संथाल पर सियासी साजिश का साया: झारखंड की राजनीति में उबाल
सुप्रियो भट्टाचार्य के बयान ने राज्य की राजनीति को झकझोरा
क्या सचमुच दिल्ली से रची जा रही कोई सुनियोजित साज़िश
देवानंद सिंह
झारखंड की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। भोगना डीह मामले में हुई गिरफ्तारी के बाद सत्ताधारी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच टकराव ने एक खतरनाक मोड़ ले लिया है। इस बार आरोप केवल सियासी नहीं, बल्कि जानलेवा साजिश तक पहुंच चुके हैं।
झामुमो के वरिष्ठ नेता सुप्रियो भट्टाचार्य ने जो बयान दिया है, वह राज्य की राजनीति को झकझोर देने वाला है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दिल्ली से एक सुनियोजित साज़िश रची जा रही है, जिसका मकसद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन या राज्य के किसी मंत्री की हत्या भी हो सकती है। यह आरोप न केवल सनसनीखेज है, बल्कि झारखंड जैसे संवेदनशील राज्य के लिए बेहद चिंताजनक संकेत भी।
श्री भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि भाजपा संथाल को मणिपुर बनाना चाहती है और इसके डायरेक्टर निशिकांत दुबे हैं, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन इस स्क्रिप्ट में प्रमुख किरदार हैं। इन बयानों से साफ है कि मामला अब सिर्फ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की सुरक्षा, नेतृत्व और सामाजिक सौहार्द्र पर सीधा हमला माना जा रहा है।
अगर, इस तरह की साजिश का आरोप सत्तारूढ़ दल का प्रवक्ता लगा रहा है, तो यह केवल सियासी बयान नहीं, एक गंभीर चेतावनी है। ऐसे आरोपों की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए और अगर इनमें सच्चाई है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से हों।
यह भी जरूरी है कि भाजपा अपनी स्थिति स्पष्ट करे और इन गंभीर आरोपों का जवाब दे। लोकतंत्र में विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन विरोध के नाम पर हत्या, साजिश और अशांति फैलाने की सोच अगर कहीं पनप रही है, तो यह न सिर्फ झारखंड के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए खतरे की घंटी है।
झारखंड को मणिपुर बनने से रोकना केवल एक नारा नहीं, राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक जिम्मेदारी है। राज्य की अस्मिता और लोकतंत्र की रक्षा तभी संभव है जब सभी पक्ष संयम, संवेदना और कानून के प्रति आस्था बनाए रखें। अब वक्त बयानबाज़ी का नहीं, जवाबदेही का है।

