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    Home » टाटा स्टील फाउंडेशन के द्वारा काती खेल प्रतियोगिता में 45 टीमों ने लिया भाग
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    टाटा स्टील फाउंडेशन के द्वारा काती खेल प्रतियोगिता में 45 टीमों ने लिया भाग

    Aman OjhaBy Aman OjhaMarch 20, 2026No Comments2 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता 

    पोटका। टाटा स्टील फाउंडेशन के द्वारा बिलुप्त होती आदिवासियों के पारंपरिक खेल सेकोर एवं काती को पुर्नजीवित एवं प्रोत्साहित करने के उदेश्य से शुरू किये गये दो दिवसीय प्रीमियर लीग-2026 के अंतिम दिन शुक्रवार को तेंतला फुटबॉल मैदान मे काती खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता के झारखंड एवं ओडिशा के सिनीयर एवं जुनियर वर्ग मे कुल 45 टीमों ने भाग लिया. इस प्रतियोगिता के समापन मे मुख्य अतिथि के रूप मे पोटका के विधायक संजीव सरदार उपस्थित थे, जिन्होंने विजेताओं के बीच पुरस्कार वितरण कर खिलाड़ियों का हौंसला बढ़ाया. मौके पर श्री सरदार ने कहा कि झारखंड और ओडिशा के सीमावर्ती क्षेत्र मे काती खेल भूमिज एवं संथाल आदिवासी समुदायों द्वारा अग्रणी रूप से खेला जाने वाला खेल है. काती पारंपरिक रूप से फसल के मौसम के बाद खेला जाता है. खेल में खिलाड़ियों की संख्या और मैदान का आकार निश्चित नहीं है. प्रत्येक खिलाड़ी के पास एक बांस की लाठी और इमली की लकड़ी से बनी एक अर्धवृत्ताकार डिस्क होती है, जिसे काती कहा जाता है. काती खेल त्वरित सजगता और पैरों के कुशल उपयोग का खेल है. खेल में एक टीम अपनी कातियों को एक स्थान पर एक पंक्ति में सीधा खड़ा कर देती है, वहीं दूसरी टीम अपनी कातियों से उस पर प्रहार करके उसे गिराने का प्रयास करती है, जिसे वे एक निश्चित दूरी से एक लंबे बांस की सहायता से अपने पैर से मारते हैं. प्रत्येक सफल प्रहार अंक अर्जित करता है. अंत में, सफल प्रहार करने वाली टीम ‘बर्गा’ (राजा) पर प्रहार करती है, जो दोनों तरफ कातियों के बीच में रखा गया एक छोटा लकड़ी होता है. इस आयोजन को सफल बनाने मे टाटा स्टील फाउंडेशन के ट्राईबल आइडेंटिटी लीड शिव शंकर कांडेयोंग, मैनेजर आनंद बोयपाई, बीरेन तियु, आरसी टुडू, लखन हांसदा, रीतेश टुडू, देवराज मुंडा, शिव नारायण हेंब्रोम, अजिंक्या बिरुआ, सालखन मुर्मू, रमेश सुंडी आदि का सराहनीय योगदान रहा.

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