राष्ट्र संवाद संवाददाता
नई दिल्ली/जमशेदपुर। सांसद बिद्युत बरण महतो ने लोकसभा में नियम 377 के तहत हीमोफीलिया रोग का गंभीर मामला उठाते हुए देशभर के मरीजों को आधुनिक और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि हीमोफीलिया एक लाइलाज रक्तस्राव संबंधी बीमारी है, जिसमें खून का थक्का बनने की क्षमता अत्यंत कम होती है और रोगियों, खासकर बच्चों को जीवनभर इलाज की आवश्यकता होती है।
सांसद ने बताया कि पहले इस बीमारी का इलाज ताजा रक्त या प्लाज्मा से किया जाता था, जो प्रभावी नहीं था। बाद में फैक्टर-आठ आधारित उपचार शुरू हुआ, लेकिन इससे HIV/AIDS और हेपेटाइटिस-बी जैसे संक्रमण के मामले भी सामने आए। वर्तमान में रिकॉम्बिनेंट फैक्टर-आठ और विस्तारित अर्ध-आयु वाले उपचार उपलब्ध हैं, जिन्हें बार-बार देना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में एमिसिज़ुमैब नामक आधुनिक दवा आई है, जिसे महीने में एक बार त्वचा के नीचे दिया जाता है और इससे रक्तस्राव लगभग समाप्त हो जाता है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भी इसे प्रभावी माना है।
महतो ने यह भी उल्लेख किया कि केंद्रीय बजट 2025-26 में इस दवा को आयात शुल्क और जीएसटी से मुक्त किया गया है, बावजूद इसके राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत, विशेषकर झारखंड में, यह दवा मरीजों को उपलब्ध नहीं कराई जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि देश के सभी हीमोफीलिया-ए मरीजों को एमिसिज़ुमैब दवा उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं, ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित जीवन मिल सके।

