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    Home » नोटिफाइएड एरिया कमिटी द्वारा बिना नियम एवं तर्क के अनुचित मनमाने ढंग से अत्याधिक भाड़ा बढ़ाया जाना सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इन्डस्ट्री किया पुरज़ोर विरोध
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    नोटिफाइएड एरिया कमिटी द्वारा बिना नियम एवं तर्क के अनुचित मनमाने ढंग से अत्याधिक भाड़ा बढ़ाया जाना सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इन्डस्ट्री किया पुरज़ोर विरोध

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 14, 2022No Comments4 Mins Read
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    नोटिफाइएड एरिया कमिटी द्वारा बिना नियम एवं तर्क के अनुचित मनमाने ढंग से अत्याधिक भाड़ा बढ़ाया जाना सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इन्डस्ट्री किया पुरज़ोर विरोध

    मुकेश मित्तल ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा है कि टाटा कंपनी द्वारा जमशेदपुर के बाजारों में आवंटित दुकानों से जमशेदपुर नोटिफाइएड एरिया कमिटी द्वारा बिना नियम एवं तर्क के अनुचित मनमाने ढंग से अत्याधिक भाड़ा बढ़ाया जाना

    टाटा कंपनी द्वारा जमशेदपुर के बाजारों में आवंटित दुकानों से जमशेदपुर नोटिफाइएड एरिया कमिटी द्वारा बिना नियम एवं तर्क के अनुचित मनमाने ढंग से अत्याधिक भाड़ा बढ़ाया जाने का सिंहभूम चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इन्डस्ट्री पुरज़ोर विरोध करता है। विगत कई वर्षों से जमशेदपुर की बाज़ारों में स्थित दुकानदार टाटा कंपनी को ही दुकान के भाड़े के साथ- साथ बिजली -पानी का चार्ज देते आये हैं।अचानक JNAC द्वारा जून महीने के पहले हफ्ते में मई महीने का भाड़ा का बिल 500 से 800 गुणा बढ़ाकर भेज दिया गया, जो सरासर गैरकानूनी, इरादतन, अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक एवं ” Against the Principle of Natural Justice” है। बिंदुवार विरोध के कारण निम्लिखित हैं।

    1) विगत कई वर्षों से दुकानदार टाटा कंपनी द्वारा जारी मासिक बिल के एवज में टाटा कंपनी को ही दुकान का भाड़ा देते हुए आये हैं और टाटा कंपनी को ही मकान मालिक समझते हैं। टाटा कंपनी ने बाज़ार की दुकानें JNAC को स्थानांतरित कर दी है और अब दुकान का मालिक टाटा कंपनी नहीं बल्कि JNAC है, क्या इसकी सूचना/अधिसूचना अखबारों, पर्चे या ध्वनि-विस्तारक यंत्र द्वारा दुकानदारों को दी गई?

    2) 500 से 800 गुणा यकायक भाड़ा बढ़ाना, क्या Rent Control Act का उल्लंघन नहीं है?

    3) भाड़ा बढ़ाने से पहले क्या JNAC द्वारा दुकानदारों को बताया गया कि किराया बढ़ाने के एवज में दुकानदारों को क्या-क्या सुविधाएं दी जाएगी?

    4) आज के बाज़ार भाव के हिसाब से भाड़ा लगाने से पहले क्या इस बात पर ध्यान दिया गया कि दुकानें 50-70 साल पुरानी हैं और किरायेदार भी लगभग 70 साल पुराने हैं?

    5) SDO द्वारा 70 साल पुरानी दुकानों का आज के बाज़ार भाव के हिसाब से भाड़ा फिक्स करने से पहले, क्या बाज़ार के दुकानदारों की जनसुनवाई की गई या उन्हें पार्टी बनाया गया?

    6) बाज़ार की भाड़े की दुकानों के अगल-बगल स्थित sub-leased लैंड पर बनी दुकानों से केवल मालगुज़ारी के एवज में municipal taxes लेने का प्रावधान है, जो केवल 50-150 रुपये मात्र है। क्या भाड़े के दुकानदार बाज़ार मूल्य के हिसाब से भाड़ा देने के बाद, sub-leased लैंड पर बनी दुकानों के दुकानदारों से बाज़ार में बराबरी कर पाएंगे?

    7) क्या भाड़ा बढ़ाते समय इस बात का ध्यान रखा गया कि कौन सी दुकानें मैन रोड की हैं और कौन अंदर गली की दुकानें हैं?

    8) कई-कई दुकानों का भाड़ा तो इतना बढ़ा दिया गया है कि उनकी मासिक आमदनी भी इतनी नहीं कि भाड़ा देने में बाद वे अपना घर खर्च चला सकें। क्या दुकानदार कर्ज़ लेकर JNAC को भाड़ा देंगें।

    9) जिला प्रशाशन द्वारा इस प्रकार का जैरजिम्मेदारन अमानवीय निर्णय लेना, क्या पूरी सरकार को कटघरे में खड़ा करने के समान नहीं है?

    इस प्रकार के जनविरोधी फैसले से पूरे व्यापारिक वर्ग में रोष एवं भय व्याप्त है और लगभग 7000 दुकानदारों के परिवार की जीविका से खेलने के समान है। इस एकतरफा फैसले का पूरा व्यापारी वर्ग जोरदार ढंग से विरोध करता है और इस बढे हुए कियारे को देने में असमर्थ है। उपयुक्त महोदया से नम्र निवेदन है कि जमशेदपुर नोटिफाइएड एरिया कमिटी द्वारा मनमाने ढंग से अत्याधिक भाड़ा बढ़ाया जाना एवं 70 साल पुरानी दुकानों का आज के बाज़ार भाव के हिसाब से भाड़ा फिक्स करने के फैसले पर पुनर्विचार कर दुकानदार भाइयों को निजात दिलाएं ताकि लगभग 7000 दुकानदारों की जीविका से खिलवाड़ ना हो और व्यापारी-प्रशासन के बीच सामंजस्य एवं शांति व्यवस्था बनी रहे।

    मुकेश मित्तल

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