिक है!

    अंधेरी रात, साफा और सस्पेंस का ‘झोल’

    अभिनव भाई का ताजा वीडियो तो ऑस्कर लेवल की कॉमेडी है। भाई साहब अंधेरे में, साफा बांधकर, चेहरे पर ‘खूनी तांडव’ वाले भाव लाकर वीडियो बना रहे हैं। कह रहे हैं—”मैं बच-बचकर निकल रहा हूँ, पुलिस की पकड़ में नहीं आ रहा हूँ।”
    अरे भाई साहब, जब आप खुद ही वीडियो बनाकर दुनिया को बता रहे हो कि आप कहाँ हो, तो इसे ‘बचना’ नहीं, इसे “आ बैल मुझे मार” वाला स्टंट कहते हैं। आप चोर-सिपाही खेल रहे हो या राजनीति! साफ़ दिख रहा है कि ‘घेराबंदी’ के नाम पर भाई साहब का पसीना छूट गया है और अब वो बस ‘लाइव’ आकर अपनी इज्जत बचाने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।

    युवाओं के भविष्य के साथ ‘खिलवाड़’

    मजाक अपनी जगह, लेकिन ये ‘षडयंत्र’ गहरा है। अभिनव सिंह जैसे लोग सोशल मीडिया पर ‘दबदबा-दबदबा’ चिल्लाकर युवाओं के खून में उबाल लाते हैं।
    खुद का गेम: खुद तो पुलिस की छांव में बैठकर चाय-बिस्कुट तोड़ रहे हैं।
    युवाओं का नुकसान: इनके बहकावे में आकर अगर कोई लड़का जोश में आकर कोई कांड कर दे, तो उसकी पूरी जिंदगी जेल की चक्की पीसते हुए निकल जाएगी। तब ये ‘अभिनव भाई’ उसे छुड़ाने नहीं आएंगे, क्योंकि तब वो खुद ‘अंडरग्राउंड’ होने का नया वीडियो बना रहे होंगे।

    दबदबा पिघल गया जैसे ‘धूप में कुल्फी’

    बाराबंकी की जनता और प्रशासन ने ऐसा तगड़ा ‘सिस्टम’ टाइट किया कि भाई साहब अब “जिंदा रहूँ या न रहूँ” वाली इमोशनल बातें कर रहे हैं। भाई, इतना ड्रामा तो एकता कपूर के सीरियल्स में भी नहीं होता!
    जो इंसान खुद को बचाने के लिए रजाई और पुलिस के पीछे छिप रहा है, वो दूसरों का रास्ता क्या खाक रोकेगा? ये तो वही बात हो गई कि “गरजने वाले बादल, अब छतरी ढूंढ रहे हैं!

    ‘शेर’ निकला सोशल मीडिया का कागजी पहलवान!
    अभिनव भाई की “कॉमेडी नाइट्स” अब सोशल मीडिया पर ट्रोलर्स का पसंदीदा अड्डा बन गई है। चंद्रशेखर आज़ाद की रैली तो अपने समय पर होगी, लेकिन अभिनव सिंह ने ये साबित कर दिया कि इंटरनेट पर ‘बाहुबली’ बनना आसान है, लेकिन जमीन पर जब कानून का डंडा चलता है, तो बड़े-बड़े ‘शेर’ मीमियाने लगते हैं।

    शेर जब शिकार पर निकलता है तो दहाड़ता है, लेकिन हमारा ‘शेर’ तो पुलिस की घेराबंदी में ‘लाइव’ आकर लोकेशन छुपाने का ट्यूटोरियल दे रहा है! इसे कहते हैं—डिजिटल दबदबा, फिजिकल डब्बा!

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