पहली ही बारिश में ढहा विधायक निधि से बन रहा गार्डवाल, ग्रामीणों ने घटिया निर्माण का लगाया आरोप
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: जुगसलाई विधानसभा क्षेत्र के उत्तरी सरजामदा स्थित बड़ा सरजामदा तालाब में विधायक निधि से निर्माणाधीन आरसीसी गार्डवाल पहली ही बारिश की परीक्षा में टिक नहीं सका। लगातार हुई बारिश के बाद गार्डवाल का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। इसके साथ ही तालाब की मेड़ पर दूसरे विभाग द्वारा बनाई जा रही सड़क भी क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों ने निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितता, घटिया सामग्री के उपयोग और विभागीय अधिकारियों व ठेकेदार की मिलीभगत का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार तालाब के किनारे मिट्टी के कटाव को रोकने के उद्देश्य से विधायक निधि से लगभग 13 लाख रुपये की लागत से करीब 230 फीट लंबा आरसीसी गार्डवाल बनाया जा रहा था। इसी दौरान तालाब की मेड़ पर एक अन्य विभाग की ओर से सड़क निर्माण का कार्य भी चल रहा था। निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ था कि दो दिनों की बारिश में गार्डवाल भरभराकर गिर गया और सड़क का बड़ा हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क के नीचे की मिट्टी बह जाने से वहां आवागमन भी प्रभावित हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण स्थल पर योजना संबंधी सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया था, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो सका कि सड़क का निर्माण किस विभाग द्वारा कराया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान कई बार गुणवत्ता को लेकर आपत्ति जताई गई, लेकिन अधिकारियों और ठेकेदार ने उनकी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। उनका दावा है कि गार्डवाल में मानक के अनुरूप सरिया और अन्य निर्माण सामग्री का उपयोग नहीं किया गया, जिसके कारण पहली ही बारिश में पूरी संरचना धराशायी हो गई।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि तालाब से पानी निकासी के लिए प्रस्तावित पुलिया का निर्माण अब तक नहीं किया गया। बारिश के दौरान पानी का दबाव बढ़ने से गार्डवाल और सड़क दोनों को नुकसान पहुंचा। तालाब के मालिक वारिस महतो ने बताया कि उन्होंने हाल ही में करीब 50 हजार रुपये की मछलियां तालाब में छोड़ी हैं। गार्डवाल टूटने के कारण अब मछलियों के बह जाने की आशंका भी बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण के दौरान विभागीय इंजीनियर कभी निरीक्षण के लिए नहीं पहुंचे।
ग्रामीणों ने जिला उपायुक्त से पूरे मामले की तकनीकी और उच्चस्तरीय जांच कराने, दोषी ठेकेदार एवं संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा सरकारी धन की बर्बादी के लिए जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

