उत्तराखंड के हरिद्वार में चल रहे कांवड़ मेले के दौरान इस बार शिवभक्ति का एक अनोखा स्वरूप श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बन गया. हरकी पैड़ी पर दिल्ली से आए शिवभक्तों द्वारा असली नोटों से सजाई गई कांवड़ को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. इस अनूठी कांवड़ को देखकर लोग रुककर उसकी तस्वीरें और वीडियो बनाते नजर आए. शिवभक्तों का कहना है कि यह कांवड़ किसी प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा और सेवा भावना का प्रतीक है.
दिल्ली के हर्ष विहार निवासी दीपांशु, विकास और तरुण गंगाजल भरने के लिए हरिद्वार पहुंचे थे. इस बार उन्होंने अपनी कांवड़ को अलग स्वरूप देने का निर्णय लिया और उसे 100, 50, 20 और 10 रुपये के असली नोटों से सजाया. श्रद्धालुओं के अनुसार यह विचार उन्हें पिछले वर्ष की कांवड़ यात्रा के दौरान आया था और इस बार उन्होंने अपने संकल्प को साकार किया. नोटों की कुल संख्या का कोई अलग से हिसाब नहीं रखा गया. जितने नोट उपलब्ध होते गए, उन्हें सावधानीपूर्वक कांवड़ पर सजाया जाता गया.
शिवभक्त दीपांशु ने बताया कि इस विशेष कांवड़ को तैयार करने में नौ लोगों ने लगातार एक दिन और एक रात तक मेहनत की. बारिश के मौसम को देखते हुए नोटों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी कांवड़ को पारदर्शी प्लास्टिक शीट से ढक दिया गया, ताकि यात्रा के दौरान पानी से कोई नुकसान न हो. उनका कहना है कि इस पूरी तैयारी का उद्देश्य केवल भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था को अलग तरीके से व्यक्त करना था.
दीपांशु ने बताया कि कांवड़ यात्रा पूरी होने के बाद दिल्ली स्थित शिवालय पहुंचकर कांवड़ में लगे सभी नोट उतारकर मंदिर में दान कर दिए जाएंगे. इस धनराशि का उपयोग भंडारे, धार्मिक आयोजनों और जरूरतमंद लोगों की सहायता जैसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस बार उन्होंने भगवान शिव से एक विशेष मनोकामना भी मांगी है. यदि उनकी इच्छा पूरी होती है तो अगले वर्ष इससे भी बड़ी और अधिक नोटों से सजी कांवड़ लेकर हरिद्वार आने का संकल्प है.
साथी कांवड़ यात्री तरुण ने बताया कि उनकी कोई व्यक्तिगत मनोकामना नहीं है. वह हर वर्ष भगवान शिव की भक्ति में कांवड़ यात्रा करते हैं, लेकिन इस बार उन्होंने श्रद्धा को कुछ अलग रूप देने का प्रयास किया है. उनका कहना है कि कांवड़ में लगाए गए सभी नोट अंततः मंदिर को समर्पित किए जाएंगे, जिससे उनका उपयोग जनसेवा और धार्मिक कार्यों में किया जा सके.
हरकी पैड़ी पर इस अनोखी कांवड़ ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया. बड़ी संख्या में लोग इस कांवड़ के साथ तस्वीरें लेते और इसके बारे में जानकारी प्राप्त करते दिखाई दिए. कांवड़ यात्रा के दौरान हर वर्ष भक्त अपनी आस्था को अलग-अलग रूपों में प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इस बार नोटों से सजी कांवड़ चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है. श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि धार्मिक आस्था के साथ समाजसेवा का संदेश भी जुड़ जाए तो ऐसी पहल और अधिक प्रेरणादायक बन जाती है.

